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Success Story: उन महिलाओं की कहानी, जिन्होंने अकेले लड़ी लड़ाई और पुरुषों के लिए बनीं नजीर

4 राज्यों की ये महिलाएं सिर्फ उदाहरण मात्र हैं. देश में काफी संख्या में महिलाएं अकेले लड़ाई लड़कर अनगिनत लोगों को लाभ पहुंचा रही हैं.
4 राज्यों की ये महिलाएं सिर्फ उदाहरण मात्र हैं. देश में काफी संख्या में महिलाएं अकेले लड़ाई लड़कर अनगिनत लोगों को लाभ पहुंचा रही हैं.

कभी घर संभाल रहीं इन महिलाओं के सामने जब चुनौतियां आन खड़ी हुईं तो उन्होंने डटकर मुकाबला किया और नई इबारत लिखी. मुश्किलों से लड़कर जीतने वाली इन महिलाओं की कहानी प्रेरित करती हैं कि जब आप ठान लें, तो जग जीत लेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 6, 2021, 8:46 PM IST
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(शरद पाण्डेय)

नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर की स्निग्धा त्रिपाठी (Snigdha Tripathi) हों या गुजरात की स्नेहा (Sneha) हों, राजस्थान की उज्ज्वला (Ujjawala) हों या फिर जम्मू की पूजा (Pooja) हों. इन सभी महिलाओं में एक समानता है कि पहले सभी घरेलू महिला थीं. बाद में ज़रूरत पड़ने पर डिग्री या हिम्मत या हुनर का इस्तेमाल कर अकेले लड़ाई लड़ न खुद को राहत दी, बल्कि बाद में बड़ी संख्या में लोगों को राहत दिलवाई और पुरुषों के लिए भी नज़ीर बनी हैं. 4 राज्यों की ये महिलाएं सिर्फ उदाहरण मात्र हैं. देश में काफी संख्या में महिलाएं अकेले लड़ाई लड़कर अनगिनत लोगों को लाभ पहुंचा रही हैं.

स्निग्धा त्रिपाठीः बिल्डर के खिलाफ कोर्ट में उतरीं, 28 लोगों के 2 करोड़ वापस कराए
एनसीआर में रहने वाली स्निग्धा त्रिपाठी एलएलबी करने के बाद हाउस वाइफ वाइफ थीं. इसी बीच उन्होंने 2011 में नोएडा में एक बिल्डर के प्रोजेक्ट में कुछ रुपए जमाकर फ्लैट बुक कराया. बिल्डर ने 2014 में पजेशन देने का वादा किया. बाद में पता चला कि जिस जमीन पर फ्लैट बनने हैं वो जमीन रेजिडेंसियल न होकर कमर्शियल है. उन्होंने बिल्डर से रुपए वापस मांगे तो वो आनाकानी करने लगा. इसी बीच स्निग्धा को अपनी एलएलबी की डिग्री की याद आई, वे स्वयं दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में मामला ले गईं और खुद ही केस लड़ना शुरू किया. बाद में उनके साथ करीब 28 लोग जुड़ गए, जिन्होंने उसी बिल्डर के यहां फ्लैट बुक कराया था. इसमें कई ऐसे लोग थे, जो पूरे जीवन की कमाई बिल्डर को दे चुके थे. स्निग्धा ने 3 साल की लड़ाई के बाद सभी के रुपए बिल्डर से वापस कराए. अब तक उन्होंने दो करोड़ से ज्यादा रुपया वापस कराया है. केस के बाद से वो नियमित रूप में कड़कड़डूमा कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं.
स्नेहाः इंस्टेंट लोन कंपनियों से लड़ीं, अभियान चलाया और 20 जिंदगियां बचाईं



गुजरात के गांधीनगर में रहने वाली स्नेहा को अचानक कुछ हज़ार रुपयों की ज़रूरत पड़ी. उन्होंने ऐप से लोन लेने की सोची. चूंकि एक कंपनी 3 हज़ार से अधिक लोन नहीं देती, इसलिए उन्होंने चार कंपनियों से लोन लिया. समय पर लोन नहीं चुका पाई और धीरे धीरे कई ऐप कंपनियों से 1.20 लाख रुपए लोन लोन ले लिया. इसके बाद उनको धमकी मिलनी शुरू हुई, रिश्तेदारों को फोन कर परेशान करना शुरू किया गया. इससे डरने के बजाए उन्होंने ऐप लोन कंपनी के खिलाफ लड़ाई लड़ने की सोची और साइबर एक्सपर्ट की मदद से गुजरात में उन्होंने मामला दर्ज कराया. इसके बाद से वे ऐप लोन के खिलाफ अवेयरनेस कैंपेन चला रही हैं. पीड़ितों की एफआईआर में मदद करती है और साइबर एक्सपर्ट से भी मदद करवाती हैं. हाल ही में बेंगलुरु में ऐप लोन के फर्जी कॉल सेंटर के भंडाफोड़ में स्नेहा का भी सहयोग रहा. उन्होंने पुलिस तक मामला पहुंचाया था. स्नेहा ने अभी तक ऐप कंपनियों के चंगुल में फंसे करीब 20 लोगों की मदद कर उन्हें गलत कदम उठाने से रोका है.

उज्जवला: 22 साल बाद शुरू की साइकिलिंग, अब यूट्यूब से साइकिल चलाना सिखा रही हैं

झालावाड़, राजस्थान की रहने वाली उज्जवला 22 साल पहले साइकिल से चलती थीं, शादी के बाद परिवार में व्यस्त हो गईं. 2 साल पहले अपनी बेटी की साइकिल चलाना शुरू किया तो आसपास के लोग मज़ाक उड़ाते थे, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की. उन्होंने नियमित रूप से साइकिल चलाने का अभ्यास शुरू किया. वे प्रदेश की अच्छी साइकिलिस्ट बन गई. आजकल वो जरूरतमंद महिलाओं को साइकिल सिखाने के लिए छोटे छोटे वीडियो बना रही हैं और यूट्यूब पर डाल रही हैं. इस तरह अब तक 50 महिलाओं को साइकिल चलाना सिखा चुकी हैं. इसके अलावा व्यक्तिगत रूप से भी काफी महिलाओं को सिखा रहीं हैं. उज्जवला बताती हैं कि साइकिल सीखने के बाद महिलाओं को आसपास आने जाने के लिए दूसरे पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है.

तानों के बावजूद प्रदेश की पहली बस ड्राइवर बनीं, अब ट्रेनिंग स्कूल खोलने की तैयारी

जम्मू में कठुआ की रहने वाली पूजा ने लोगों के तानों के बावजूद बस और ट्रक चलाना सीखा. बस चलाने पर हाल ही में वो प्रदेश की पहली महिला कमर्शियल ड्राइवर बनीं. अब जल्द ही वो अपना ट्रेनिंग स्कूल खोलने की तैयारी कर रही हैं, जिसमें महिलाओं को गाड़ी चलाना सिखाएंगी, जिससे वो आत्मनिर्भर हो सकें.

पूजा कहती हैं कि जो काम आप करना चाह रहे हैं, उसे जरूर करें, ये मत सोचें कि समाज और लोग क्या कहेंगे.
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