उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भाषाई अखबारों और मातृभाषा के संवर्धन की वकालत की

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भाषाई अखबारों और मातृभाषा के संवर्धन की वकालत की
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू .

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू (Venkaiah Naidu) ने कहा, "मैं उम्मीद करता हूं कि भारत (India) में अधिक से अधिक भाषाई अखबार शुरू हों, वे क्षेत्रीय भाषाओं का संवर्धन करें और ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि को गति दें."

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कटक: उपराष्ट्रपति (Vice President) एम वेंकैया नायडू (Venkaiah Naidu) ने रविवार को यह कहते हुए भाषाई अखबारों ( linguistic Newspapers) के विकास का आह्वान किया कि वे राष्ट्रीय भाषाओं का संवर्धन करते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि को गति प्रदान करते हैं. उन्होंने लोगों से मातृभाषा (Mother Tongue) का सम्मान करने की अपील भी की. उपराष्ट्रपति नायडू ने कहा, "मैं उम्मीद करता हूं कि भारत में अधिक से अधिक भाषाई अखबार शुरू हों, वे क्षेत्रीय भाषाओं का संवर्धन करें और ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि को गति दें."

उन्होंने प्रमुख ओडिया अखबार 'द समाज' के शताब्दी समारोह में कहा, "भाषाई अखबार न केवल स्थानीय आकांक्षाओं को परिलक्षित करते हैं बल्कि वे लोगों के बेहद करीब भी होते हैं. आप अपने चौकस, त्वरित और सच्ची रिपोर्टिंग से भारत के ग्रामीण परिदृश्य में सच्चे तौर पर बदलाव ला सकते हैं." नायडू ने कहा कि भारतीय भाषाओं के संवर्धन के लिए सभी प्रयास किये जाने चाहिए.

'मातृभाषा आपकी नेत्रदृष्टि की भांति है'



उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा, "हमें अपनी मातृभाषा का सम्मान करना चाहिए और अपनी मातृभाषा को बढ़ावा देने के बाद हमें कोई अन्य भाषा सीखनी चाहिए." उन्होंने कहा, "मातृभाषा आपकी नेत्रदृष्टि की भांति है और अन्य भाषाएं आपके चश्मे की तरह हैं. यदि आपकी अच्छी नेत्रदृष्टि है तो ही चश्मे आपको बेहतर तस्वीर पेश करेंगे."
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