Bihar Assembly Elections 2020: बिहार में फिर क्यों विफल हो सकते हैं ओवैसी? जानें पूरी कहानी

सीमांचल की 19 सीटों पर मुस्लिम मतदाता जीत-हार में अहम भूमिका निभाते हैं.
सीमांचल की 19 सीटों पर मुस्लिम मतदाता जीत-हार में अहम भूमिका निभाते हैं.

बिहार इलेक्शन में (Bihar Polls 2020) राज्य की कुल 243 विधानसभा सीटों (Bihar Assembly Seats) में से 20 पर AIMIM ने अपने कैंडिडेट खड़े किए हैं. पार्टी को उम्मीद है कि उसे कम से कम 10 सीटों पर फतह हासिल होगी.

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  • Last Updated: November 8, 2020, 9:36 PM IST
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नई दिल्ली/पटना. 2019 के लोकसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन और अक्टूबर 2019 में एक विधानसभा सीट जीतने के बावजूद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) को बिहार में इस बार के विधानसभा चुनाव में कोई खास सफलता मिलती नहीं दिख रही है. ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के इस बार फिर सिफर (शून्य) पर सिमटने के अनुमान हैं. 2015 के बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Elections 2020) में एक अनुपस्थित ने भले ही सीमांचल क्षेत्र में चुनाव लड़ने का फैसला किया, जिसकी मुस्लिम आबादी काफी है. पार्टी छह सीटों पर लड़ी और पांच में हार का सामना करना पड़ा. पार्टी के लिए एकमात्र अच्छी बात यह थी कि कोचाधामन निर्वाचन क्षेत्र में उपचुनाव हुआ था जिसमें उसके उम्मीदवार को 26.14% वोट मिले थे. हालांकि, 2019 के चुनावों ने एआईएमआईएम के प्रदर्शन ने सभी को हैरत में डाल दिया.

सबसे पहले मुस्लिम बहुल किशनगंज निर्वाचन क्षेत्र में लड़ी और लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया. हालांकि पार्टी सीट नहीं जीत सकी, लेकिन इसने लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया. इस सीट पर कांग्रेस को 33.32% वोट मिले थे. जबकि जेडीयू के खाते में 30.19% वोट गए वहीं, एआईएमआईएम 26.78% वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रही.

उपचुनाव में जीता किशनगंज विधानसभा क्षेत्र
AIMIM ने बहादुरगंज और कोचाधामन विधानसभा क्षेत्रों में भी दांव खेला और विधानसभा क्षेत्र में दूसरे स्थान पर रही. किशनगंज, ठाकुरगंज और बैसी जैसे क्षेत्रों में पार्टी तीसरे स्थान पर कब्जा करने में कामयाब रही. लेकिन 2019 में हुए उपचुनाव में पार्टी ने किशनगंज विधानसभा क्षेत्र में जीत हासिल कीं और कमरुल होदा विधायक बनें.
इन चुनावों में नहीं बना पाई जगह


लेकिन 2020 के विधानसभा चुनावों में ओवैसी के सीएए-एनआरसी बनाने के बावजूद उसे चुनावी पिच के रूप में दोहराया नहीं जा सकता है और एआईएमआईएम फिर से 2015 के चुनावों के समान आंकड़ों पर लौट सकती है. इन चुनावों में पार्टी आरएलएसपी और बीएसपी गठबंधन के साथ मैदान में उतरी है. हालांकि गठबंधन के कारण पार्टी सिर्फ 20 सीटों पर ही उम्मीदवार उतार पाई.

मुस्लिम वोटों का बिखराव तय
बिहार इलेक्शन में (Bihar Polls 2020) राज्य की कुल 243 विधानसभा सीटों (Bihar Assembly Seats) में से 20 पर AIMIM ने अपने कैंडिडेट खड़े किए हैं. पार्टी को उम्मीद है कि उसे कम से कम 10 सीटों पर फतह हासिल होगी. सीमांचल की 19 सीटों पर मुस्लिम मतदाता जीत-हार में अहम भूमिका निभाते हैं. कोसी के 18 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है. ऐसे में ओवैसी के आक्रामक चुनाव प्रचार से महागठबंधन खेमे में हलचल लाजिमी है. विशेषज्ञों का मानना है कि ओवैसी के कारण मुस्लिम वोटों का बिखराव तय है और इसका नुकसान महागठबंधन को हो सकता है.
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