अपना शहर चुनें

States

पहलू खान की लिंचिंग दुनिया ने देखी, फिर कोर्ट ने बतौर सबूत क्यों खारिज कर दिया वीडियो?

दो साल बाद, वो वीडियो, जो इस मामले में एक खास सबूत था, लेकिन इस सबूत को कोर्ट में पर्याप्त नहीं माना गया.
दो साल बाद, वो वीडियो, जो इस मामले में एक खास सबूत था, लेकिन इस सबूत को कोर्ट में पर्याप्त नहीं माना गया.

पहलू खान (Pehlu Khan) के वकील अख्तर हुसैन ने न्यूज 18 को बताया, 'रविंदर जब गुजर रहा था, तब उसने एक भीड़ (Mob) को पहलू खान को पीटते हुए देखा. वो वीडियो बनाने के लिए रुक गया. वो स्वीकार कर चुका है कि उसी ने वीडियो (Video) बनाया था. उसकी गवाही इस बात को साबित करती है कि वीडियो प्रामाणिक है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 16, 2019, 9:44 AM IST
  • Share this:
राजस्थान के अलवर में 1 अप्रैल, 2017 को हुई मॉब लिंचिंग (mob lynching case) के शिकार हरियाणा के नूंह मेवात निवासी पहलू खान (Pehlu khan) की मौत के करीब सवा दो साल बाद बुधवार को कोर्ट ने सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया. निचली अदालत के इस फैसले को गहलोत सरकार (Gehlot government) ने हाईकोर्ट (High Court) में चुनौती देने का फैसला किया है. राज्य सरकार जल्द ही फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेगी, लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि अदालत ने सबूत के तौर पर मॉब लिंचिंग के उस वीडियो को क्यों खारिज किया?

इस मॉब लिंचिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने पर खूब हंगामा हुआ. दुनिया भर के लोगों ने उस खौफनाक वीडियो को देखा. उस वीडियो में सफेद सलवार कुर्ता पहने पहलू खान को हाईवे पर घसीटते हुए देखा गया था. लोगों का एक झुंड उसे बेरहमी से पीट रहा था. घटना के तुरंत बाद खान की अस्पताल में मौत हो गई थी. दो साल बाद, वो वीडियो, जो इस मामले में एक खास सबूत था, लेकिन इस सबूत को कोर्ट में पर्याप्त नहीं माना गया.

पहलू खान लिंचिंग मामला




न्यूज 18 ने की पहलू खान के वकील अख्तर हुसैन से बात
सभी छह आरोपियों, जिनपर पहलू खान को पीट-पीटकर मारने का आरोप है, उन्हें बुधवार को राजस्थान के अलवर जिले की एक निचली अदालत ने बरी कर दिया. अतिरिक्त जिला न्यायाधीश-1 ने पाया कि मामले में आरोप को लेकर एक हद तक पर्याप्त संदेह है और इसलिए अदालत ने अभियुक्त को संदेह का लाभ दिया.

पहलू खान के वकील अख्तर हुसैन ने न्यूज 18 को बताया, 'इस घटना का वीडियो वायरल हुआ था, सभी ने इसे देखा. आप अभी भी ऑनलाइन जाकर इसे देख सकते हैं. हालांकि, अदालत ने वीडियो को सबूत के तौर पर स्वीकार नहीं करने का फैसला किया.'

उन्होंने कहा, 'इसे अदालत में बतौर सबूत पेश करने के लिए, पुलिस को एक फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) प्रमाण पत्र जमा करना था. वे समय पर ऐसा नहीं कर सके. मैं यकीन नहीं कर सकता कि उनके पास एक वीडियो की जांचने के लिए दो साल थे और वे ऐसा नहीं कर सके. पुलिस और जांचकर्ताओं ने पहलू खान के मामले को कमजोर होने दिया.'

रविंदर ने बनाया था वीडियो
हालांकि, हुसैन ने तर्क दिया कि न्यायाधीश अभी भी वीडियो को स्वीकार कर सकते थे. पहलू खान लिंचिंग मामले में कुल 44 गवाहों की जांच की गई. उन 44 में से एक रविंदर दिल्ली पुलिस का एक कांस्टेबल था, जो वहां से गुजर रहा था. अदालत में अपने बयान में रविंदर ने वीडियो बनाने की बात स्वीकार की थी.

हुसैन ने आगे बताया, 'रविंदर जब गुजर रहा था तब उसने भीड़ को पिहलू खान को पीटते हुए देखा. वो वीडियो बनाने के लिए रुक गया. वो स्वीकार कर चुका है कि उसी ने वीडियो बनाया था. उसकी गवाही इस बात को साबित करती है कि वीडियो प्रामाणिक था. मैं अदालत के ऊपर सवाल उठाने वाला कोई नहीं होता हूं, लेकिन हमें उम्मीद है कि वीडियो को सबूत के तौर पर स्वीकार कर लिए जाने की संभावनाएं बची हुई हैं.

पहलू खान केस.


मॉब लिंचिंग रोकने के लिए राजस्थान में नया कानून
राजस्थान सरकार ने पिछले हफ्ते मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए एक नया कानून पारित किया. हुसैन ने कहा कि ये कानून ऐसे कई मामलों को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा जैसे कि पहलू खान के मामलों को दोहराया नहीं जाता है. उन्होंने कहा, "कानून का कोई मतलब नहीं रह जाता, जब जांच एजेंसियां ​​अपना काम ठीक से नहीं करती हैं. उन्हें बिना किसी डर या पक्ष के काम करने की जरूरत है."

बचाव पक्ष का दावा
हालांकि, बचाव पक्ष ने दावा किया कि अभियोजन पक्ष समय पर वीडियो को एफएसएल को भेजने में विफल रहा. हरियाणा के नूंह के रहने वाले 55 साल के पहलू खान, रमजान के दौरान अपने दुग्ध व्यापार को बढ़ाने के मकसद मवेशी खरीदने गांव से निकले थे. 1 अप्रैल, 2017 को दिल्ली-अलवर राजमार्ग पर कथित गोरक्षकों ने उन्हें घेर लिया. पहलू खान ने अपनी खरीद रसीदें दिखाकर खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन रॉड और लाठी से पीट-पीटकर उन्हें मार दिया गया.

अदालत ने जिन छह आरोपियों को छोड़ा है, उनमें विपिन यादव, रवींद्र कुमार, कालूराम, दयानंद, योगेश कुमार और भीम राठी हैं. तीन नाबालिगों को भी अभियुक्त बनाया गया था और वे एक किशोर न्याय बोर्ड द्वारा एक अलग पूछताछ का सामना कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें:
CM कमलनाथ बोले- जापान चलेंगे तो रोने लगे बाबूलाल गौर...
एक बार इस्तेमाल वाली प्लास्टिक से मुक्त होगा भारत: जावड़ेकर
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज