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महत्त्वाकांक्षी ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर को गुजरात उप-चुनाव में इस वजह से मिली करारी शिकस्त

News18Hindi
Updated: October 24, 2019, 7:22 PM IST
महत्त्वाकांक्षी ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर को गुजरात उप-चुनाव में इस वजह से मिली करारी शिकस्त
कांग्रेस से बीजेपी में गए अल्पेश ठाकोर को राधनपुर विधानसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा है (फाइल फोटो)

गुजरात (Gujarat) में छः सीटों पर हुए विधानसभा उप-चुनावों (State Assembly Bypolls) में कांग्रेस (Congress) और बीजेपी (BJP) दोनों को ही तीन-तीन सीटों पर जीत मिली हैं.

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  • Last Updated: October 24, 2019, 7:22 PM IST
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विजयसिंह परमार

अहमदाबाद. दिवाली से पहले गुरूवार का दिन गुजरात कांग्रेस (Gujarat Congress) के लिए खुशियों भरा रहा. राज्य में हुए छः सीटों के लिए उपचुनावों (Bypolls) का परिणाम आज आया जिसमें उसे तीन सीटों पर विजय मिली है. जीती गई सीटों में राधनपुर  का सीट भी शामिल है जहां कांग्रेस छोड़कर बीजेपी (BJP) में शामिल हुए अल्पेश ठाकोर ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था.

गुजरात (Gujarat) में जिन सीटों पर कांग्रेस (Congress) को विजय मिली है उनमें राधनपुर (Radhanpur), बयाद और थराद शामिल हैं. बीजेपी को अमरैवाडी, लुनावाडा और खेरालु उपचुनावों में जीत मिली है.

राधनपुर सीट पर लगी थी लोगों की नज़र

राज्य में कांग्रेस (Congress) के नेताओं के चहरे पर उस समय खुशियां स्पष्ट देखी जा सकती थी जब यह स्पष्ट हो गया कि अल्पेश ठाकोर चुनाव हार जाएंगे. शुरू से ही ठाकोर पीछे चल रहे थे और वे अंत तक कभी भी लीड नहीं ले पाए.

यद्यपि सभी छः सीटों के बारे में रुझान आ रहे थे पर सबकी आंखें राधनपुर सीट पर ही लगी हुई थी जहां से अल्पेश (Alpesh) चुनाव लड़ रहे थे.

ज्यों ही यह स्पष्ट हो गया कि ठाकोर कांग्रेस (Congress) के उम्मीदवार रघु देसाई से चुनाव हार गए हैं, गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष अमित चावडा अपने ऑफिस से निकलकर बाहर आए और उन्होंने मीडियाकर्मियों से बात की.
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“लोगों ने दलबदलुओं को सबक सिखा दिया है और कांग्रेस में अपना विश्वास व्यक्त किया है. लोगों पर मुद्रास्फीति, बेरोजगारी ( जैसे मुद्दों से परेशान हैं और उपचुनाव के नतीजे इन्हीं मुद्दों पर लोगों की नाराजगी का परिणाम है,” चावडा ने कहा.

अल्पेश बोले, 'जातिगत राजनीतिक के कारण हारा'
ओबीसी नेता और कांग्रेस के पूर्व विधायक अल्पेश ठाकोर (Alpesh Thakor) और धवलसिंह जाला ने 2019 आम चुनाव से पहले पार्टी छोड़ दी और वे भाजपा में शामिल हो गए. इन दोनों ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था पर इन दोनों को कांग्रेस उम्मीदवारों के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा.

“मैं जातिगत राजनीति के कारण हार गया हूं लेकिन राधनपुर के लोगों के लिए मैं काम करता रहूंगा,” अल्पेश ठाकोर ने हार स्वीकार करने के बाद मीडिया से बात करते हुए यह बात कही.

राधनपुर और बायद में उप चुनाव इसलिए कराने पड़े क्योंकि इन क्षेत्रों से विधायक रहे अल्पेश ठाकोर (Alpesh Thakor) और धवलसिंह जाला कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे. खेरालु, अमरैवादी, थराड और लुनावाडा सीटों पर उप चुनाव इसलिए हुए क्योंकि बीजेपी ने इन क्षेत्रों से विधायक रहे सभी लोगों को संसदीय चुनावों का टिकट दिया था और वे सब के सब चुनाव जीतकर संसद पहुंचे.

दिलचस्प बात यह है कि अल्पेश ठाकोर (Alpesh Thakor) और धवलसिंह जाला ने कांग्रेस छोड़ने से पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए थे और वे बीजेपी टिकट पर चुनाव जीतने के प्रति आश्वस्त थे.

अल्पेश ठाकोर: जितना जल्दी उभरे उतना ही जल्दी अस्त भी हुए
गुजरात (Gujarat) के चुनावी दंगल में अल्पेश ठाकोर जितना जल्दी ऊपर आये उतना ही जल्दी वे नीचे गिरे हैं.

अल्पेश ठाकोर (Alpesh Thakor) उत्तर गुजरात के ठाकोर समुदाय से आते हैं और वे ओबीसी के उभरते हुए नेता हैं. वे पाटीदारों के लिए शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण की मांग के समर्थन में हार्दिक पटेल के नेतृत्व में शुरू किये गए आन्दोलन के दौरान आरक्षण का समर्थन करने वाले नेता के रूप में उभरे थे.

43-वर्षीय ठाकोर कांग्रेस में आने से पहले नशामुक्ति, तम्बाकू के खिलाफ आन्दोलन चलाया था और अपने समुदाय के लोगों से उन्होंने नशाखोरी छोड़ने का आह्वान किया था. वे बीजेपी-विरोधी युवा नेता के रूप में उभरे थे. 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले वे कांग्रेस (Congress) में शामिल हुए थे और राधनपुर सीट (Radhanpur Seat) से चुनाव जीते थे.

राहुल गांधी ने कभी बनाया था बिहार का पर्यवेक्षक
जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्हें बिहार का पर्यवेक्षक (Observer) बनाया तो उनकी प्रतिष्ठा और बढ़ी. हालांकि, जल्दी ही वे कांग्रेस के विरोध में खड़े हो गए और लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) से पहले अपने समर्थकों के साथ बीजेपी में शामिल हो गए.

कांग्रेस छोड़ते हुए अल्पेश (Alpesh Thakor) ने अपना त्यागपत्र अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर डाल दिया जिसमें उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं पर अनाप-शनाप आरोप लगाए थे. ठाकोर ने कहा था क कांग्रेस नेताओं ने ठाकोर समुदाय के सदस्यों को ‘नजरअंदाज’ किया है. उन्होंने कहा, “देश की इस सबसे पुरानी पार्टी ने ठाकोरों को ठगा है”.

यह जानना दिलचस्प यह है कि अल्पेश ठाकोर (Alpesh Thakor) ने अक्टूबर 2018 में बीजेपी पर गुजरात में प्रवासियों के खिलाफ दंगे भड़काने का आरोप लगाया था. 14 साल की एक लड़की से बलात्कार होने के बाद राज्य में उत्तर प्रदेश (UP) और बिहार (Bihar) से आये प्रवासियों पर हमले होने लगे. अल्पेश ठाकोर की ठाकोर सेना पर प्रवासियों पर हुए इन हमलों के आरोप लगे थे.

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First published: October 24, 2019, 7:22 PM IST
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