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गुजरात दंगों पर नानावती आयोग की रिपोर्ट पेश, तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रियों को क्लीन चिट

News18Hindi
Updated: December 11, 2019, 1:34 PM IST
गुजरात दंगों पर नानावती आयोग की रिपोर्ट पेश, तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रियों को क्लीन चिट
साल 2002 में गुजरात के सीएम रहे नरेंद्र मोदी पर सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप था.

नानावटी आयोग (Nanavati Mehta Commission) की रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) समेत कई अन्य नेताओं को क्लीन चिट दी गई है.

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  • Last Updated: December 11, 2019, 1:34 PM IST
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अहमदाबाद.नानावती आयोग (Nanavati aayog) ने गुजरात (Gujarat 2002 riots) में 2002 के दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व वाली सरकार को क्लीन चिट दे दी है. इन दंगों में 1000 से अधिक लोग मारे गए थे जिनमें से अधिकतर अल्पसंख्यक समुदाय के थे.

राज्य के गृह मंत्री प्रदीपसिंह जडेजा ने सदन में आयोग की रिपोर्ट पेश की. इस रिपोर्ट को तत्कालीन सरकार को सौंपे जाने के पांच साल बाद सदन में पेश किया गया है. आयोग ने 1,500 से अधिक पृष्ठों की अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि राज्य के किसी मंत्री ने इन हमलों के लिए उकसाया या भड़काया.’

इसमें कहा गया है कि कुछ जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस अप्रभावी रही क्योंकि उनके पास पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी नहीं थे या वे हथियारों से अच्छी तरह लैस नहीं थे. आयोग ने अहमदाबाद शहर में साम्प्रदायिक दंगों की कुछ घटनाओं पर कहा, ‘पुलिस ने दंगों को नियंत्रित करने में सामर्थ्य, तत्परता नहीं दिखाई जो आवश्यक था.’

नानावती आयोग ने दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच या कार्रवाई करने की सिफारिश की है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) जी टी नानावती और गुजरात हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) अक्षय मेहता ने 2002 दंगों पर अपनी अंतिम रिपोर्ट 2014 में राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को सौंपी थी.

साल 2002 में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने दंगों की जांच के लिए आयोग गठित किया था. यह दंगे गोधरा रेलवे स्टेशन के समीप साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन की दो बोगियों में आग लगाए जाने के बाद भड़के थे जिसमें 59 ‘कारसेवक’ मारे गए थे.

'योजनाबद्ध नहीं थे दंगे'
रिपोर्ट में कहा गया है कि नरेंद्र मोदी और किसी भी नेता की गोधराकांड में कोई भूमिका नहीं है. कहा गया कि सरकार ने उस दिन किसी बंद का ऐलान नहीं किया था. नानावती आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि गोधराकांड में कोई अधिकारी या पुलिस की भागीदारी नहीं थी.2002 के गोधरा दंगों के बाद गुजरात में दंगे योजनाबद्ध नहीं थे. मोदी के अलावा शोक भट्ट, भरत बारोट और हरेन पंड्या को भी क्लीन चिट मिला है. मोदी पर सबूतों को नष्ट करने के लिए जो आरोप लगाए गये थे, वे झूठे साबित हुए हैं. साथ ही तीन अधिकारियों आरबी श्री कुमार, संजीव भट्ट और राहुल शर्मा की नकारात्मक भूमिका साबित हुई है.

एजेंसी इनपुट के साथ

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First published: December 11, 2019, 12:12 PM IST
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