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Opinion : स्वच्छ भारत अभियान को और आगे बढ़ाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी का क्या है संदेश

मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संकल्प का जिक्र किया
मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संकल्प का जिक्र किया

सरकारी आंकड़े स्वच्छ भारत अभियान की चमकदार तसवीर पेश कर रहे हैं, लेकिन अभी लोगों की सोच में स्थायी बदलवा आना जरूरी है

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 8, 2019, 4:13 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ताजा-तरीन मन की बात में स्वच्छता अभियान के लिए एक नई उपमा जोड़ी. उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान अब स्वच्छता से सुंदरता की ओर बढ़ रहा है. इस सिलसिले में प्रधानमंत्री ने अमेरिका से अपनी नौकरी छोड़ कर "मां भारती की सेवा" के लिए भारत लौटे इंजीनियर योगेश सैनी का जिक्र किया, जिन्होंने दिल्ली को स्वच्छ ही नहीं सुंदर बनाने का बीडा उठाया. मोदी ने कहा कि सैनी ने दिल्ली के अपनी टीम के साथ मिलकर लोधी गार्डन के कूड़ेदान से शुरुआत की और स्ट्रीट आर्ट के जरिए दिल्ली के ओवर ब्रिजों, स्कूलों की दीवारों, यहां तक कि झुग्गी झोपड़ियों पर अपने हुनर को उकेरना शुरू किया. मोदी ने श्रोताओं को याद दिलाया कि प्रयागराज में कुंभ से पहले भी नगर की दीवारों, पुलों और सड़कों पर स्ट्रीट आर्ट के जरिए नगर को सुंदर बनाया गया था और उसमें भी सैनी और उनकी टीम ने हिस्सेदारी की थी.

फिर मोदी ने तस्वीरों के असर की काव्यात्मक चर्चा की, "रंग रेखाओं में आवाज भले नहीं होती हो लेकिन उन से बनी तस्वीरों से जो इंद्रधनुष बनते हैं उनका संदेश हजारों शब्दों से ज्यादा प्रभावकारी सिद्ध होता है." यह वर्णन "एक अच्छा फोटो हजार शब्दों से ज्यादा प्रभावी होता है" वाले पत्रकारिता के सिद्धांत की ही समयोचित व्याख्या थी.

दिल्ली को सुंदर बनाने का अभियान, Making Delhi beautiful
कूड़ा घरों को सजा कर दिल्ली को सुंदर बनाने का अभियान




स्वच्छता अभियान में भागीदारी से बनी बात
इसमें कोई शक नहीं की 2014 में गांधी जयंती के दिन प्रधानमंत्री मोदी के शुरू किए स्वच्छता अभियान से सबसे बडा बदलाव तो यही आया कि देश भर के लोगों ने साफ-सफाई की तरफ नयी दृष्टि से देखना शुरू किया. 2014 में प्रधानमंत्री बनने के मोदी ने लाल किले से स्वच्छता अभियान छेडने का जिक्र करते हुए माना था कि वे एक कठिन काम अपने हाथ में ले रहे हैं. लेकिन स्वच्छता को मुश्किल चुनौती मानते हुए भी मोदी " (तब) 125 करोड़ देशवासियों" की इस अभियान में भागीदारी का भरोसा जता रहे थे.

पिछले पांच साल में शहरों-गांवों मे स्वच्छता, कूडा इकट्ठा करने, खुले में शौच से मुक्ति (ओडीएफ) के लिए टॉयलेट निर्माण, कूड़े के निस्तारण, रीसाइक्लिंग जैसे मोर्चों पर शानदार प्रगति हुई है. 9.87 करोड़ ग्रामीण घरों में शौचालय बनना, देश के 30 राज्यों के 624 जिलों, 4170 शहरों-कस्बों का ओडीएफ होना, शहरों में 6 लाख के करीब निजी और 5 लाख सार्वजनिक शौचालय निर्माण,देश कर सभी स्कूलों में लड़कियों के अलग टॉयलेट, देश भर के 76459 वार्डों में घर-घर से कचरा उठाने की व्यवस्था, कूड़े से 88 मेगावॉट बिजली उत्पादन और 4,38,7000 मीट्रिक टन कंपोस्ट खाद बनाने की उपलब्धियों के सरकारी आंकड़े एक चमकदार तस्वीर पेश करते हैं.

