37 करोड़ से ज्यादा में बिकी अमृता शेरगिल की 83 साल पुरानी पेंटिंग, बनाया यह खास रिकॉर्ड

मुंबई के सैफ्रनआर्ट में मंगलवार को हुई नीलामी में इसे 37.8 करोड़ रुपये में खरीदा गया. (फोटो: Facebook/@Saffronart)

Amrita Sher-Gil Painting: अमृता शेरगिल भारत की सबसे मशहूर महिला कलाकार हैं. यहां तक कि भारत सरकार (Government of India) की तरफ से उन्हें 'राष्ट्रीय संपत्ति' का दर्जा दिया गया है. सरकार की तरफ से मिले इस सम्मान के चलते उनकी इस पेंटिंग को देश के बाहर ले जाना गैर-कानूनी है.

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    मुंबई. चित्रकार अमृता शेरगिल (Amrita Sher-Gil) की पेंटिंग 'इन द लेडीज एन्क्लोजर' (In the Ladies’ Enclosure) देश की दूसरी सबसे महंगी कलाकृति बन गई है. मुंबई के सैफ्रनआर्ट में मंगलवार को हुई नीलामी में इसे 37.8 करोड़ रुपये में खरीदा गया. शेरगिल की सबसे महंगी कलाकृति का रिकॉर्ड इससे पहले 1934 में तैयार की गई 'द लिटिल गर्ल इन ब्लू' के पास था. 2018 में इस पेंटिंग की बोली 18.7 करोड़ रुपये लगाई गई थी. साल 1941 में महज 28 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई थी.

    हालांकि, किसी भारतीय कलाकार की तरफ से तैयार की गई सबसे महंगी पेंटिंग का रिकॉर्ड वीएस गायतोंडे के पास है. 1961 में बनाई गई उनकी पेंटिंग को सैफ्रनआर्ट में 39.98 करोड़ रुपये में खरीदा गया था. शेरगिल भारत की सबसे मशहूर महिला कलाकार हैं. भारत सरकार की तरफ से उन्हें 'राष्ट्रीय संपत्ति' का दर्जा दिया गया है. सरकार की तरफ से मिले इस सम्मान के चलते उनकी पेंटिंग को देश के बाहर ले जाना गैर-कानूनी है.

    21.5 x 31.5 इंच के कैनवास पर तैयार की गई 'इन द लेडीज एन्क्लोजर' में महिलाओं का एक समूह और एक कुत्ता नजर आता है. इसमें एक हिबिस्कस का एक झाड़ भी शामिल है. पेंटिंग के बीच में एक दुल्हन सलवार कमीज में बैठी हुई है. वहीं, अन्य महिलाएं दुल्हन के बालों को बांध रही है और एक छोटी लड़की हिबिस्कस पूल को देख रही है. हालांकि, शेरगिल की कलाकृतियों में महिलाओं का ऐसा समूह दिखना आम है.

    बचपन में ही कलाकारी की शुरुआत करने वाली शेरगिल पेरिस में कला की पढ़ाई के लिए भेजा गया. वहां, उन्होंने पेंटिंग की एकेडमिक स्टाईल सीखी. 1934 में उन्होंने भारत में वापसी की और यहां से उनकी शैली में विकास और भारतीय जड़ों के साथ गहराव की शुरुआत हुई. उन्होंने देशभर में कई यात्राएं की थीं. उनके काम करने के तरीके में बदलाव आया. नीले और हरे रंग की जगह लाल और कत्थई ने ले ली थी. वे अजंता और ऐलोरा और राजपूत और पहाड़ी लघु चित्रों से काफी प्रभावित हुईं. उनके काम में बदलाव की झलक इन द लेडीज एन्क्लोजर में देखी जा सकती है.

    खास बात यह है कि शेरगिल की तरफ से कागज पर तैयार की गई कलाएं नीलामी में आती रही हैं, लेकिन उनके कैनवास को ऐसा मौका कम ही मिला है. आर्टरी इंडिया का डेटा बताता है कि बीते 34 सालों में शेरगिल की 68 कलाओं की नीलामी हुई है. इसके जरिए 193.1 करोड़ रुपये एकत्र किए गए. इनमें से केवल 16 पेंटिंग की ऐसी थीं, जिन्हें कैनवास पर तैयार किया गया था.

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