लिकर किंग पॉन्टी चड्ढा की अनसुनी कहानी

नासिर हुसैन
Updated: August 11, 2017, 4:00 PM IST
नासिर हुसैन
Updated: August 11, 2017, 4:00 PM IST
कहा जाता है कि इंसान का नसीब उसके हाथों की लकीरों में होता है. लेकिन उसका तो एक हाथ ही नहीं था. दूसरे हाथ के पंजे की लकीरें भी आधी-अधूरी थीं. बावजूद इसके वो लिकर किंग के नाम से मशहूर हुआ. कुछ ही साल में ही वह हजारों करोड़ के टर्न ओवर वाले ग्रुप का मालिक बन गया.

यूपी और पंजाब में शराब बिक्री की पॉलिसी पॉन्टी पॉलिसी के नाम से चर्चित हो गई. जी हां, हम बात कर रहे हैं गुरदीप सिंह चढ्ढा उर्फ पॉन्टी चढ्ढा की. आज पॉन्टी को मरे लगभग पांच साल हो चुके हैं, लेकिन यूपी में आज भी शराब बाजार पर चढ्ढा परिवार का कब्जा है. पॉन्टी का परिवार आज आधा दर्जन से अधिक बड़े कारोबार कर रहा है.

आदर्श नगर में रिफ्यूजियों के लिए बने क्वॉर्टर (मकान) में रहा था पॉन्टी का परिवार. अब यहां दुकानें बन रही हैं.


पाकिस्तान के रावलपिंडी से आया था पॉन्टी का परिवार

पॉन्टी के पिता कुलवंत सिंह चढ्ढा अपने पिता और भाई हरभजन के साथ बंटवारे के वक्त पाकिस्तान के रावलपिंडी से हिन्दुस्तान आए थे. सबसे पहले उन्होंने यूपी के रामनगर (अब उत्तराखण्ड में) के पीयू मदार में अपना ठिकाना बनाया था.

मुरादाबाद के समाजसेवी सरदार गुरबिंदर बताते हैं कि रामनगर में चढ्ढा परिवार ने गन्ने का क्रशर (चीनी बनाने के लिए) लगाया था. कुछ समय बाद दूध का कारोबार भी शुरू कर दिया था. इसके बाद 1955-56 में यह परिवार रामनगर से मुरादाबाद आ गया.

यहां सबसे पहले चढ्ढा परिवार आदर्श नगर में रिफ्यूजियों को दिए गए क्वार्टर (मकान) में रहा था. 1959 में पॉन्टी का जन्म भी इसी मकान में हुआ था. इस मकान में आने के बाद चढ्ढा परिवार ने मुरादाबाद में अलग-अलग तरह का कारोबार शुरू किया. वर्ष 1980 में सिविल लाइंस इलाके में एक आलीशान मकान बना लिया.

कारोबार में कामयाबी मिलने के बाद सिविल लाइंस इलाके में पहला ये मकान बनाया था पॉन्टी के परिवार ने.


बिजली के करंट से उड़ गया था पॉन्टी का हाथ
कभी पॉन्टी चढ्ढा के साथ पढ़े कपड़े का काम करने वाले कैलाश कपूर बताते हैं कि एक बार आदर्श नगर वाले पुराने घर में पॉन्टी और उनके चाचा का लड़का टीटू छत पर पतंग उड़ा रहे थे. उस वक्त उनकी उम्र करीब 10 से 11 वर्ष रही होगी. इसी दौरान पतंग छत के ठीक बराबर से जा रही हाईटेंशन लाइन में उलझ गई.

पॉन्टी को कुछ नहीं सूझा तो उसने छत पर ही पड़े एक लोहे के तार से पतंग निकालने की कोशिश की. इसी कोशिश में शरीर में करंट फैल गया. बायां हाथ कोहनी से एकदम खत्म हो गया, वहीं दूसरे हाथ के पंजे से दो उंगली गायब हो गईं और हथेली में भी चोट आ गई. चचेरा भाई टीटू करंट लगने से बेहोश हो गया.

टाइप-2 पर्सनॉल्टी ने बनाया पॉन्टी को करोड़पति
एएमयू के मनोचिकित्सक एसए आजमी बताते हैं कि मेडिकल साइंस के अनुसार दो तरह के व्यक्तिव होते हैं. एक टाइप-1 और दूसरा टाइप-2. पॉन्टी चड्ढा टाइप-2 की कैटेगिरी में आता था. ऐसे लोगों में विषम परिस्‍थितियों में भी जीने की लालसा बहुत होती है. ये लोग जल्द से जल्द बहुत बड़ा आदमी बनना चाहते हैं, कारोबार को बड़ा करना चाहते हैं. ये ही वजह थी कि 56 वर्ष की जिंदगी जीने वाला ये इंसान अपने पीछे हजारों करोड़ रुपए का बिजनेस छोड़ गया.
First published: August 11, 2017
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर