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रक्षा अध्ययन संस्थान का नाम बदलकर पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के नाम पर रखा गया

भाषा
Updated: February 18, 2020, 7:59 PM IST
रक्षा अध्ययन संस्थान का नाम बदलकर पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के नाम पर रखा गया
मनोहर पर्रिकर का पिछले साल मार्च में निधन हो गया था (फाइल फोटो)

मनोहर पर्रिकर (Manohar Parrikar) नौ मार्च, 2014 से लेकर 14 मार्च, 2017 तक देश के रक्षा मंत्री (Defence Minister) रहे थे. पिछले साल 17 मार्च को कैंसर (Cancer) से उनका निधन हो गया था.

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नई दिल्ली. केंद्र सरकार (Central Government) ने पूर्व रक्षा मंत्री दिवंगत मनोहर पर्रिकर (Manohar Parrikar) की ‘प्रतिबद्धता और विरासत’ के सम्मान में सरकारी थिंक टैंक रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान (IDSA) का नाम बदलकर मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान कर दिया है.

मनोहर पर्रिकर (Manohar Parrikar) नौ मार्च, 2014 से लेकर 14 मार्च, 2017 तक देश के रक्षा मंत्री (Defence Minister) रहे थे. पिछले साल 17 मार्च को कैंसर (Cancer) से उनका निधन हो गया था.

पठानकोट और उरी जैसे हमलों की कठिन चुनौती के दौर में किया था रक्षा मंत्रालय का नेतृत्व
मंगलवार को जारी एक सरकारी बयान में कहा गया है कि उन्होंने पठानकोट और उरी जैसे हमलों (Attacks Like Pathankot and Uri) की कठिन चुनौती के दौर में रक्षा मंत्रालय का नेतृत्व किया और अनुकरणीय साहस के साथ उनका (चुनौतियों का) जवाब दिया.’’



बयान में कहा गया है, ‘‘अपने पूरे करियर के दौरान सार्वजनिक जीवन (Public Life) में ईमानदारी और समर्पण के प्रतीक दिवंगत मनोहर पर्रिकर ने जुझारूपन दिखाया और बड़ी निर्भीकता से विषम स्थितियों से टक्कर ली.’’

वन रैंक, वन पेंशन के जरिए पूर्व सैनिकों की जिंदगी बेहतर बनाने में दिया योगदान
बयान के अनुसार जब पर्रिकर रक्षा मंत्री थे तब भारत में कई निर्णय लिये गये जिनसे ‘देश की सुरक्षा क्षमता बढ़ी, स्वदेशी रक्षा उत्पादन (Indigenous Defense Production) में तेजी आयी और पूर्व सैनिकों की जिंदगी बेहतर बनी.’

बयान के मुताबिक उनका सबसे बड़ा योगदान सशस्त्र बलों की वन रैंक वन पेंशन (One Rank, One Pension) की मांग को लागू करना था.

अपनी सादी जीवनशैली के लिए जाने जाते थे मनोहर पर्रिकर
गोवा के मुख्‍यमंत्री मनोहर पर्रिकर का लंबे समय तक कैंसर से जूझने के बाद 63 साल की उम्र में निधन हो गया था. वे नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्‍व वाली केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री के पद पर भी रहे थे. वे रक्षा मंत्री बनने के लिए लालायित नहीं थे लेकिन केंद्रीय नेतृत्‍व के जोर देने पर दिल्‍ली आ गए.

पर्रिकर बचपन से ही आरएसएस से जुड़ गए थे. संघ की मराठी मैगजीन के अनुसार वे 26 साल की उम्र में संघचालक बन गए थे और इतनी कम उम्र में संघचालक बनने वाले वे पहले व्‍यक्ति थे. उन्‍होंने आईआईटी बॉम्‍बे से मेटाल्‍युर्जिकल इंजीनियरिंग की. इंफोसिस (Infosys) के सह संस्‍थापक नंदन निलेकणि उनके बैचमेट थे.

मनोहर पर्रिकर को सरकारी सुविधाएं (Government Facilities) छोड़ने के लिए भी जाना जाता है. वे अक्‍सर साइकिल चलाते नजर आते थे. सीएम रहने के दौरान भी वे अपने घर में रहते थे.

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First published: February 18, 2020, 7:59 PM IST
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