कर्नाटक में चुनावी बिसात बदल सकती है BJP में रेड्डी बंधुओं की वापसी

रेड्डी बंधुओं को डर है कि कांग्रेस अगर सत्ता में दोबारा आई, तो उनके साम्राज्य की बरबादी तय है और यही वजह है कि कर्नाटक के इस रण में बीजेपी और रेड्डी दोनों ही अपना आधार बचाए रखने की जोर लगा रहे हैं.

D P Satish
Updated: April 17, 2018, 5:43 PM IST
कर्नाटक में चुनावी बिसात बदल सकती है BJP में रेड्डी बंधुओं की वापसी
बीएस येदियुरप्पा के साथ गलि जर्नादन रेड्डी की फाइल फोटो
D P Satish
Updated: April 17, 2018, 5:43 PM IST
कर्नाटक में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी की दूसरी लिस्ट में बेल्लारी के गली सोमशेखर रेड्डी को टिकट मिलने से उनके बड़े भाई गली जर्नादन रेड्डी काफी गदगद हैं. अपने करीबियों के साथ हुई एक बैठक में उन्होंने अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि उनके 'अच्छे दिन' लौटने वाले हैं और यह दूसरी पारी काफी बेहतरीन साबित होगी. जर्नादन रेड्डी के करीबी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक के कुछ ही मिनट बाद उन्होंने राज्य बीजेपी के कई नेताओं को फोन घुमाया और रेड्डी कुनबे के तीन लोगों को टिकट देने के लिए धन्यवाद जताया.

अभी एक महीने पहले की ही बात है, रेड्डी बंधुओं के राजनीतिक भविष्य को लेकर संशय बरकरार था और बीजेपी हाईकमान भी कर्नाटक विधानसभा चुनावों में उन्हें कोई भूमिका देने के सवाल पर चुप्पी साधे बैठा था. वहीं दो हफ्ते पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि बीजेपी का रेड्डी बंधुओं से कोई लेना-देना नहीं.

अमित शाह के इस बयान को रेड्डी बंधुओं के सियासी अंत की तरह देखा जा रहा था और इससे परेशान रेड्डी कुनबा भी अपने भविष्य पर चर्चा करने में जुट गए थे. उनमें से कुछ ने तो कांग्रेस और जेडीएस से भी संपर्क साधना शुरू कर दिया था. हालांकि इस बीच रेड्डी बंधुओं के करीबी दोस्त और बेल्लारी से सांसद बी श्रीरामुलू पर्दे के पीछे काम करते रहे और पार्टी हाईकमान को रेड्डी बंधुओं को एक और मौका देने के लिए राज़ी कर लिया.

श्रीरामुलू कर्नाटक में एक मजबूत नेता माने जाते हैं और राज्य के तीन जिलों चित्रदुर्गा, बेल्लारी और रायचूर में उनकी खासी पकड़ मानी जाती है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी नहीं चाहती कि रेड्डी बंधुओं को नाराज़ कर वह ये सीटें गंवा बैठे. और शायद यही वजह रही कि पार्टी ने सोमशेखर रेड्डी के अलावा उनके करीबी सन्ना फकीरप्पा को भी बेल्लारी ग्रामीण सीट से टिकट दिया है. सोमशेखर को बीजेपी से बेल्लारी सिटी से टिकट दिया है, जहां कांग्रेस के मौजूदा विधायक अनिल लाड को 2008 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने 1000 वोटों के करीबी अंतर से हराया था.

विधानसभा चुनाव में रेड्डी कुनबे को टिकट दिए जाने पर सत्ताधारी कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला और प्रियंका चुतर्वेदी ने बीजेपी पर प्रहार करते हुए 'भ्रष्टाचार मुक्त कर्नाटक' को लेकर उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े किए हैं.


रेड्डी बंधु हालांकि इन आरोपों-प्रत्यारोपों से बेपरवाह ही दिखते हैं. करीब 50,000 करोड़ रुपये के कथित खनन घोटाले के आरोप में हैदराबाद और बेंगलुरु के जेलों में करीब चार साल बंद रहे गलि जर्नादन रेड्डी सार्वजनिक जीवन से लगभग लापता ही हो गए थे. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी रेड्डी बंधुओं की उनके गृह प्रदेश में एंट्री बैन पर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी थी.

