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जब तक हिंदू संगठित एवं सतर्क है, उसे कोई खतरा नहीं: मोहन भागवत

भाषा
Updated: February 18, 2020, 11:26 PM IST
जब तक हिंदू संगठित एवं सतर्क है, उसे कोई खतरा नहीं: मोहन भागवत
भागवत ने 70 स्तंभकारों के साथ हुई एक बैठक में आरएसएस के बारे में फैलायी जा रही गलत धारणा को लेकर चर्चा की.

स्तंभकार के अनुसार संघ प्रमुख मोहन भागवत (RSS Chief Mohan Bhagwat) ने कहा, "हिन्दुओं को जागृत रहना है लेकिन किसी के विरूद्ध नहीं. उन्हें प्रतिक्रियावादी होने की जरूरत नहीं. हम किसी का वर्गीकरण नहीं करते हैं. हम किसी पर संदेह नहीं करते हैं."

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  • Last Updated: February 18, 2020, 11:26 PM IST
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नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने मंगलवार को स्तंभकारों के एक समूह के कहा कि 'खुलापन' हिन्दुओं की विशेषता है और इसे बचाये रखा जाना चाहिए. सूत्रों ने यह जानकारी दी. समझा जाता है कि भागवत ने कहा कि हिन्दू समाज को जागृत होना चाहिए लेकिन किसी के विरूद्ध नहीं होना चाहिए.

भागवत ने दिल्ली (Delhi) के छत्तरपुर इलाकों में देशभर के 70 स्तंभकारों से बंद कमरे में संवाद किया और आरएसएस के बारे में फैलायी जा रही गलत धारणा को लेकर चर्चा की.

'खुलापन हिन्दुओं की विशेषता है'
आरएसएस प्रमुख के साथ बैठक में मौजूद कुछ स्तंभकारों ने इस संवाद को 'सार्थक' बताया जिसमें विविध विषयों पर व्यापक चर्चा हुई. एक स्तंभकार के अनुसार, भागवत ने कहा, "खुलापन हिन्दुओं की विशेषता है और इसे बचाये रखा जाना चाहिए." भागवत ने हिन्दुओं को जागृत एवं सतर्क रहने पर जोर देते हुए कहा कि जब तक हिन्दू संगठित एवं सतर्क है, उसे कोई खतरा नहीं है.



स्तंभकार के अनुसार सरसंघचालक ने कहा, "हिन्दुओं को जागृत रहना है लेकिन किसी के विरूद्ध नहीं. उन्हें प्रतिक्रियावादी होने की जरूरत नहीं. हम किसी का वर्गीकरण नहीं करते हैं. हम किसी पर संदेह नहीं करते हैं."

CAA पर कही ये बात
नागरिकता संशोधन अधिनियम और इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शनों पर भागवत ने कहा कि कोई भी कानून को पसंद या नापसंद कर सकता है, उसे बदलने की भी मांग कर सकता है लेकिन सार्वजनिक सम्पत्ति को जलाया या नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता है . यह लोकतंत्र में सही नहीं है. भागवत ने पूछा, "लेकिन अब हाथों में तिरंगा और संविधान लेकर तथा भारत माता की जय कह रहे हैं, तब कौन बदल रहा है."

गांधी को लेकर भागवत ने कही थी ये बात
इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने सोमवार को कहा था कि महात्मा गांधी को कभी स्वयं के हिंदू होने पर लज्जा नहीं हुई और उन्होंने अनेक बार अपने को कट्टर सनातनी हिंदू बताया था.

भागवत ने यहां महात्मा गांधी के जीवन दर्शन पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन करते हुये कहा, ‘‘गांधी जी ने इस बात को समझा था कि भारत का भाग्य बदलने के लिये पहले भारत को समझना पड़ेगा और इसके लिए वह साल भर भारत में घूमे.’’

भागवत ने कहा, ‘‘इसके लिए उन्होंने (महात्मा गांधी ने) स्वयं को भारत के सामान्य जनों की आशा आकांक्षाओं से, उनकी पीड़ाओं से एकरूप होकर यह सारा विचार किया और इस विचार की दृष्टि का मूल हर भारतीय था इसीलिये उनको (गांधी जी) अपने हिंदू होने की कभी लज्जा नहीं हुयी.’’

'अभी नहीं बना गांधी के सपनों का भारत'
भागवत ने कहा, ‘‘गांधी जी ने कई बार कहा था कि मैं कट्टर सनातनी हिंदू हूं और ये भी कहा कि कट्टर सनातनी हिंदू हूं, इसलिये पूजा पद्धति के भेद को मैं नहीं मानता हूं. इसलिये अपनी श्रृद्धा पर पक्के रहो और दूसरों की श्रृद्धा का सम्मान करो और मिलजुल कर रहो.’’

शिक्षाविद जगमोहन सिंह राजपूत द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘गांधी को समझने का यही समय’’ के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुये भागवत ने कहा कि यह सही है कि गांधी के सपनों का भारत अभी नहीं बन पाया है.

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First published: February 18, 2020, 11:26 PM IST
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