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जस्टिस गोगोई को CJI नहीं बनाया गया, तो हमारा डर सही साबित होगा: जस्टिस चेलमेश्वर

जस्टिस गोगोई को CJI नहीं बनाया गया, तो हमारा डर सही साबित होगा: जस्टिस चेलमेश्वर

जस्टिस जे. चेलमेश्वर

जस्टिस जे. चेलमेश्वर

जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि उन्हें आशा है कि रंजन गोगोई के अगले सीजेआई बनने में कोई रुकावट नहीं आएगा और यदि ऐसा होता है तो यह साबित हो जाएगा कि 12 जनवरी के प्रेस कान्फ्रेंस में उन्होंने जो कहा था वह सही था.

    जस्टिस जे.चेलमेश्वर ने उम्मीद जताई कि सीनियर जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा के खिलाफ 12 जनवरी को किया गया विवादास्पद प्रेस कान्फ्रेंस जस्टिस रंजन गोगोई के अगले सीजेआई बनने के रास्ते में बाधक नहीं बनेगा.

    लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें आशंका है कि न्यायमूर्ति गोगोई को अगला सीजेआई नहीं बनाया जाएगा. जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि उन्हें आशा है कि ऐसा नहीं होगा और यदि ऐसा होता है तो यह साबित हो जाएगा कि 12 जनवरी के प्रेस कान्फ्रेंस में उन्होंने जो कहा था, वह सही था.

    हालांकि उन्होंने कहा , ‘‘मैं ज्योतिषी नहीं हूं ... मुझे उम्मीद है कि जस्टिस गोगोई को सीजेआई बनाए जाने से इनकार किया किया जाना चाहिए. ’’ जस्टिस चेलमेश्वर ने जस्टिस रंजन गोगोई , जस्टिस मदन बी . लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ के साथ 12 जनवरी को एक प्रेस कान्फ्रेंस की थी.

    'न्यायपालिका में हर सवाल का जवाब महाभियोग नहीं हो सकता'
    जस्टिस जे. चेलमेश्वर ने इसके साथ ही कहा कि महाभियोग हर सवाल या समस्या का जवाब नहीं हो सकता और प्रणाली को दुरुस्त किए जाने की जरूरत है. जस्टिस चेलमेश्वर ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह अपनी सेवानिवृत्ति के बाद सरकार से कोई नियुक्ति नहीं मांगेंगें. उन्होंने कहा, 'मैं यह रिकार्ड में कह रहा हूं कि 22 जून को अपनी सेवानिवृत्ति के बाद मैं सरकार से कोई नियुक्ति नहीं मांगूगा.'

    सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस (सीजेआई) के बाद वह सबसे सीनियर जस्टिस हैं. जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि 12 जनवरी को उन्होंने जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ के साथ जो संवाददाता सम्मेलन किया था, वह रोष और सरोकार का नतीजा था क्योंकि शीर्ष न्यायालय के कामकाज के बारे में उनकी तरफ से उठाए गए मुद्दों पर सीजेआई के साथ उनकी चर्चा का वांछित नतीजा नहीं निकल पाया था.

    लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका विषय पर बात करते हुए जस्टिस चेलमेश्वर ने पीठों के गठन और विभिन्न जस्टिसों को मामलों के आवंटन में सीजेआई की प्राथमिकता पर पूछे गए सवालों का भी जवाब दिया. उन्होंने कहा, 'सीजेआई, मास्टर ऑफ रोस्टर हैं. बेशक, सीजेआई के पास यह ताकत है. सीजेआई के पास पीठें गठित करने की शक्ति है लेकिन संवैधानिक प्रणाली के तहत हर अधिकार के साथ कुछ खास जिम्मेदारियां हैं.'

    यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें लगता है कि पीठों का गठन और मामलों का आवंटन मनमाने तरीके से नहीं किया जाना चाहिए, उन्होंने इसका सकारात्मक जवाब दिया. जस्टिस से बात करते हुए एक वरिष्ठ पत्रकार ने पूछा कि क्या सीजेआई के खिलाफ महाभियोग के लिए पर्याप्त आधार है? इसके जवाब में जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, 'यह सवाल क्यों पूछा गया?' दूसरे दिन कोई मुझ पर महाभियोग के बारे में पूछेगा. मैं नहीं जानता कि यह देश महाभियोग के बारे में इतना अधिक चिंतित क्यों है. हमने ( जस्टिस रंजन गोगोई के साथ) जस्टिस सीएस कर्णन के फैसले में लिखा कि इसके अलावा प्रणाली को सुव्यवस्थित करने के लिए अवश्य ही तंत्र होना चाहिए.' उन्होंने कहा, 'महाभियोग हर सवाल या हर समस्या का हल नहीं हो सकता.'

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    Tags: CJI Deepak Misra

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