रायबरेली: कांग्रेस की बागी MLA अदिति सिंह ने कहा- पार्टी अपने नेताओं को दे काम करने की आज़ादी

कांग्रेस विधायक अदिति सिंह

Aditi Singh of Rae Bareli: अदिति सिंह, प्रियंका गांधी वाड्रा की बेहद करीबी रही हैं, लेकिन उन्होंने News18 को बताया कि हाल के दिनों में उनकी प्रियंका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है.

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नई दिल्ली. रायबरेली (Raebareli) सदर से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह (Congress MLA Aditi Singh) लगातार सुर्खियों में रहती हैं. अदिति रायबरेली से पांच बार विधायक रह चुके अखिलेश कुमार सिंह की बेटी हैं. पिता की इसी परंपरागत सीट से उन्हें कांग्रेस की टिकट पर जीत मिली, लेकिन कांग्रेस को शक है कि वो बीजेपी के करीब हैं. लिहाजा उन्हें विधायक के रूप में अयोग्य ठहराने की कोशिश भी की गई थी. अदिति का कहना है कि कांग्रेस को अपने विधायकों को काम करने की आजादी देनी चाहिए.

न्यूज़ 18 ने अदिति से पूछा- आप फिलहाल किस पार्टी में हैं? आप अब भी कांग्रेस की विधायक हैं या 2022 के चुनाव से पहले बीजेपी या समाजवादी पार्टी में शामिल होंगी. रायबरेली की 33 साल की बाग़ी विधायक अदिति इस सवाल को सुनकर मुस्कुराने लगीं. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि आपने कुछ पार्टियों का नाम छोड़ दिया है. शायद, बसपा और आम आदमी पार्टी भी विकल्प हो सकता है. मैं निश्चित रूप से इस समय कांग्रेस की विधायक हूं.'

अदिति की नाराज़गी
अखिलेश कुमार सिंह का साल 2019 में देहांत हो गया. रायबरेली की इस सीट पर 1993 से 2017 तक उनका कब्जा रहा और इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में उनकी बेटी अदिति सिंह इस सीट से विधायक बनीं. फिलहाल उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के 7 विधायक हैं. इनमें से एक अदिति भी हैं. न्यूज़ 18 से लालपुर गांव में बातचीत करते हुए अदिति ने आगे कहा, 'मुझे लगता है कि कांग्रेस अपने नेताओं पर जल्दबाजी में एक्शन लेती है. पार्टी उन्हें सफाई देने का मौका नहीं देती. उन्हें काम करने की आजादी नहीं दी जाती है. नेताओं की अपनी पसंद-नापसंद रखने की छूट नहीं दी जाती है.'

प्रियंका से दूरियां
अदिति प्रियंका गांधी वाड्रा की बेहद करीबी रही हैं, लेकिन उन्होंने News18 को बताया कि हाल के दिनों में उनकी प्रियंका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है. अदिति ने कहा, 'उन्हें बार-बार यूपी आना चाहिए'. लखनऊ में कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सिंह को 2022 में कांग्रेस का टिकट नहीं मिलेगा. अदिति ने आगे कहा, 'टिकट मांगना मेरा विशेषाधिकार है.'

नाराज़गी आखिर क्यों?
अदिति सिंह उन युवा नेताओं की सूची में शामिल हैं, जिनका कांग्रेस से मोहभंग हो गया है. उन्होंने कहा, 'कई बार नेतृत्व, उनके सलाहकार या मंडली उन्हें जो बताता है उसके आधार पर निर्णय लेता है - जो हमेशा उनके हित में नहीं हो सकता है. ज्योतिरादित्य सिंधिया को देखिए - उन्होंने पार्टी के साथ रहने की पूरी कोशिश की लेकिन चुनाव के बाद, कांग्रेस के पास सीएम और प्रदेश अध्यक्ष एक ही व्यक्ति था. सरकार बनाने में मदद करने के बाद उन्होंने दो साल इंतजार किया.'

प्रसाद  के साथ पार्टी ने अच्छा नहीं किया
बता दें कि अदिति ने योगी सरकार की तारीफ की थी. इसके अलावा उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म करने का समर्थन किया था. उन्होंने आगे कहा, 'यूपी में कांग्रेस का हाल आपके सामने है. मुझे नहीं लगता कि प्रसाद के साथ सही तरीके से व्यवहार किया गया था. उनके कद के एक नेता के साथ बेहतर व्यवहार किया जा सकता था. '

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योगी की तारीफ क्यों?
अदिति सिंह ने आगे कहा, 'मैंने उत्तर प्रदेश सरकार की तारीफ इसलिए की क्योंकि मुझे लगा कि वो अच्छा काम कर रहे हैं. जब मैं सरकार की आलोचना करती हूं, तो शायद उसे उतना आकर्षण नहीं मिलता, क्योंकि विपक्ष में रहना मेरा काम है. मैंने कई मौकों पर सरकार की आलोचना भी की है.'

रायबरेली का गणित
रायबरेली विधानसभा वो सीट है जहां अदिति सिंह के परिवार का करीब तीन दशक से कब्जा है. उनके पिता अखिलेश सिंह 1993 से 2007 तक कांग्रेस के लिए कांग्रेस के विधायक थे, 2007 में निर्दलीय के रूप में जीतने से पहले कांग्रेस ने उन्हें निष्कासित कर दिया था और 2012 में पीस पार्टी उन्हें जीत मिली थी. अदिति को 2017 में कांग्रेस की टिकट पर जीत मिली.

इस सीट पर यादवों और मुस्लिम मतदाताओं का अच्छा अनुपात है और यहां राजनीतिक समझदारी ये है कि यहां सिंह परिवार है जो चुनाव जीतता है न कि पार्टी. लालूपुर में स्थानीय लोगों ने दावा किया, 'अगर कांग्रेस दीदी (अदिति सिंह) को मैदान में नहीं उतारती है तो वह इस सीट से 100% हार जाएगी.' कहा जाता है कि अखिलेश सिंह ने रायबरेली लोकसभा सीट से सोनिया गांधी की जीत में अहम भूमिका निभाई थी.

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