सपा-बसपा के गठबंधन में कांग्रेस के लिए इस कारण छोड़ दी गईं दो सीटें

ऐलान के साथ ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने यह समझाने की कोशिश की कि इस गठबंधन में कांग्रेस को क्यों नहीं शामिल गया. इन दो सीटों पर उम्मीदवार उतारने के ऐलान में भी तेजी दिखाई गई.

News18.com
Updated: January 12, 2019, 10:46 PM IST
सपा-बसपा के गठबंधन में कांग्रेस के लिए इस कारण छोड़ दी गईं दो सीटें
मायावती, राहुल गांधी और सोनिया गांधी (फाइल फोटो)
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Updated: January 12, 2019, 10:46 PM IST
अखिलेश यादव और मायावती ने आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए शनिवार को उत्तर प्रदेश में गठबंधन का ऐलान किया. दोनों ही दलों ने कांग्रेस को इससे अलग रखा है. हालांकि, मायावती और अखिलेश ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी की अमेठी और रायबरेली सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला लिया है.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस ऐलान के साथ ही यह समझाने की कोशिश की कि इस गठबंधन में कांग्रेस को क्यों नहीं शामिल गया. कांग्रेस को गठबंधन में जगह न देने की वजह बताते हुए मायावती ने कहा, 'मैं आपको बता दूं कि आजादी के बाद कांग्रेस केंद्र और कई राज्यों की सत्ता में थी. इसके बावजूद देश में भारी भ्रष्टाचार और गरीबी थी.'

केंद्र में कांग्रेस और बीजेपी की सरकार की तुलना करते हुए मायावती ने कहा, 'दोनों दलों ने अपने कार्यकाल में रक्षा घोटाला किया है. बोफोर्स के कारण कांग्रेस हार गई और राफेल के कारण बीजेपी हार जाएगी.' उन्होंने समझाते हुए कहा, 'कांग्रेस के साथ हमारा पूर्व अनुभव अच्छा नहीं रहा और हमारा वोट एक दूसरे को ट्रांसफर नहीं पाता. हमारा वोटर कांग्रेस की बजाय दूसरी पार्टियों में जाता है. ऐसे में हम अपना वोट प्रतिशत कम नहीं कर सकते हैं.



मायावती ने कहा कि पिछले 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन करने के बाद भी समाजवादी पार्टी हार गई. हालांकि दोनों ही दल राज्य की 80 संसदीय सीटों में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे.

वहीं राजनीतिक विश्लेषकों ने इस गठबंधन के अंक गणित के पीछे एक बड़ी राजनीतिक वजह का संकेत दिया है. सपा और बसपा 80 में से 76 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी और आरएलडी को 2 सीटें देंगी. इस गठबंधन ने अब राज्य की जिम्मेदारी ले ली है और केंद्र से बीजेपी को हटाने के लिए लड़ाई छेड़ दी है.

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मौजूदा आंकड़ों के अनुसार बीजेपी का कुछ वोट प्रतिशत कांग्रेस में खिसक सकता है. यूपी​ विधानसभा चुनाव 2017 का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि अगर कांग्रेस के साथ सपा गठबंधन में नहीं होती, तो दोनों ने मिलकर कई सीटें जीती होतीं.
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ऐसी संभावना है कि यह चुनाव बीजेपी बनाम अन्य की जगह हिंदू बनाम अन्य चुनाव के तौर पर देखा जा सकता है. वहीं कांग्रेस इस चुनाव का एजेंडा मोड़ने की कोशिश में लगी है, जबकि सपा और बसपा मिलकर इसे जाति केंद्रित करने की कोशिश करेंगी.

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वहीं गुलाम नबी आजाद सहित कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता रविवार को पार्टी और गठबंधन की रणनीति तैयार करने के लिए बैठक करने वाले हैं. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने कहा, 'गुलाम नबी आजाद, यूपीसीसी के अध्यक्ष राज बब्बर और अन्य वरिष्ठ नेता रणनीति को अंतिम रविवार को प्रदेश की राजधानी पहुंचेंगे.'

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