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चीन के साथ गतिरोध के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दिए रिश्ते सुधारने के 8 मूल मंत्र

चीन के साथ संबंधों पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को बयान दिया.
चीन के साथ संबंधों पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को बयान दिया.

भारत चीन संबंधों के संदर्भ में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि 2020 में हुई घटनाओं ने हमारे संबंधों पर वास्तव में अप्रत्याशित दबाव बढ़ा दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 28, 2021, 5:40 PM IST
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नई दिल्ली. विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने गुरुवार को भारत और चीन के बीच संबंधों को दोबारा पटरी पर लाने के लिए आठ मूल मंत्र दिए. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि पूर्वी लद्दाख में बीते साल हुई घटनाओं के चलते भारत और चीन (India-China) के द्विपक्षीय संबंध बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. विदेश मंत्री ने चीन के साथ जारी सीमा गतिरोध से जुड़े सवाल के जवाब में कहा कि उन्होंने (लद्दाख में घटनाओं ने) न सिर्फ सैनिकों की संख्या को कम करने की प्रतिबद्धता का अनादर किया, बल्कि शांति भंग करने की इच्छा भी दर्शायी.

विदेश मंत्री ने कहा कि हमें चीन के रुख में बदलाव और सीमाई इलाकों में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती पर अब भी कोई विश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि हमारे सामने मुद्दा यह है कि चीन का रुख क्या संकेत देना चाहता है, ये कैसे आगे बढ़ता है और भविष्य के संबंधों के लिए इसके क्या निहितार्थ हैं.

 2020 में हुई घटनाओं ने अप्रत्याशित दबाव बढ़ा दिया- जयशंकर
जयशंकर ने पूर्वी लद्दाख गतिरोध पर कहा कि साल 2020 में हुई घटनाओं ने हमारे संबंधों पर वास्तव में अप्रत्याशित दबाव बढ़ा दिया है. उन्होंने कहा कि संबंधों को आगे तभी बढ़ाया जा सकता है जब वे आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता, आपसी हित जैसी परिपक्वता पर आधारित हों.
ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस ऑफ चाइन स्टडीज के 13वे सम्मेलन में जयशंकर ने कहा कि सीमा पर हमारे बीच मतभेदों और असहमतियों के बीच वास्तविकता यह है कि सीमा के क्षेत्र अभी भी मौलिक रूप से शांतिपूर्ण हैं. साल 2020 से पहले भारत-चीन सीमा पर आखिर बार साल 1975 में किसी की जान गई थी. जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के संबंध दोराहे पर हैं और इस समय चुने गए विकल्पों का न केवल दोनों देशों बल्कि पूरी दुनिया पर प्रभाव पड़ेगा.





जो समझौते हुए हैं, उनका पूर्णतया पालन - जयशंकर
जयशंकर ने कहा कि जो समझौते हुए हैं, उनका पूर्णतया पालन किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा का कड़ाई से पालन और सम्मान किया जाना चाहिए. विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि यथास्थिति को बदलने का कोई भी एकतरफा प्रयास स्वीकार्य नहीं है. जयशंकर ने कहा कि हमें चीन के रुख में बदलाव और सीमाई इलाकों में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती पर अब भी कोई विश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं मिला है.

चीन के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि संबंधों को आगे तभी बढ़ाया जा सकता है जब वे आपसी सम्मान एवं संवेदनशीलता तथा आपसी हित जैसी परिपक्वता पर आधारित हों. विदेश मंत्री ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में शांति स्थापना चीन के साथ संबंधों के सम्पूर्ण विकास का आधार है और अगर इसमें कोई व्यवधान आयेगा तो नि:संदेह बाकी संबंधों पर इसका असर पड़ेगा.

पिछले कई महीने से भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच गतिरोध
उन्होंने कहा, ‘हमारे सामने मुद्दा यह है कि चीन का रुख क्या संकेत देना चाहता है, यह कैसे आगे बढ़ता है और भविष्य के संबंधों के लिए इसके क्या निहितार्थ हैं.' विदेश मंत्री ने कहा कि सीमा पर स्थिति की अनदेखी कर जीवन सामान्य रूप से चलते रहने की उम्मीद करना वास्तविक नहीं है. जयशंकर ने कहा कि अगर संबंधों को स्थिर और प्रगति की दिशा में लेकर जाना है तो नीतियों में पिछले तीन दशकों के दौरान मिले सबकों पर ध्यान देना होगा.

गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले कई महीने से भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच गतिरोध की स्थिति है. इस मामले में कई दौर की राजनयिक स्तर और सैन्य स्तर की बातचीत हो चुकी है.
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