OPINION: विरोधी विचारधारा वाली पार्टियों के गठबंधन के पीछे है खास रणनीति!

1996 में तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था क्योंकि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी.

News18.com
Updated: February 14, 2019, 11:53 AM IST
OPINION: विरोधी विचारधारा वाली पार्टियों के गठबंधन के पीछे है खास रणनीति!
दिल्ली में 'तानाशाही हटाओ देश बचाओ' रैली में ममता बनर्जी, चंद्रबाबू नायडू, शरद पवार और फारुख अब्दुल्ला
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Updated: February 14, 2019, 11:53 AM IST
सुमित पांडे

जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव पास आ रहा है वैसे-वैसे एनडीए और विपक्षी पार्टियों ने दूसरी पार्टियों के साथ औपचारिक रूप से गठबंधन करना शुरू कर दिया है ताकि अगर उन्हें पूर्ण बहुमत न मिले तो वे सबसे बड़े गठबंधन पार्टी के रूप में उभर कर आएं.

यहां तक कि दो विपरीत विचारधारा वाली पार्टियां भी एक-दूसरे के साथ गठबंधन करने को तैयार हैं. दिल्ली में आम आदमी पार्टी की रैली में ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र के स्तर पर लेफ्ट व कांग्रेस के साथ बातचीत जारी रखनी चाहिए. इससे सिद्ध होता है कि खेल जितना दिख रहा है उससे काफी बड़ा है. बंगाल में टीएमसी विरोधी लेफ्ट और कांग्रेस का गठबंधन भी ममता बनर्जी के फायदे में हो सकता है, क्योंकि ममता कभी नहीं चाहेंगी कि सरकार विरोधी भावना का सारा वोट बीजेपी को जाए.



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इसी तरह अपने पिछले सहयोगियों को फिर से मिलाकर चलने की बीजेपी की जो कोशिश है उसके पीछे भी यही मंशा लगती है. क्योंकि, संविधान राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि वह किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित सकता है जिसके बारे में उसे लगता हो कि सबसे बड़ी पार्टी है. इसीलिए बीजेपी भी शिवसेना और एआईएडीएमके से लगातार बातचीत कर रही है.

1996 में तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था क्योंकि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी. हालांकि बहुमत सिद्ध न कर पाने के कारण उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा था.

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हाल ही में गोवा व मणिपुर में राज्यपाल ने कांग्रेस के बजाय बीजेपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया. दोनों ही मामलों में बीजेपी ने सबसे ज्यादा विधायकों का समर्थन होने का दावा किया था.

कर्नाटक की बात करें तो राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी होने के आधार पर बीजेपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रण दिया जबकि कांग्रेस और जेडीएस ने बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए हाथ मिला लिया था.
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