भीमा कोरेगांव केस: पुलिस ने वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी पर कहा- 'वे सरकार गिराना चाहते थे'

महाराष्‍ट्र के एडीजी (कानून और व्‍यवस्‍था) परमवीर सिंह ने वामपंथी विचारकों के खिलाफ कार्रवाई को जायज ठहराया है.

News18Hindi
Updated: August 31, 2018, 5:00 PM IST
भीमा कोरेगांव केस: पुलिस ने वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी पर कहा- 'वे सरकार गिराना चाहते थे'
महाराष्‍ट्र पुलिस के एडीजी(कानून और प्रशासन)परमबीर सिंह.
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Updated: August 31, 2018, 5:00 PM IST
महाराष्ट्र पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें हाल ही में वामपंथी विचारकों के घरों पर मारे गए छापे के दौरान 'संदिग्ध साक्ष्य' मिले हैं जो सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए माओवादियों के षडयंत्र की ओर इशारा करते हैं.

सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, अरुण फरेरा, वेरनॉन गोंजाल्विस और पी वरवर राव को भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा के लिए मंगलवार को गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार वामपंथी विचारकों का  का प्रतिबंधित भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (माओवादी) से संबंध है.

महाराष्ट्र पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) परमबीर सिंह ने कहा, "गिरफ्तार किए गए सभी लोग कबीर कला मंच से जुड़े हुए थे. पुलिस ने रोना विल्सन और सुरेंद्र गडलिंग के बीच हुए सुरक्षित संचार को बरामद किया. पुणे पुलिस सुरक्षित संचार के पासवर्ड को तोड़ने में सक्षम थी, जिसमें माओवादियों द्वारा सरकार को गिराने की साजिश का खुलास हुआ. गिरफ्तार एक्टिविस्टों के बीच हुए एक पत्र के आदान-प्रदान में एक और राजीव गांधी जैसी घटना की योजना का जिक्र किया गया था." उन्होंने कहा कि उन्हें सीपीआई माओवादियों के हजारों मेल, पत्र और अन्य दस्तावेज मिले हैं.

मुंबई में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान परमबीर सिंह ने  गिरफ्तार एक्टिविस्टों द्वारा आदान-प्रदान किए गए पत्रों को दिखाया और कहा कि अबतक एकत्र किए गए दस्तावेज स्पष्ट रुप से गिरफ्तार वामपंथी विचारकों का माओवादी संगठनों के साथ लिंक स्थापित करते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह इस बात की जांच करेगा कि भीमा कोरेगांव की हिंसा के संबंध में की गई पांच एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास है.

सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तार पांचों एक्टिविस्टों को राहत देते हुए उन्हें 6 सितंबर को अगली सुनवाई तक उनके घर में नजरबंद करने के लिए कहा है. इसके साथ ही कोर्ट असहमति को लोकतंत्र का सेफ्टी वॉल्व बताया. कोर्ट ने कहा, "असहमति जताने लोकतंत्र के लिए सेफ्टी वॉल्व है. अगर आप इन सेफ्टी वॉल्व को नहीं रहने देंगे तो प्रेशर कुकर फट जाएगा."

वहीं दूसरी तरफ मानवाधिकार कार्यकर्ता वामपंथी विचारकों  की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे हैं. लेखिका अरुंधति रॉय ने गिरफ्तारियों को लेकर बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि 2019 से पहले बीजेपी कुछ आश्चर्यजनक हमले के साथ सबकुछ खत्म करने की कोशिश करेगी. प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोलते हुए रॉय ने लोगों से ध्यान भटकाने वाले मुद्दों पर ध्यान न देने की अपील की.

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