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लेह में हादसे के बाद साल भर से लापता है BRO अधिकारी, जिंदगी-मौत की खबर के इंतजार में परिवार

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसके संबंध में अमरोहा सांसद कुंवर दानिश अली को पत्र लिखा था. (फाइल फोटो)

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसके संबंध में अमरोहा सांसद कुंवर दानिश अली को पत्र लिखा था. (फाइल फोटो)

Subhan Ali Missing: शुब्हान के पिता रमजान अली (Ramzan Ali) का कहना है 'अगर हमें उसकी बॉडी मिलती है, तो कम से कम हमें यह पता लग जाएगा कि वो हमें छोड़कर जा चुका है. लेकिन अब तक हमारी सभी कोशिशें बेकार हुई हैं.'

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लखनऊ. बीते साल 22 जून की बात है. 27 साल के इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज (IES) अधिकारी सुब्हान अली (Subhan Ali) जोजिला-कर्गिल-लेह रोड (Zozila-Kargil-Leh road) पर द्रास नदी (Drass River) में वाहन गिरने के बाद से ही गायब हो गए थे. उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में उनका परिवार अब भी अली के वापस लौटने की उम्मीद लगाए बैठा है, लेकिन सरकार की तरफ से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है. अली बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) के साथ काम कर रहे थे. खास बात है कि अली की शादी होनी है. घर में तैयारियों का दौर शुरू होने के बाद बीच में ही रुका हुआ है.

परिवार केवल अपने बेटे की स्थिति जानना चाहता है. वे चाहते हैं कि उन्हें बता दिया जाए कि अली जिंदा है या नहीं. बीते महीने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने अमरोहा सांसद कुंवर दानिश अली को पत्र लिखा था. उन्होंने बताया था कि नदी से मिले 'अज्ञात शव' के डीएनए टेस्ट में अभी और वक्त लगेगा. अली का परिवार दो बार घटनास्थल पर जा चुका है. उन्हें अधिकारियों ने बताया था कि मौके से कुछ दूरी पर ड्राइवर का शव मिला था.

बीते हफ्ते, अली के परिवार को जानकारी दी गई कि चंडीगढ़ स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री और पाकिस्तान अथॉरिटी के साथ मिलकर की गई जांच में नई जानकारी हाथ लगी है. कर्गिल एसपी अनायत अली ने बताया 'इससे उनका डीएनए मैच नहीं कर रहा है. यह रिपोर्ट कुछ दिन पहले सामने आई है.' सुब्हान के पिता रमजान अली का कहना है 'अगर हमें उसकी बॉडी मिलती है, तो कम से कम हमें यह पता लग जाएगा कि वो हमें छोड़कर जा चुका है. लेकिन अब तक हमारी सभी कोशिशें बेकार हुई हैं.' रमजान कौआपुर गांव में दर्जी का काम करते हैं.



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पढ़ने में बेहद होशियार थे सुब्हान
अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में परिवार ने बताया कि बगैर किसी कोचिंग के सुब्हान ने परीक्षा पास की. इसके बाद 2016-17 में वो दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी में जूनियर इंजीनियर के तौर पर नियुक्त हुआ. इसके बाद उसने इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज की परीक्षा पहले ही  प्रयास में पास की. डीडीए में काम करने के बाद सुब्हान ने जनवरी 2020 में बीआरओ जॉइन की. यहां लेह में उन्हें पहली पोस्टिंग मिली. घर के दोनों बेटों की कमाई के चलते परिवार के हालात अब बेहतर हो चुके थे.

अब बिगड़ने लगे हैं आर्थिक हालात
लंबे समय से सुब्हान का इंतजार कर रहे परिवार के सामने कई परेशानियां आने लगी हैं. शाबान बताते हैं 'हमारी सेविंग्स खत्म हो रही हैं और हमें कोई आर्थिक मदद नहीं मिल रही है. स्थानीय प्रशासन और एक एनजीओ की मदद से मुझे दो बार अपने भाई की तलाश में कर्गिल जाना पड़ा.' उन्होंने कहा 'मेरा काम बंद हो गया है, क्योंकि अब मुझे परिवार और मां-बाप का ध्यान रखने के लिए घर पर रहना पड़ता है.'

भाई शाबान ने जानकारी दी 'बीते मार्च में सुब्हान की शादी होनी थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण टल गई. हमने लगभग तैयारियां कर ली थीं. दिल्ली में कार्ड छप चुके थे और हम पहली मंजिल पर महंगे सामान के साथ उसका कमरा तैयार करा रहे थे. लेकिन अब कोई भी ऊपर नहीं जाता, क्योंकि वहां जाना हमें तोड़ देता है.'
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