श्रूीरामुलू को छोड़कर रेड्डियों का पूरा कुनबा राजनीति से बाहर था और पिछले 5-6 सालों में उनके दुश्मनों ने इलाके में धाक बना ली थी. ऐसे में रेड्डी बंधु का भविष्य अंधकार में डूबता दिख रहा था. हालांकि बीते दो महीनों के दौरान हुए घटनाक्रम ने उनमें धुंधले पड़ चुके अपनी राजनीतिक जीवन को दोबारा चमकाने की आस जरूर जगा दिया है.

राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा रही कि दक्षिण में बीजेपी की पहली सरकार बनवाने में रेड्डी बंधुओं के पैसे और पावर की अहम भूमिक रही थी. 2008 के विधानसभा चुनावों के बाद बनी बीजेपी सरकार में उनकी अहमीयत भी अच्छी खासी थी. हालांकि इसके बाद जब तत्कालीन लोकायुक्त जज एन संतोष हेगड़े ने उन्हें अवैध खनन का दोषी करार दिया और जर्नादन रेड्डी को करीब चार सालों तक हैदराबाद और बेंगलुरु की जेल में सड़ना पड़ा.


कर्नाटक में वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान रेड्डी जेल में थे और उनका 'माइनिंग एम्पायर' खतरे में पड़ा था. बीजेपी ने भी उन्हें पार्टी से बेदखल कर दिया था और उनके करीबी बी. श्रीरामुलू ने बीएसार कांग्रेस नाम से अपनी अलग पार्टी बना थी, जिसने उस चुनाव में तीन सीटों पर जीत हासिल की.

वहीं 2014 आते-आते बीजेपी से अलग हुआ, दोनों धड़ा पहला येदियुरप्पा का केजेपी और दूसरा बीएसआर कांग्रेस, बीजेपी में लौट आया और उसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में राज्य की 28 सीटों में से 17 पर कमल खिलाने में मदद की.

हालांकि तब भी बीजेपी उन 'दागी' बेल्लारी बंधुओं को गले लगाने से परहेज ही करती रही. नवंबर 2016 में एक बार फिर उनके बीच करीबी बढ़ती दिखी, जब रेड्डी अपने बेंगलुरु पैलेस पर अपनी बेटी की भवय शादी की, तो इस समारोह में सारे बड़े बीजेपी नेता शरीक हुए. इस शादी में करीब 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की चर्चा थी. नोटबंदी के करीब हफ्ते भर बाद हुई इस शादी में इस खर्च को लेकर आयकर विभाग ने जांच करने की जहमत नहीं उठाई.

सुप्रीम कोर्ट ने जर्नादन रेड्डी के बेल्लारी में घुसने और मीडिया से उनकी बातचीत पर रोक लगा रखी है. रेड्डी ने दो हफ्ते पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर बेल्लारी में उनके प्रवेश पर लगी रोक हटाने की मांग की थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने इससे इनकार कर दिया.

ऐसे में जर्नादन रेड्डी ने चुनावों के लिए बेल्लारी और चित्रदुर्गा सीमा पर अपना बेस बनाया है, जहां से वह बेल्लारी में चुनाव प्रक्रिया पर नजर रख रहे हैं. उनके एक करीबी ने NEWS18 को बताया कि रेड्डी ने बीजेपी को भरोसा दिलाया है कि वह कर्नाटक की सत्ता में बीजेपी को वापस लाएंगे.


वहीं राज्य बीजेपी के महासचिव और विधायक सीटी रवि ने 'दागी' रेड्डियों की बीजेपी में वापसी का बचाव करते हैं. उन्होंने NEWS18 से कहा, 'राज्य में विधानसभा की 224 सीटें हैं, हर सीट काफी अहम है. रेड्डी हमें कुछ सीटों पर मदद कर रहे हैं और इसमें कुछ गलत नहीं.'

दरअसल रेड्डी बंधुओं को डर है कि कांग्रेस अगर सत्ता में दोबारा आई, तो उनके साम्राज्य की बरबादी तय है और यही वजह है कि कर्नाटक के इस रण में बीजेपी और रेड्डी दोनों ही अपना आधार बचाए रखने की जोर लगा रहे हैं.
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