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5 मौके, जब पीएम मोदी ने कानून के पालन, समय की पाबंदी और अनुशासन की पेश की मिसाल

पीएम मोदी का यह व्यवहार इस बात का उदाहरण है कि परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, कानून के प्रति उनकी निष्ठा सर्वोपरि है. (File Photo- PTI)

पीएम मोदी का यह व्यवहार इस बात का उदाहरण है कि परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, कानून के प्रति उनकी निष्ठा सर्वोपरि है. (File Photo- PTI)

पीएम नरेंद्र मोदी के जीवन में अनेकों ऐसे वृत्तांत मिलते हैं जो ये बताते हैं कि वह हमेशा ही कानून और समय को लेकर अनुशासि ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री मोदी गुजरात के अंबाजी से शुक्रवार रात 10 बजने के बाद आबू रोड पहुंचे. पीएम मोदी ने बिना माइक के लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ‘मुझे पहुंचने में देर हो गई. 10 बज गए हैं, मेरी आत्मा कहती है कि मुझे कानून व नियम का पालन करना चाहिए और इसलिए मैं आप सबसे क्षमा मांगता हूं.’ उनका यह व्यवहार इस बात का उदाहरण है कि परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, पीएम मोदी की कानून के प्रति निष्ठा सर्वोपरि है.

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजस्थान में सिरोही जिले के आबू रोड में 30 सितंबर को एक रैली प्रस्तावित थी. इस रैली के लिए विशाल जनसमूह एकत्रित था. अपने दो दिन के गुजरात दौरे पर गए प्रधानमंत्री मोदी को राजस्थान पहुंचने में देरी हो गई. रात में 10 बजे के बाद जब पीएम मोदी रैली में पहुंचे तो कानून का पालन करते हुए उन्होंने माइक से संबोधन नहीं किया और वहां आए लोगों से देरी से आने के लिए माफ़ी मांगी. प्रधानमंत्री ने इसके लिए लोगों से खेद जताते हुए कहा कि उन्हें लाउडस्पीकर संबंधी नियमों का पालन करना होगा.

पीएम मोदी ने रात 10 बजे के बाद माइक से रैली को संबोधित नहीं करके नियमों का पालन किया. ऐसा करके प्रधानमंत्री मोदी ने ये संदेश भी दिया कि नियम-कानून के ऊपर कोई नहीं है. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी ने कानून का पालन किया हो या फिर कानून के पालन को लेकर अपने अनुशासन का परिचय दिया हो. उनके जीवन से अनेकों ऐसे वृत्तांत मिलते हैं जो ये बताते हैं कि पीएम मोदी हमेशा ही कानून के पालन और समय को लेकर अनुशासित रहे हैं.

गुजरात में भी चुनावी रैली को संबोधित करने से किया था मना
गुजरात में नरेंद्र मोदी के सहयात्री रहे पीयूष भाई गांधी एक ऐसी ही घटना का उदाहरण देते हैं. उन्होंने बताया कि गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी को एक रैली को संबोधित करना था. वहां वह 10 बजने से 5 मिनट पहले रैली में पहुंच गए थे, लेकिन उन्होंने रैली को संबोधित नहीं किया. जब उनसे इसका कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जब अनुशासन का पालन करना है तो हर जगह होना चाहिए. ऐसा कहते हुए उन्होंने रैली को संबोधित करने से मना कर दिया.

प्रोटोकॉल को लेकर भी हमेशा सजग रहे पीएम मोदी
पीएम मोदी प्रोटोकॉल को लेकर भी हमेशा सजग रहते हैं और उनके अनुसार ही काम करते हैं. केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल एक ऐसी ही घटना का जिक्र करते हुए बताते हैं कि 2018 में राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव हो रहा था. ऐसा नियम है कि प्रधानमंत्री अगर राज्यसभा के सदस्य होते हैं तो वे पहले से ही सदन में बैठे रहते हैं. लेकिन अगर वे लोकसभा के सदस्य हैं तो चुनाव कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सदन में प्रवेश करेंगे और राज्यसभा के उपसभापति के बारे में अपना उद्बोधन करेंगे.

मेघवाल बताते हैं कि उपसभापति पद पर हरिवंश जी के चुनाव के दौरान पीएम मोदी को राज्यसभा में लाने की उनकी ही जिम्मेदारी थी. जब वे प्रधानमंत्री को लेने के लिए दोपहर में 2-3 बजे के करीब उनके कार्यालय में गए तो पीएम ने चुनाव की प्रक्रिया पूरी हुई या नहीं इसके बारे में पूछा और फिर उन्हें कहा कि प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद ही वे मेघवाल के साथ चलेंगे.

