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लड़की का सेक्सुअली एक्टिव होना आरोपी को जमानत देने का आधार नहीं- सुप्रीम कोर्ट

News18Hindi
Updated: November 30, 2019, 7:20 PM IST
लड़की का सेक्सुअली एक्टिव होना आरोपी को जमानत देने का आधार नहीं- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट यौन हिंसा के खिलाफ सख्त है.

सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से रिजवान को दी गई जमानत 2 मिनट के भीतर रद्द हो गई.

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  • Last Updated: November 30, 2019, 7:20 PM IST
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नई दिल्ली. बलात्कार और यौन हिंसा के मामलों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर रहे सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को कहा है कि किसी भी रेप के मामले में लड़की सेक्स लाइफ की वजह से आरोपी को बेल नहीं दिया जा सकता है. अदालत ने कहा है कि चिकित्सकीय सबूत भले ही इस ओर इशारा कर रहे हों कि पीड़िता सेक्सुअली एक्टिव है, तब भी इस आधार पर कोई हाईकोर्ट जमानत नहीं दे सकता.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस.ए.बोबड़े (CJI SA Bobde), जस्टिस बी.आर. गवाई और जस्टिस सूर्य कांत की पीठ ने एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत पर सख्त रुख अख्तियार किया.

सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पीड़िता का सेक्सुअली एक्टिव होना जमानत देने का आधार नहीं हो सकता. रेप केस में आरोपी रिजवान को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने इसी आधार पर जमानत दे दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने रिजवान की जमानत भी रद्द कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है आरोपी चार हफ्ते के भीतर खुद को मुजफ्फरनगर कोर्ट में सरेंडर कर दे.

 POCSO के तहत एफआईआर

वहीं इलाहाबाद HC ने अपने आदेश में दर्ज किया था कि लड़की के पिता की शिकायत पर यूपी पुलिस ने IPC की धारा 376 और POCSO के तहत एफआईआर दर्ज की थी. डॉक्टरों ने लड़की की जांच की.

एक मजिस्ट्रेट के सामने CRPC की धारा 164 के तहत अपने बयान में लड़की ने दावा किया कि उसके सिर पर एक देशी पिस्टल रख कर रिजवान ने उसका यौन उत्पीड़न किया. उसने कहा कि जब उसने सारी बात बताई तब उसके पिता को इसकी जानकारी हुई और फिर एफआईआर दर्ज की गई.

पीड़िता को कोई भी अंदरुनी चोट नहीं आई - आरोपी के वकील
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हाईकोर्ट ने 3 अप्रैल, 2018 के आदेश में रिज़वान के वकील की ओर दिए गए सबमिशन को दर्ज किया. रिकॉर्ड में दाखिल किए गए मेडिकल जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि पीड़िता को कोई भी अंदरुनी चोट नहीं आई है. डॉक्टर की रिपोर्ट भी कह रही है कि उसे सेक्स की आदत थी. आरोपी के वकील ने कहा कि प्राथमिकी इसलिए दर्ज की गई क्योंकि लड़की के पिता ने इस घटना को देख लिया.

आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि लड़की की उम्र बालिग होने में सिर्फ 2 साल बचे हैं लेकिन कानून के तहत 2 साल की छूट दी जा सकती है. मतलब यह माना जा सकता है कि दोनों के बीच सहमति से संबंध बने. हाईकोर्ट ने साक्ष्य को ध्यान में रखा और कहा कि जमानत दिया जा सकता है हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में रिजवान को दी गई जमानत 2 मिनट के भीतर रद्द हो गई.

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First published: November 30, 2019, 7:02 PM IST
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