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केंद्र सरकार ने पहले से की गई तैयारियों के दम पर पाकिस्‍तान से आई टिड्डियों के हमले को बढ़ने से रोका

अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: February 17, 2020, 4:12 PM IST
केंद्र सरकार ने पहले से की गई तैयारियों के दम पर पाकिस्‍तान से आई टिड्डियों के हमले को बढ़ने से रोका
केंद्र, राजस्‍थान सरकार ने टिड्डी दलों के हमले से निपटने की तैयारी पहले ही कर ली थी. इसलिए इसे आगे बढ़ने से रोका जा सका.

टिड्डी दलों को पाकिस्‍तान से लगते भारत के सीमावर्ती जिलों (Border Districts) में नहीं रोका जाता तो न सिर्फ राजस्थान (Rajasthan) में फसलों को भारी मात्रा में नुकसान होता बल्कि पश्चिमी भारत (Western India) और दूसरे क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा (Food Security) को खतरा पैदा हो जाता. साथ ही लोगों की आजीविका पर बुरा असर पड़ता. ये भी संभव था कि टिड्डियों के ये दल हरियाणा (Haryana) और पंजाब (Punjab) की ओर बढ़ते.

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  • Last Updated: February 17, 2020, 4:12 PM IST
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नई दिल्‍ली. भारत सरकार ने तमाम उपलब्ध संसाधनों के सही इस्तेमाल से टिड्डियों (Locusts) के हमले से पैदा हालात पर काबू पा लिया है. वहीं, पड़ोसी पाकिस्तान (Pakistan) और अफ्रीका (Africa) के कुछ देशों में टिड्डियों के हमले की वजह से आपातकाल तक घोषित किया जा चुका है. भारत सरकार के आंकड़े बताते हैं कि ये 1993 के बाद टिड्डी दलों का सबसे बड़ा हमला था. केंद्र सरकार (Central Government), राज्य सरकार (State Government) और किसानों (Farmers) के सहयोग से इस हमले को भारत-पाकिस्तान के सीमावर्ती जिलों तक ही सीमित करने में सफलता मिली. सरकार ने पूरे मामले को देखने के लिए एक इंटर मिनिस्ट्रीयल ग्रुप भी बनाया है, जो तय करेगा कि भविष्‍य में भी सीमा पार से आ रहे इन हमलावरों को पूरी तरह से खत्‍म करने में सफलता मिले.

पश्चिम भारत समेत दूसरे क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा पर पड़ता बुरा असर
कृषि अधिकारियों (Agriculture Officers) ने प्रभावित क्षेत्र के दौरे के बाद रिपोर्ट मे लिखा कि टिड्डी दलों को पाकिस्‍तान से लगते भारत के सीमावर्ती जिलों (Border Districts) में नहीं रोका जाता तो न सिर्फ राजस्थान (Rajasthan) में फसलों को भारी मात्रा में नुकसान होता बल्कि पश्चिमी भारत (Western India) और दूसरे क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा (Food Security) को खतरा पैदा हो जाता. साथ ही लोगों की आजीविका पर बुरा असर पड़ता. ये भी संभव था कि टिड्डियों के ये दल हरियाणा (Haryana) और पंजाब (Punjab) की ओर बढ़ते.टिड्डियां 1950 में भरात से होते हुए बांग्‍लादेश (Bangladesh) में घुस गई थीं. तब वहां टिड्डियों के कारण भयंकर महामारी फैली थी. वहां 14 साल लगातार फसलों को नुकसान होता रहा था.

हवाई नियंत्रण क्षमता बढ़ाने के लिए मंत्रालयों में बढा रहे समन्‍वय



स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने 10 माइक्रोनेयर स्‍प्रेयर खरीदे, जो जनवरी 2020 में ही भारत पहुंच गए थे. नियंत्रण उपकरणों के साथ ही वाहन भी खऱीदे जा रहे हैं. केंद्र सरकार की ओर से 60 नए स्प्रेयर खरीदने का आदेश भी दिया जा चुका है. हवाई नियंत्रण क्षमता बढाने के लिए गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, नागर विमानन मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के साथ समन्वय बढाया जा रहा है, ताकि 2019-2020 की तरह आने वाले सालों में भी टिड्डियों को पाकिस्तान की सीमा से भारत में घुसने से रोका जा सके. कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय के तहत टिड्डी चेतावनी संगठन जोधपुर और राज्य सरकारों में 10 टिड्डी सर्कल कार्यालयों से समन्‍वय कर राजस्थान तथा गुजरात के रेगिस्तानी इलाकों में काम करते हैं. ये कार्यालय जैसलमेर, बाडमेर, बीकानेर, जालौर, फलौदी, चुरु, नागौर और सूरतगढ़ और गुजरात के पालनपुर व भुज मे हैं.

टिड्डी दलों पर हवाई नियंत्रण क्षमता बढाने के लिए गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, नागर विमानन मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के साथ समन्वय बढाया जा रहा है.


