देश में कोरोना के दूसरी लहर का पीक आ चुका है लेकिन अंत अभी दूर है

देश में कोरोना के दूसरी लहर का पीक आ चुका है. (File pic)

पिछले गुरुवार को रोज़ मिलने वाले संक्रमितों की संख्या 4.14 लाख तक पहुंच गई थी, लेकिन उसके बाद से अब तक कोरोना के आंकड़ों में लगातार गिरावट देखी जा रही है. इससे पहले 30 अप्रैल को भी संक्रमितों की संख्या 4 लाख पहुंच जाने के बाद कुछ दिनों के लिए मामलों में कमी देखने को मिली थी.

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    नई दिल्‍ली. बीते दो हफ्तों से भारत (India) में कोरोना वायरस (Coronavirus) से पीड़ित होने वाले मरीजों की संख्या में लगातार कमी होती देखकर ऐसा लग रहा है कि कोरोना के दूसरी लहर (Second Wave) की पीक भारत में आ चुकी है. भले ही कोरोना मरीजों की संख्‍या कम जरूर हुई है लेकिन दूसरी लहर के खत्म होने के संकेत अभी नज़र नहीं आ रहे हैं.

    पिछले गुरुवार को रोज़ मिलने वाले संक्रमितों की संख्या 4.14 लाख तक पहुंच गई थी, लेकिन उसके बाद से अब तक कोरोना के आंकड़ों में लगातार गिरावट देखी जा रही है. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, इससे पहले 30 अप्रैल को भी संक्रमितों की संख्या 4 लाख पहुंच जाने के बाद कुछ दिनों के लिए मामलों में कमी देखने को मिली थी. हालां‍कि पिछले सात दिनों का जो औसत है उसमें कमी होना शुरू हो गई है. मसलन 8 मई को सात दिन का औसत 3.91 लाख था, वही बुधवार को घट कर 3.75 लाख पर पहुंच गया है.

    देश में सबसे ज्‍यादा प्रभावित महाराष्‍ट्र दिखाई पड़ रहा था. लेकिन महाराष्ट्र में हालात अब कुछ सुधरते दिखाई दे रहे हैं. तीन हफ्ते पहले तक राज्य ने एक दिन के सबसे ज्यादा 68,631 केस दर्ज किए थे. दो हफ्ते तक 50 और 60 हज़ार केस देखने के बाद अब इस राज्य के प्रतिदिन केस की गिनती 40 हज़ार में आ गई है. महाराष्ट्र में मामलों की कमी का असर अब पूरे देश के कोरोना ग्राफ पर दिखाई देने लगा है. हालांकि इस बीच कर्नाटक और केरल में केस बढ़ रहे हैं लेकिन लंबे वक्त से इस खतरे के बने रहने की आशंका काफी कम है.

    फिलहाल उत्तर प्रदेश से उम्मीद की किरण नज़र आई है, जहां एक वक्त महाराष्ट्र से ज्यादा मामले सामने आ रहे थे और रोज़ाना मिलने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़कर, 30 अप्रैल तक 35000 प्रतिदिन तक पहुंच गई थी. लेकिन बीते हफ्ते से मरीजों की संख्या ने लगातार गिरावट देखने को मिल रही है और अभी ये रोज़ाना के 30,000 से नीचे पहुंच गई है. इसी तरह दिल्ली में भी बीते हफ्ते आ रहे मामलों को देखकर लगता है कि यहां पर भी पीक आ गया है. एक वक्त यहां भी संक्रमितों की संख्या 20000 से ऊपर पहुंच गई थी लेकिन बीते हफ्ते ये संख्या घटकर 12 हजार पर आ गई है.

    हालांकि महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मामलों में कमी आना दूसरे राज्यों में बढ़ रहे मामलों की कमी पूरी नहीं कर पा रही है. क्योंकि एक तरफ जहां कुछ राज्यों में मामले कम हो रहे हैं वहीं , तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, और पश्चिम बंगाल में बढ़ते मामले चिंता बढ़ा रहे हैं. वर्तमान के हालातों को देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि जब सक्रिय मामलों की संख्या 40 लाख के आस-पास पहुंच जाएगी तो ऐसा मान लिया जाएगा कि पीक आ गया है. फिलहाल देश में सक्रिय मामलों की संख्या 37.1 लाख मामले हैं.

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    पॉजिटिविटी दर क्या कहती है
    दूसरी लहर में बढ़ते मामलों को देख कर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इस बार पॉजिटिविटी दर असमान्य है. पिछली बार की अपेक्षा इस बार जांच करने वालों में पॉजिटिव होने की संख्या ज्यादा आ रही है. जहां पहली लहर के दौरान पॉजिटिविटी दर 5 से 6 फीसदी के बीच थी, वहीं इस बार यह दर बढ़कर 20 फीसद तक पहुंच गई थी. कुछ राज्यों में तो पॉजिटिविटी दर 40 फीसदी तक पहुंच गई थी. पॉजिटिविटी दर को जनसंख्या में बीमारी की व्यापकता के आधार पर मापा जाता है. अगर ज्यादा लोग संक्रमित हुए हैं, तो जांच कराने पर ज्यादा लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव निकलेगी. उच्च पॉजिटिव दर वायरस के संक्रमण की तीव्रता को दर्शाता है. इसके पीछे दो वजह हैं या तो नए म्यूटेंट की संक्रमण दर तेज है या लोगों ने शारीरिक दूरी, मास्क लगाने जैसे नियमों का पालन ठीक से नहीं किया है. हालांकि इसके पीछे ये भी कहा जा रहा है कि चूंकि भारत में पॉजिटिव दर के थमने की वजह जांच में कमी आना भी है. दरअसल भारत में जिस तरह से मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही थी उस हिसाब से जांच की मांग पूरी नहीं हो पा रही थी. जहां अप्रैल महीने में संक्रमण के मामले पांच गुना बढ़े, वहीं जांच की गति 1.8 से ऊपर नहीं पहुंच सकी थी.

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    क्या कहता है मौतों का आंकड़ा
    बीते 45 दिनों में रोज़ाना होने वाली मौतों की संख्या दस गुना की रफ्तार से बढ़ी, वहीं सक्रिय मामलों की संख्या में पिछले दो हफ्तों में लगाम लगी है. इससे ये अनुमान लगाया जा रहा है कि हो सकता है कुछ दिनों तक मौतों का सिलसिला जारी रहे उसके बाद इसमें भी गिरावट देखने को मिले. फिलहाल भारत में रोजाना 4000 लोगों की औसतन मौत हो रही है.

    अंत के लिए रुकना होगा
    सक्रिय मामलों का थमना एक उम्मीद की किरण बंधाता है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि दूसरी लहर के खत्म होने का वक्त आ गया है. पहली लहर में 98 हज़ार के उच्चतम सक्रिय मामलों को 10 हज़ार तक पहुंचने में 5 महीने लग गए थे. उस लिहाज से अगर देखा जाए तो दूसरी लहर में इसमें और ज्यादा वक्त लग सकता है. हालांकि यहां एक फर्क और भी है दूसरी लहर में जितनी तेजी से मामले बढ़े गिरावट भी उतनी ही गति से देखने को मिली है.