कैसे बने बी एल संतोष बीजेपी के संगठन महासचिव

बहुत अहम होता है संगठन महासचिव का पद, संतोष पहले भी दक्षिण की राजनीति में दिखा चुके हैं अपनी राजनीतिक पकड़

Anil Rai | News18Hindi
Updated: July 15, 2019, 2:23 PM IST
कैसे बने बी एल संतोष बीजेपी के संगठन महासचिव
रामलाल की जगह बीएल संतोष देखेंगे संघ और बीजेपी के बीच का तालमेल
Anil Rai
Anil Rai | News18Hindi
Updated: July 15, 2019, 2:23 PM IST
बीजेपी में नए अध्यक्ष के चुनाव के पहले नए राष्ट्रीय महासचिव संगठन कि नियुक्ति कर दी गई है. बीजेपी के संगठन में वैसे तो 8 राष्ट्रीय महसाचिव हैं, लेकिन पार्टी की राजनीति में महासचिव संगठन का पद अध्यक्ष के बाद सबसे ताकतवर माना जाता है. संगठन महासचिव की भूमिका इसलिए महत्वूर्ण हो जाती है, क्योंकि ये पद बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बीच तालमेल के लिए बनाया गया और इस पर संघ से आया हुआ व्यक्ति ही बैठ सकता है. अपना कार्यकाल पूरा कर वो संघ में वापस चला जाता है. ऐसे में इस महसचिव की भूमिका और कद अन्य महासचिवों से बड़ा होता है और इसे बहुत महत्पूर्ण माना जाता है.

कौन-कौन था रेस में
संगठन महसाचिव राम लाल के इस्तीफे के बाद मीडिया में कई नाम इस पद क लिए चर्चा में थे. सबसे पहले जो नाम संगठन महसाचिव के लिए चर्चा मे आए वो थे. वी सतीश और शिव प्रकाश के लेकिन संघ और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने इन दोनों नामों को दरकिनार करते हुए बी एल संतोष के राष्ट्रीय महासचिव संगठन की जिम्मदारी सौंपी.

संतोष कैसे बने संघ और बीजेपी की पहली पंसद

बी एल संतोष को ही ये महत्वूर्ण जिम्मेदारी क्यों दी गई. इस सवाल का जबाब संतोष के पुराने कामों को देखने से से मिल जाएगा. दरअसल, दक्षिण में बीजेपी की पहली जीत का श्रेय बीएल संतोष को ही जाता है, दक्षिण में पहली बार 2008 में कर्नाटक में बीजेपी की सरकार बनी. उस समय बी एस संतोष संघ के कोटे से प्रदेश के संगठन महामंत्री थे. ऐसे में संतोष की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है हालंकि बाद में कर्नाटक के मुख्यमंत्री वाई एस येदुरप्पा और संतोष के बीच विवाद के कारण उन्हें राज्य क जिम्मेदारी से हटाकर बीजेपी की केन्द्रीय टीम में भेज दिया गया था .

दक्षिण में पार्टी को देंगे मजबूती

वरिष्ठ पत्रकार अंबिकानंद सहाय का कहना है कि बीजेपी के इस समय दक्षिण में मजबूत चेहरे की जरुरत है. हिन्दी भाषी राज्यों में बीजेपी हर जगह अने पाव फैला चुकी है पश्चिम बंगाल में भी 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन के बाद विधान सभा की राह उतनी मुश्किल नहीं है, क्योंकि बंगाल के आस-पास के राज्यों में बीजेपी ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, लेकिन दक्षिण की राह बीजेपी के लिए अभी भी मुश्किल है ऐसे में पार्टी की दक्षिण में अपनी सीमा विस्तार करने के लिए एक मजबूत रणनीतिकार की जरुरत थी. बी एल संतोष ने जिस तरह कर्नाटक में पर्दे के पीछे रहकर बीजेपी को सत्ता में लाने में महत्वूर्ण भूमिका अदा की थी ऐसे में बीजेपी के पास उनसे मुफीद कोई चेहरा नहीं था .
Loading...

ये भी पढ़ें : BJP में दूसरे सबसे शक्तिशाली पद पर नियुक्त हुए बीएल संतोष, रामलाल की जगह बनेंगे राष्ट्रीय महासचिव

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव: 40 विधायकों का टिकट काट सकते हैं CM फडणवीस
First published: July 15, 2019, 2:23 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...