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चुनाव के बाद बंगाल में क्यों हुई हिंसा? बुद्धिजीवियों के ग्रुप ने केंद्रीय मंत्री को सौंपी रिपोर्ट

बीजेपी का दावा है कि अब तक इस हमले में 9 कार्यकर्ताओं की मौत हुई है. (PTI)

West Bengal Violence : बुद्धिजीवियों के ग्रुप की सदस्य मोनिका अरोड़ा ने कहा कि बंगाल में चुनाव परिणाम आने के बाद सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों ने हिंसा फैलाई. उनका कहना है कि इसमें पुरुषों को डराया धमकाया और पीटा गया वहीं महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और बलात्कार जैसी घटना की गई

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नई दिल्ली. केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग पर बुद्धिजीवियों के एक ग्रुप ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी के साथ मुलाकात कर बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा पर अपनी एक फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट सौंपी. साथ ही इस ग्रुप में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी से विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों द्वारा मामले की जांच करवाने की मांग करते हुए पीड़ितों को न्याय दिलाने की अपील की.

बुद्धिजीवियों के ग्रुप की सदस्य मोनिका अरोड़ा ने कहा कि बंगाल में चुनाव परिणाम आने के बाद सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों ने हिंसा फैलाई. उनका कहना है कि इसमें पुरुषों को डराया धमकाया और पीटा गया वहीं महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और बलात्कार जैसी घटना की गई और बच्चों को डराते हुए यह कहा गया कि अगर वे उनका विरोध करेंगे तो उनके साथ भी इसी तरह का व्यवहार भविष्य में किया जाएगा. मोनिका अरोड़ा का कहना है कि इस हिंसा में सबसे ज्यादा गरीब अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग प्रभावित हुए. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हिंसा के वक्त "खेला होबे" का नारा भी लगाया गया



बुद्धिजीवियों ने की यह मांग
अपने फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट के बाद बुद्धिजीवियों ने केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी से मांग की कि पीड़ितों को न्याय दिलवाया जाए. इसके साथ ही साथ है उनकी मांग है कि इन घटनाओं में एफ आई आर दर्ज की जाए साथ ही साथ मानवाधिकार आयोग राष्ट्रीय महिला आयोग राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग अनुसूचित जाति आयोग और अनुसूचित जनजाति आयोग भी मामले की जांच करें. मोनिका अरोड़ा का कहना है कि वे अपनी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट इन आयोगों को भी सौंपेगी.

इस तरह की गई फैक्ट फाइंडिंग
बुद्धिजीवियों के समूह की सदस्य मोनिका अरोड़ा का कहना है कि बंगाल में चुनाव बाद हुए हिंसा की रिपोर्ट तैयार करने के लिए उन्होंने लोगों से फ़ोन पर, वीडियो कॉल के माध्यम से व्हाट्सएप के माध्यम से पीड़ितों से बात की और उसके बाद यह रिपोर्ट तैयार की.