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विदेश मंत्रालय ने अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जानकारी विभिन्न देशों को दी

डीन ऑफ डिप्लोमेटिक कोर और डोमिनिकन गणराज्य के राजदूत डैन्ननेबर्ग कास्टेलानोस ने भारत के इस कदम की सराहना की है (फाइल फोटो)

डीन ऑफ डिप्लोमेटिक कोर और डोमिनिकन गणराज्य के राजदूत डैन्ननेबर्ग कास्टेलानोस ने भारत के इस कदम की सराहना की है (फाइल फोटो)

विदेश मंत्रालय (Ministry Of Foreign Affairs) के सूत्रों ने बताया कि दक्षिण पूर्व एशिया (South East Asia), दक्षिण अमेरिका (South America), अफ्रीका (Africa), यूरोप (Europe) और खाड़ी देशों (Gulf Countries) के राजदूतों को फैसले की जानकारी दी गई.

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    नई दिल्ली. विदेश मंत्रालय (Ministry Of Foreign Affairs) के वरिष्ठ अधिकारियों ने शनिवार को अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आए ऐतिहासिक फैसले से रूस (Russia), फ्रांस (France) और ईरान (Iran) सहित विभिन्न देशों के शीर्ष राजदूतों को अवगत कराया. सूत्रों ने यह जानकारी दी.

    सूत्रों ने बताया कि दक्षिण पूर्व एशिया (South East Asia), दक्षिण अमेरिका (South America), अफ्रीका (Africa), यूरोप (Europe) और खाड़ी देशों (Gulf Countries) के राजदूतों को फैसले की जानकारी दी गई.

    विभिन्न देशों को मामले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी भी दी गई
    उन्होंने बताया कि राजदूतों को फैसले से संबंधित तथ्य और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background) की जानकारी दी गई.

    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए अयोध्या (Ayodhya) के विवादित स्थान पर न्यास के जरिये राम मंदिर बनाने का समर्थन किया और हिंदुओं के पवित्र शहर में ही मस्जिद बनाने के लिए वैकल्पिक स्थान पर पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया.

    विभिन्न देशों के राजनयिकों को कराया गया अवगत
    सूत्रों ने बताया कि फैसले के बाद विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों (Ministry Of Foreign Affairs) ने विभिन्न देशों और सहयोगी देशों के राजनयिकों को इससे अवगत कराया.

    उन्होंने बताया कि विदेश सचिव विजय गोखले (Vijay Gokhle) ने रणनीतिक रूप से अहम कुछ देशों और भारत के करीबी सहयोगी देशों के राजदूतों को एक-एक कर फैसले की जानकारी दी.

    अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भी किया गया था ऐसा
    डीन ऑफ डिप्लोमेटिक कोर और डोमिनिकन गणराज्य के राजदूत डैन्ननेबर्ग कास्टेलानोस ने कहा, ‘‘हालांकि यह भारत का आतंरिक मामला है. हम विदेश मंत्रालय (Ministry Of Foreign Affairs) की ओर से सभी राजनयिकों को एक-एक कर संवाद करने और फैसले को विस्तार से समझाने और इसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी देने के कदम की प्रशंसा करते हैं.’’

    उल्लेखनीय है कि अगस्त में भी जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 (Article 370) के अधिकतर प्रावधानों को हटाने के फैसले के बाद भी भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी और अन्य देशों को इस फैसले की जानकारी दी थी.

    यह भी पढ़ें: Ayodhya Verdict: कौन हैं वो 5 जज जिन्होंने सुनाया ऐतिहासिक फैसला?

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