Choose Municipal Ward
    CLICK HERE FOR DETAILED RESULTS

    Bihar Chunav Result: ये है बिहार का 'Y' फैक्टर, जानिए कैसे युवा बन गए हैं नए कल की उम्मीद

    बिहार में युवा बदल रहे हैं राजनीति
    बिहार में युवा बदल रहे हैं राजनीति

    Bihar Chunav Result 2020: बिहार में युवा मतदाताओं ने इस बार जाति से ऊपर उठकर बेरोजगारी और शिक्षा जैसे मुद्दों को तरजीह दी है जिसका असर NDA और महागठबंधन दोनों के चुनाव नतीजों पर नज़र आने जा रहा है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 10, 2020, 9:15 AM IST
    • Share this:
    पटना. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Chunav Result 2020) के लिए मतगणना शुरू हो चुकी है और कुछ ही घंटों में साफ़ हो जाएगा कि अगले पांच साल तक इस राज्य की सत्ता किसके हाथ में रहेगी. कई सारे एग्जिट पोल्स में सामने आया है कि तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के महागठबंधन (Mahagathbandhan) ने बिहार के युवाओं में खासी पहुंच बना ली है. महागठबंधन के लिए ये 18 से 39 साल आयुवर्ग के मतदाता काफी अहम साबित हो सकते हैं, क्योंकि ये बिहार के कुल मतदाताओं की संख्या में 50% से भी ज्यादा की हिस्सेदारी रखते हैं. इन पोल्स में सामने आया है कि 'बेरोजगारी' वह सबसे बड़ा मुद्दा था जो कि पूरे चुनाव प्रचार में छाया रहा.

    टुडे-चाणक्य के एग्जिट पोल्स की बात करें तो 35% से भी ज्यादा लोगों ने बेरोजगारी को ही राज्य का सबसे बड़ा मुद्दा बताया है. 28% ने 'विकास' जबकि सिर्फ 19% मानते हैं कि 'करप्शन' राज्य का सबसे बड़ा मुद्दा है. राष्ट्रीय सुरक्षा, लॉ एंड ऑर्डर' जैसे मुद्दे तो इस सर्वे के मुताबिक बड़े मुद्दों में जगह बना ही नहीं पाए हैं. लोगों ने साफ़ कहा कि वे इन मुद्दों पर वोट नहीं कर रहे हैं. एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के मुताबिक 18 से 35 साल आयु के 47% लोगों ने महागठबंधन को NDA को दरकिनार कर वोट देने में दिलचस्पी दिखाई है. NDA के हिस्से में इस आयुवर्ग के सिर्फ 34-36 % वोट आने की संभावना है. NDA के पक्ष में 51 वर्ष की आयु से बड़े ज्यादातर मतदाता नज़र आए. इस आयुवर्ग में नीतीश और बीजेपी का दबदबा नज़र आता है.

    बेरोजगारी पर वोट दे रहे युवा- बिहार में NewsHaat नाम का एक राज्य आधारित न्यूज़ पोर्टल चलाने वाले पत्रकार कन्हैया भेलारी ने News18 को बताया कि इन चुनावों में ऐसा नज़र आ रहा है कि कुछ हद तक युवाओं के सपनों ने जातिवादी वोटिंग के चले आ रहे पैटर्न को चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि मैं अब काफी दिनों से बिहार के विधानसभा क्षेत्रों की यात्राएं कर रहा हूं. मैं आपको ये बता सकता हूं कि कई इलाकों में युवाओं से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखकर जाति के बंधन टूट रहे हैं और इसका असर वोटिंग पर भी हो रहा है. कन्हैया ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि युवाओं में अब वैसी रह गयी है जैसे क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर अपने आखिरी दिनों में थे. सब मानते हैं कि वे महान खिलाड़ी रहे हैं, लेकिन सभी ये भी चाहते हैं कि अब उन्हें रिटायर होकर आराम करना चाहिए. ये बिहार के युवाओं के लिए वैसा समय है जब वे कुछ कर दिखाने के लिए आतुर हैं बस वे एक मौके का इंतज़ार कर रहे हैं.



    कन्हैया जी भूख की बात कर रहे हैं उसे तेजस्वी यादव के 10 लाख नौकरियों के वादे ने भड़काने का काम किया है. युवाओं का भी बड़ा हिस्सा ये मानता है कि 10 लाख नौकरियां पहले दिन दे देना शायद संभव न हो लेकिन तेजस्वी यादव ने अकेले दम पर चुनाव को अन्य मुद्दों से हटाकर बेरोजगारी जैसे मुद्दे पर लाकर टिका दिया. इसके अलावा फर्स्ट टाइम वोटर्स का फैक्टर भी काम करने वाला है. इन वोटर्स की संख्या इस बाद 78 लाख के आस-पास बताई जा रही है. इन वोटर्स ने लालू-राबड़ी का कथित 'जंगलराज' नहीं देखा है. 18-25 साल के ये वोटर्स बिहार की कुल जनसंख्या का 16% से भी ज्यादा है. ये सभी 10 साल के रहे होंगे जब नीतीश कुमार ने लालू यादव को सत्ता से बाहर कर दिया था. यही कारण है कि NDA के नेता, नीतीश कुमार और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस 'जंगलराज' और लॉ एंड ऑर्डर से जुड़े मुद्दों की बात कर रहे हैं वो इन वोटर्स पर कोई ख़ास असर डालते नज़र नहीं आ रहे हैं.



    बदलाव चाहते हैं युवा- एकेडमिक्स से जुड़े चंद्रचूड़ सिंह भी इंडियन एक्सप्रेस में इसी बदलाव के बारे में लिखते हैं कि जाति आधारित गोलबंदी ने माध्यम से राजनीतिक दखल कायम करना या फिर राजनीतिक वर्चस्व हासिल करने का युग अब समाप्त होने की कगार पर है. बढ़ती बेरोजगारी और बड़े पैमाने पर शिक्षा के प्रति जागरूक होते और नौकरी तलाशते युवा वोटर्स इस बदलाव के वाहक हैं. आखिरकार बिहार के युवा अब समझने लगे हैं कि बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव की जरूरत है. बिहार में अब तेजस्वी यादव (31), चिराग पासवान (38) और मुकेश सहनी (40) जैसे युवा नेताओं के आगे आने का समय है और बीते 30 सालों से राज कर रहे नीतीश कुमार (69), सुशील मोदी (68) और लालू यादव (72) को इन्होंने कड़ी चुनौती दी है.
    अगली ख़बर

    फोटो

    टॉप स्टोरीज