दिल्ली को सुंदर बनाने का अभियान, Making Delhi beautiful
वॉल पेंटिंग से सजावट


एशिया में सबसे पहले बनाए कानून
ये भी कोई कम बड़ी बात नहीं कि एशिया में भारत पहला देश है जिसने, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने, मेडिकल तथा ई-कचरे को ठिकाने लगाने और इसके फैलाव के दोषियों को दंडित करने के लिए सख्त कानून बनाए हैं. आखिर भारत सबसे ज्यादा ई-कचरा पैदा करने में दुनिया का पांचवें नंबर का देश है. 18 से ज्यादा राज्य प्लास्टिक थैलियों,थर्मोकोल कटलरी के उपयोग पर कानूनी पाबंदी लगा चुके हैं. विभिन्न राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण पर्यावरण को नुक्सान पहुंचाने वाले व्यक्तियों, समूहों, कंपनियों और सरकारो को भी दंडित करने में गुरेज नहीं कर रहे हैं.

अब नया लक्ष्य
देश भर के शहरों-गांवों को इस साल महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्तूबर तक स्वच्छता के सभी मानदंडों पर उत्तीर्ण होना है, प्रधानमंत्री ने लक्ष्य यही रखा है, लेकिन जैसा कि प्रधानमंत्री ने ताजा 'मन की बात' में स्वीकार किया कि स्वैच्छिक अभियान को "130 करोड देशवासियों" के सहयोग से गति तो मिली है लेकिन "आदर्श स्थिति अभी नहीं आई है." अब मोदी ने इसमें एक नया लक्ष्य जोड दिया है "स्वच्छता से सुंदरता" का !

इस अभियान में उल्लेखनीय उपलब्धियों के बावज़ूद शहरों-गांवों में साफ-सफाई, कचरे के उठान, शौचालय निर्माण की गुणवत्ता, जल-मल, ठोस कचरे, प्लास्टिक, ई-वेस्ट के निस्तारण, रीसाइक्लिंग जैसे कई मोर्चों में क्रियान्वयन के स्तर पर जैसी गति है, उसके मद्देनजर अंदेशा यह भी है कि स्थानीय इकाइयों, राज्य सरकारों का अमला कहीं गंदगी को सुंदर चित्रों से न ढकने के आसान उपाय को ही न अपना ले! फिर प्रधानमंत्री के बार-बार इस विषय पर जागरूकता फैलाने के उपायों, स्वच्छता अभियान के विभिन्न कार्यक्रमों पर प्रधानमंत्री कार्यालय की निगरानी तक के बावजूद स्थानीय स्तर पर डिलिवरी मैकेनिज्म की लापरवाही और कामचोरी की मिसालें सामने आती रहती हैं.

प्रयागराज कुंभ में की गई वॉल पेंटिंग, wall painting in prayagraj
प्रयागराज कुंभ में की गई वॉल पेंटिंग


अभी भी कुछ लोगों में सुधार आना है
आम लोगों की मनोवृत्ति में व्यापक, आमूल ओर स्थायी बदलाव का भी बडा सवाल है. कयी राज्यों में घर में टॉयलेट बन जाने के बाद भी दिशा-मैदान का रुख़ करने वालों, सार्वजनिक जगहों पर कूडा फेंकने, उसे न उठाने वाली स्थानीय शासन एजेंसियों, जीवन के लिए नुक्सानदेह औद्योगिक वेस्ट नदियों, पहाडों, जंगलों में फेंकने वाले उद्योगों से निबटना सरकारों के लिए जिद्दी विपक्ष से निबटने से ज्यादा मुश्किल है.
इसलिए प्रधानमंत्री बार्-बार जनता से भागीदारी का आह्वान करते हैं. उनकी अपीलों का असर देश की बडी आबादी ओर साफ दिखता भी है. मोदी ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो स्वच्छता अभियान, बेटी बचाओ, बेटी पढाओ जैसे सामाजिक आंदोलनों को भी राजनैतिक संघर्ष की-सी जिद से चला रहे हैं. स्वच्छता को सुंदरता से जोडने का उनका उपक्रम इसी का अगला चरण है.

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