आखिर जम्मू-कश्मीर के इस स्कूल में क्यों चिल्लाते हुए जमीन पर घिसट रहे हैं पचासों स्कूली बच्चे?

इस इलाके में बहुत सी ऐसी अफवाहें भी चल रही हैं कि गांव में कोई तांत्रिक किताब पाई गई है. जिसे प्रभावित बच्चों ने पढ़ लिया है.

News18Hindi
Updated: June 21, 2019, 11:03 PM IST
आखिर जम्मू-कश्मीर के इस स्कूल में क्यों चिल्लाते हुए जमीन पर घिसट रहे हैं पचासों स्कूली बच्चे?
जम्मू-कश्मीर के एक स्कूल से कई बच्चों के रोने, चिल्लाने और जमीन पर घिसटने का वीडियो सामने आया है (सांकेतिक तस्वीर)
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Updated: June 21, 2019, 11:03 PM IST
जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के दूर-दराज इलाके में स्थित एक स्कूल के छात्रों के अजीबोगरीब व्यवहार का वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें कुछ बच्चों के बिना किसी बात के रोने का वीडियो है तो कुछ बच्चे जमीन पर लेट रहे हैं. इस घटना के बाद से टीचर और परिजन दोनों ही परेशान हैं.

बनी तहसील के सिट्टी गांव के गवर्नमेंट हाई स्कूल के हेडमास्टर केवल कृष्णन ने इसके बारे में बताया कि यह सब कुछ एक महीने पहले शुरू हुआ था. उस समय कक्षा 1 के दो छात्रों ने कहा था कि उन्हें चक्कर आ रहे हैं. कुछ ही देर बाद उन्होंने रोना और चिल्लाना शुरू कर दिया था.

कक्षा 1 के बाद खराब हुई कक्षा 9 की तीन लड़कियों की हालत
हेडमास्टर ने बताया कि इसके बाद वे उन्हें तुरंत क्लास से बाहर ले गए और स्कूल के ऑफिस में ले आए. लेकिन उनकी तबीयत में कोई सुधार आने की बजाए, उन बच्चों ने जमीन पर लेटकर घिसटना शुरू कर दिया. हेडमास्टर ने बताया कि इसके कुछ दिन बाद उन्होंने ऐसा ही व्यवहार कक्षा 9 की तीन छात्राओं में भी पाया.

इसके बाद हम सतर्क हो गए. हमने उनके परिजनों को बुलाया. इन तीन लड़कियों में से 2 के माता-पिता ने बताया कि उन बच्चियों को ऐसा ही दौरा एकाध बार घर पर भी पड़ा है लेकिन तीसरी बच्ची के माता-पिता दौरे के दौरान उसका व्यवहार देखकर अचंभित रह गए.

13 जून के बाद तेजी से खराब हुई परिस्थितियां, बीमार स्टूडेंट्स में लड़कियां ज्यादा
हेडमास्टर ने बताया कि 13 जून को तब चीजें हाथ से निकलने लगीं जब 20 से 25 छात्रों, जिनमें 9वीं और 20वीं कक्षा के लड़के और लड़कियां दोनों ही शामिल थे, ऐसा ही व्यवहार करने लगे. 14 जून को कई सारे छात्रों ने सिरदर्द की शिकायत की, कुछ रोने लगे, कुछ चिल्लाने लगे और कुछ इन सबके बाद जमीन पर लेटने लगे. ऐसे स्टूडेंट्स की संख्या करीब 50 थी. इन छात्रों में ज्यादातर लड़कियां हैं.
दवाइयों से नहीं हुआ बच्चों को कोई फायदा
हेडमास्टर ने बताया कि इसके बाद उन्होंने इस घटना की शिकायत सीनियर अधिकारियों से की. जिसके बाद स्थानीय SDM, बानी के डॉक्टरों की एक टीम के साथ बच्चों को देखने के लिए पहुंचे. इन डॉक्टरों ने प्रभावित बच्चों को कुछ दवाईयां दीं लेकिन इससे ज्यादा फायदा नहीं हुआ क्योंकि फिर से बच्चों में ऐसे ही लक्षण देखे गए.

वॉट्सऐप ग्रुप में वायरल होने लगा वीडियो
उसी समय बच्चों के अजीब व्यवहार का यह वीडियो स्थानीय वॉट्सऐप ग्रुपों पर शेयर होने लगा. हेडमास्टर ने बताया कि चीफ मेडिकल ऑफिसर ने इसके बाद एक डॉक्टरों की टीम को बच्चों के व्यवहार का अध्ययन करने के लिए भेजा लेकिन वे इसके पीछे कोई स्वास्थ्य संबंधी कारण नहीं खोज सके.

बहाना भी हो सकता है कई बच्चों का व्यवहार
हेडमास्टर ने बताया कि बच्चों को देखने के लिए जो प्रशासनिक अधिकारी आए थे, उनमें से एक डॉक्टर थे. वे बी प्रभावित बच्चों से मिले. उन्होंने हमें बताया कि बच्चों का एक-दूसरे के व्यवहार की नकल करना कोई अजीब बात नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि हो सकता है जिन बच्चों के अंदर ऐसी परेशानियां पाई जा रही हैं, वे पढ़ाई में अच्छा न कर रहे हों और उन्होंने जानबूझकर या मन के अंदर ही ऐसे दौरों के लक्षण पैदा कर लिए हों. उन्होंने कहा कि कई छात्रों का खुद को स्कूल से बाहर निकाल लेने के लिए एक बहाना भी हो सकता है.

कई सारी अफवाहें भी लगा रही हैं चक्कर
हेडमास्टर ने बताया कि बहुत सी ऐसी अफवाहें भी चल रही हैं कि गांव में कोई तांत्रिक किताब पाई गई है. जिसे प्रभावित बच्चों ने पढ़ लिया है.

उन्होंने कहा, जब तक हम पर्याप्त मेडिकल सबूत नहीं जुटा लेते और अपने छात्रों के इस अजीब व्यवहार का इलाज नहीं खोज लेते, अफवाह फैलाने वालों के लिए ऐसे दूर-दराज के देहाती इलाके में अफवाह फैलाना बहुत आसान है.

उन्होंने इस बात से इंकार किया कि अभी तक कोई भी मनोचिकित्सक गांव में आया है जिसने स्टूडेंट्स के इस व्यवहार को कई लोगों को एक साथ पड़ने वाली मिरगी बताया हो.

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