अनुमान से पहले ही राजस्‍थान में घुसने लगे टिड्डियों के दल
रेगिस्तानी टिड्डियां अफ्रीका, पूर्व व दक्षिण पश्चिम एशिया के रेगिस्तानों (Deserts) में पाई जाती हैं. ये इलाके 1.6 करोड़ वर्ग किमी में फैले हुए हैं. इनमें 30 देश पूरी तरह से या फिर आंशिक रूप से टिड्डियों से प्रभावित हैं. भारत में भी 2 लाख वर्ग किमी से अधिक रेगिस्तानी क्षेत्र माना जाता है. साल 2019 की शुरुआत में ही दक्षिण पश्चिम एशिया में ईरान और पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में टिड्डियों के लगातार प्रजनन से इनकी संख्या बढ़ गई थी. आशंका बढ़ी कि गर्मी में भारत-पाकिस्तान सीमा पर इनका प्रजनन फिर बढेगा. कृषि और खाद्य संगठन ने पूर्वानुमान जारी करते हुए बताया था कि 2019 में जून के मध्य तक भारत में वयस्क टिड्डियों के समुहों के कारण खतरा पैदा हो सकता है. अनुमान से पहले ही 22 मई से राजस्थान के जैसलमेर में रामदेवरा में टिड्डियों का प्रवेश शुरू हो गया. 22 मई से ही भात सरकार के टिड्डी नियंत्रण दल ने बचाव और नियंत्रण कार्य शुरू कर दिया.

अब तक 4,03,143 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जा चुका है उपचार
प्रोटोकॉल के मुताबिक जून-दिसंबर 2019 के दौरान भारत और पाकिस्तान (Pakistan) के टिड्डी नियंत्रण अधिकारियों के बीच खोकरापार (पाकिस्तान) और मुनावाओ (भारत) में पांच बैठकें हुईं. इस दौरान दोनों ओर से आंकड़ों का आदान-प्रदान भी हुआ. मई-दिसंबर 2019 तक प्रभावी नियंत्रण से इन्हें रोक तो दिया गया, लेकिन दिसंबर तक मौसम में बदलाव, बेमौसम बारिश और पाकिस्तान में टिड्डी दलों के नियंत्रण के अभाव व अनियंत्रित प्रजनन के कारण अवयस्क टिड्डियों के दल पाकिस्तान की ओर से राजस्‍थान के जैसलमेर तथा बाडमेर में घुस गए. जमीन तो जमीन ये टिड्डियां पेड़ों के ऊपर भी बैठने लगीं. सरकारी आंकडों के मुताबिक, मई 2019 से नियंत्रण कार्यक्रम शुरू हुआ और अब तक 4,03,143 हेक्टेयर क्षेत्र का उपचार किया जा चुका है.

राजस्‍थान और गुजरात सरकार ने चपेट में आने वाले इलाकों में जागरूकता अभियान भी शुरू कर दिया था.


चपेट में आने वाले इलाकों में चलाया जागरूकता अभियान
केंद्र सरकार ने राजस्थान और गुजरात सरकारों (Gujarat Government) को टिड्डियों के संभावित हमले के बारे में एडवाइजरी जारी की थी. साथ ही इसकी चपेट में आने वाले इलाकों में जागरूकता अभियान (Awareness Campaign) भी शुरू कर दिया था. भारत-पाकिस्तान की सीमा पर टिड्डी नियंत्रण के लिए अस्थायी शिविर स्थापित किए गए. नियंत्रण में लगे कर्मचारियों को बीएसएफ (BSF) का भी खासा सहयोग मिला. टिड्डियों को आगे के प्रदेशों में नहीं जाने दिया गया. इसमें टिड्डी नियंत्रण में लगे कर्मियों के प्रयासों और कठिन परिस्थितियों में की गई मेहनत का बड़ा योगदान है.

कर्मचारियों ने त्‍योहारों और छुट्टियों में भी की कड़ी मेहनत
सरकारी सूत्र बताते हैं कि कर्मचारी त्‍योहारों औऱ छु‍ट्टी के दिनों में भी टिड्डियों को रोकने के काम पर लगे रहे, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय (Agriculture Ministry) से प्रशासनिक तथा वित्‍तीय सहयोग मिलता रहा. यानि एक साल की मशक्कत के बाद भारत टिड्डियों को खत्‍म करने में सफल तो रहा, लेकिन खतरा यहां भी पाकिस्तान ही है. पाकिस्‍तान के रास्ते टिड्डियां भारत में घुसती हैं. ये सबक पाकिस्तान के लिए भी है कि भारत तो इन टिड्डियों को कंट्रोल कर लेगा, लेकिन उन्हें भी किसानों और आम आदमी के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाली बातों पर ध्यान देना होगा.

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First published: February 17, 2020, 4:04 PM IST
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अपडेटेड: April 10 (08:00 AM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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