पत्नी को अस्पताल में अकेला न छोड़ना पड़े इसलिए बजुर्ग ने घर को ही बना दिया ICU

मध्यप्रदेश के जबलपुर के रिटायर्ड इंजीनियर ने घर को ही बना दिया अस्पताल. फोटो सौजन्य @Jabalpursafety
मध्यप्रदेश के जबलपुर के रिटायर्ड इंजीनियर ने घर को ही बना दिया अस्पताल. फोटो सौजन्य @Jabalpursafety

ज्ञान प्रकाश ने अपने घर में ऑक्सीजन पाइपलाइन की फिटिंग करवाई है. इसके साथ ही जिस कमरे में उनकी पत्नी रहती हैं उसमें नेबुलाइजर, एयर प्यू​रीफायर, सक्शन मशीन और वेंटिलेटर लगाया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 11, 2020, 8:17 AM IST
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नई दिल्ली. कहते हैं न एक जीवनसाथी ही आखिरी सांस तक साथ देता है. चाहे कितनी भी परेशानी क्यों न आए, या फिर उम्र और सेहत भले ही साथ क्यों न दे रही हों लेकिन अगर आपके साथ आपका पाटर्नर है तो हर मुश्किल चुनौती को भी आसान बनाया जा सकता है. ऐसी ही एक जोड़ी मध्यप्रदेश के जबलपुर में रह रही है. रिटायर्ड इंजीनियर ज्ञान प्रकाश अपनी बीमार पत्नी को अस्पताल में अकेले नहीं छोड़ना चाहते थे इसलिए उन्होंने घर को ही आईसीयू में तब्दील कर दिया. अब वह दिनभर साथ में रहते हैं और एक दूसरे का हाल जानते हैं.

रिटायर्ड इंजीनियर ज्ञान प्रकाश ने कोई डॉक्टरी की पढ़ाई या कोर्स नहीं किया है लेकिन वह अपनी पत्नी का ख्याल अस्पताल के स्टाफ की तरह ही रखते हैं. अपनी पत्नी की बेहतर सेहत के लिए उन्होंने ऑक्सीजन सिलेंडर से लेकर वेंटीलेटर तक की व्यवस्था घर पर की हुई है. ज्ञान प्रकाश ने बताया कि उनकी पत्नी कुमुदनी श्रीवास्तव को अस्थमा है. पिछले 4 सालों में वह घर पर कम और अस्पताल में ज्यादा रही हैं. पिभ्ले साल जब वह अपनी पत्नी को अस्पताल से लेकर घर पहुंचे तो उन्होंने उन्होंने सोच लिया कि वह अब दोबारा अस्पताल नहीं जाएंगे. इसके बाद उन्होंने घर को ही अस्पताल में तब्दील कर दिया.


ज्ञान प्रकाश ने अपने घर में ऑक्सीजन पाइपलाइन की फिटिंग करवाई है. इसके साथ ही जिस कमरे में उनकी पत्नी रहती हैं उसमें नेबुलाइजर, एयर प्यू​रीफायर, सक्शन मशीन और वेंटिलेटर लगाया गया है. उन्होंने बताया कि अस्पताल के आईसीयू वार्ड की तरह ही उन्होंने एक कमरे को तैयार किया है.



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कार को भी एंबुलेंस जैसी है व्यवस्था
ज्ञान प्रकाश ने अपनी कार को भी एंबुलेंस जैसा बना दिया है. उन्होंने अपनी कार में ऑक्सीजन की फिटिंग करवाई है. पत्नी को जब कभी भी इमरजेंसी में अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ती है तो वह अपनी ही कार में उन्हें ले जाते हैं. ज्ञान प्रकाश हर हफ्ते 2 ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाते हैं. वो कहते हैं कि इस काम में उनकी इंजीनियरिंग ने उनका बहुत साथ दिया. वो लगातार पल्स ऑक्सीमीटर और ऑक्सीजन मीटर मॉनीटर करते हैं और उसी हिसाब से ऑक्सीजन की सप्लाई करते हैं.
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