मेघवाल इसके साथ ही बताते हैं कि जब वह पीएम मोदी को लेकर राज्यसभा की लॉबी पार कर ही रहे थे, तभी किसी ने उन्हें सूचना दी कि चुनाव की प्रक्रिया अभी चल ही रही है. तब पीएम मोदी बोले कि वे लॉबी में ही इंतजार करेंगे. इस दौरान मार्शल उनको बैठा देखकर बोला कि साहब आप तो प्रधानमंत्री हैं जा सकते हैं अंदर. इस पर उन्होंने उस मार्शल से सवाल पूछा कि क्या राज्यसभा के चुनाव के दौरान लोक सभा का कोई सदस्य अंदर बैठ सकता है? तो उसने नियमावली देखकर बताया कि पीएम अपवादस्वरूप बैठ सकता है. अगर राज्य सभा के सभापति उन्हें इसकी अनुमति दें तो… इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें नियम नहीं तोड़ना और करीब 20 मिनट तक वहीं बैठे रहे.

समय के भी पाबंद रहे हैं पीएम मोदी
अर्जुन राम मेघवाल आगे कहते हैं कि पीएम मोदी की नियमों के प्रति यह निष्ठा देखकर वे अभिभूत हो गए. नरेंद्र मोदी के एक अन्य सहयात्री कश्यप शुक्ला उनके समय के पाबन्द होने का उदाहरण देते हैं. वे बताते हैं कि वर्ष 1992 में गुजरात प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक चल रही थी. सब बैठक स्थल पर पहुंच चुके थे. जब नरेंद्र मोदी, जो उस समय प्रदेश के महासचिव थे, के भाषण की बारी आई तो सबसे पहले उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से माफ़ी मांगी. वे बताते हैं कि नरेंद्र मोदी ने यह माफ़ी इसलिए मांगी क्योंकि वे कार्यक्रम में तीन मिनट देरी से पहुंचे थे. ये ना सिर्फ उनके सरल स्वभाव बल्कि समय का पाबन्द होना भी दिखाता है.

दूसरों को अनुशासित रखने में पीछे नहीं रहे मोदी
नरेंद्र मोदी का अनुशासन सिर्फ खुद तक ही सीमित नहीं रहता था, बल्कि साथ के लोगों को भी वे सख्ती से अनुशासित करने में पीछे नहीं रहते थे. उनके एक अन्य सहयात्री अशोक राणा बताते हैं कि एक बार अहमदाबाद के भाजपा कार्यालय पर 10 बजे मीटिंग थी, जिसमें नरेंद्र मोदी भी शामिल होने वाले थे. अशोक राणा और कुछ अन्य कार्यकर्ता उस मीटिंग में जाते समय रास्ते में रुककर नाश्ता करने लगे, जिसकी वजह से उन्हें थोड़ा समय लग गया. जब वे कार्यालय पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि नरेंद्र मोदी बाहर ही खड़े हैं. उन सबको आता देखकर मोदी ने राणा से पूछा कि मीटिंग का समय क्या था, जिस पर राणा ने जवाब दिया 10 बजे का… इसके बाद मोदी ने उनसे समय पूछा तो उस समय 10 बजकर 10 मिनट हो गए थे. इस पर मोदी ने राणा और अन्य कार्यकर्ताओं को कहा कि अब आप लोगों को अंदर आने की जरूरत नहीं है, मीटिंग बाकी लोगों के साथ हो जाएगी.

जब वक्त की पाबंदी के चलते तुरंत खत्म कर दी मीटिंग
ऐसा ही समय के पाबंद होने का एक अन्य उदाहरण उनके एक और सहयात्री विजय कालिया बताते हैं. जब मोदी हरियाणा बीजेपी के प्रभारी थे, तब पंचकुला में चुने हुए 25 लोगों की मीटिंग बुलाई थी. इस मीटिंग में पहले 10 लोग पहुंचे, कुछ देर बाद 10 और लोग पहुंचे और बाकी 5 लोग एकदम अंत में मीटिंग में शामिल हुए. बार-बार आग्रह करने के बाद भी मोदी ने मीटिंग में पहले क्या बातचीत हो चुकी है इस बारे में कोई बात नहीं की. इसके बाद उन्होंने वो मीटिंग तुरंत ख़त्म कर दी और वहां से बाहर निकलने लगे. लोगों के पूछने पर उन्होंने बताया कि उनकी 9 बजे से एक और मीटिंग है और अगर वे अभी निकलते हैं तो समय से 5 मिनट पहले पहुंच जाएंगे.

ये कुछ ऐसे उदाहरण हैं जो ये दर्शाते हैं कि नरेंद्र मोदी के जीवन में अनुशासन बहुत महत्व रखता है. नियमों के पालन के साथ ही समय का पाबन्द होना भी उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है.

Tags: Pm narendra modi, PM Narendra Modi Rally

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