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पुनर्विकास योजना में संसद भवन, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक में नहीं होगा कोई बदलाव: केंद्रीय मंत्री

भाषा
Updated: October 25, 2019, 10:53 PM IST
पुनर्विकास योजना में संसद भवन, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक में नहीं होगा कोई बदलाव: केंद्रीय मंत्री
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में संसद भवन से इंडिया गेट के बीच बनने वाली इमारतों के बारे में बताया

हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने बताया कि 1921 में संसद भवन (Parliament House) का निर्माण शुरु हुआ था, इसलिये इस इमारत के 100 साल पूरे होने जा रहे हैं. जगह की कमी और अन्य जररूतों के मद्देनजर नयी इमारत की जरूरत महसूस की जा रही है.

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नई दिल्ली. आवास एवं शहरी विकास मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने संसद भवन (Parliament) और आस-पास की अन्य ऐतिहासिक इमारतों के पुनर्विकास की योजना के मद्देनजर इन इमारतों के भविष्य को लेकर संशय दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति भवन, संसद भवन और नॉर्थ ब्लॉक (North Block) एवं साउथ ब्लॉक (South Block) के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जायेगा.

पुरी ने शुक्रवार को संसद भवन पुनर्विकास योजना के तहत बनने वाली इमारतों के डिजाइन (Design) बनाने सहित अन्य कामों की जिम्मेदारी गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती रिवर फ्रंट (Sabarmati River Front) बनाने वाली कंपनी एचसीपी डिजाइन को सौंपने की जानकारी देते हुये बताया, ‘‘संसद भवन और नॉर्थ ब्लॉक एवं साउथ ब्लॉक अपने मूल स्वरूप में बरकरार रहेंगे. इनके इस्तेमाल में बदलाव हो सकता है.’’

किसी भी इमारत को तोड़ने का नहीं है विचार
पुरी ने कहा कि इस परियोजना के डिजाइन को लेकर जितने भी आइडिया अभी तक सामने आये हैं, उनमें से किसी में भी इन इमारतों को तोड़ने का विचार नहीं मिला है.

पुरी ने कहा कि इन इमारतों के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुये इनके इस्तेमाल में बदलाव कर इन्हें संग्रहालय (The Museum) बनाने सहित कोई अन्य विकल्प भी हो सकते हैं.

पुरी ने बताया कि 1921 में संसद भवन (Parliament House) का निर्माण शुरु हुआ था, इसलिये इस इमारत के 100 साल पूरे होने जा रहे हैं. जगह की कमी और अन्य जररूतों के मद्देनजर नयी इमारत की जरूरत महसूस की जा रही है.

राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट के बीच तीन किमी का होगा पुनर्विकास
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पुरी ने कहा कि संसद भवन, केन्द्रीय सचिवालय और राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट (India Gate) के बीच तीन किमी के इलाके (सेंट्रल विस्टा) के पुनर्विकास की योजना को आगे बढ़ाते हुये मंत्रालय ने इसके डिजाइन की अंतरराष्ट्रीय निविदा आमंत्रित की थी. इसमें देश दुनिया से लगभग 50 प्रस्ताव मिले. इनमें से HCP सहित छह कंसल्टेंट कंपनियों के प्रस्तावित डिजाइन को चुना गया.

उन्होंने बताया कि कंपनी (Company) की तकनीकी क्षमता, आर्थिक सक्षमता और गुणवत्ता दक्षता के मानक को पूरा करने वाली एचसीपी डिजाइन को परामर्शदाता के तौर पर चुना गया है.

पुरी ने कहा कि भवन एवं शहरी विकास योजना के विशेषज्ञों की मौजूदगी वाले केन्द्रीय संस्थान दिल्ली शहरी कला आयोग (DUAC) के अध्यक्ष पी एस एन राव की अगुवाई में विशेषज्ञों का एक दल समग्र परियोजना की निगरानी करेगा.

अगले 250 साल की जरूरतों को ध्यान रखते हुए बनाया जाएया डिजाइन
आवास एवं शहरी विकास सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने बताया कि जनता सहित सभी पक्षकारों के साथ व्यापक परामर्श के बाद अगले साल मई से पहले डिजाइन (Design) को अंतिम रूप देकर निर्माण कार्य शुरु करने की निविदा जारी कर दी जायेगी. उन्होंने बताया कि परियोजना का डिजाइन अगले 250 साल की जरूरतों को ध्यान में रखते हुये तैयार किया जायेगा.

उन्होंने बताया कि तीन चरणों में पूरी होने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण में नवंबर 2021 तक सेंट्रल विस्टा (Central Vista) को बनाने, अगस्त 2022 में आजादी की 75वीं वर्षगांठ से पहले संसद भवन के पुनर्विकास और 2024 तक सभी मंत्रालयों को एक ही स्थान पर समेकित कर समग्र केन्द्रीय सचिवालय बनाने का काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है.

डिजाइन से लेकर निर्माण तक मेक इन इंडिया पर आधारित
इस परियोजना की निगरानी कर रही केन्द्रीय भवन निर्माण एजेंसी, केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के महानिदेशक प्रभाकर सिंह ने बताया कि परियोजना डिजाइन से लेकर निर्माण तक, पूरी तरह से मेक इन इंडिया की अवधारणा पर आधारित है.

उन्होंने बताया कि भवन डिजाइनिंग के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी एचसीपी डिजाइन (HCP Design) ने साबरमती रिवर फ्रंट (Sabarmati River Front) के अलावा गांधीनगर में केन्द्रीय सचिवालय के सेंट्रल विस्टा और मुंबई पोर्ट ट्रस्ट का भी डिजाइन तैयार किया था.

यह भी पढ़ें: संसद भवन को फिर से बनाने का डिजाइन हुआ पास, आएगा इतने रुपये का खर्च

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First published: October 25, 2019, 9:34 PM IST
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