धरती बचाने में जुटे ये लोग, आपके कचरे का रख रहे हैं खयाल

धरती बचाने में जुटे ये लोग, आपके कचरे का रख रहे हैं खयाल

भारत में सालाना 62 मिलियन टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से 60% से कम एकत्र होता है और सिर्फ 15% रिसाइकिल हो पाता है.

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    पुणे में पिछले दिसंबर में हुए एनएच 7 संगीत उत्सव में आने वाले लोग ये देखकर आश्चर्यचकित रह गए, जब उन्हें पता लगा कि अगर वह अपने उपयोग किए हुए कप का दोबारा इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें बार में छूट मिलेगी. यहां पर फूड कोर्ट के बाहर पीईटी बोतलों और बायोडिग्रेडेबल प्लेट के लिए डिस्पेंसर लगाए गए थे. यहां पर खाना खाने वालों को रिसाइकिल होने वाले खाने को खुद से अलग-अलग करके रखने के लिए कहा गया था.

    मुंबई स्थित स्क्रैप की संस्थापक दिव्या रविचंद्रन ने बताया कि लोगों के इस सराहनीय कदम से 12 हजार प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग कम हुआ. उन्होंने बताया कि संगीत कार्यक्रम कराने वाले आयोजकों की इस शानदार पहल से यहां से निकले 11 टन कचरे में से 86 प्रतिशत कचरे को रिसाइकिल किया जा सका.
    भारत में सालाना 62 मिलियन टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से 60% से कम एकत्र होता है और सिर्फ 15% रिसाइकिल हो पाता है. स्क्रैप संस्था देश में तेजी से बढ़ रही इस समस्या पर रोक लगाने का एक प्रयास कर रही है. शादियों और जन्मदिन की पार्टियों से लेकर क्रिकेट मैच तक में ये सामाजिक संस्था भागीदारी कर यहां के कचरे को सही तरीके से रिसाइकिल करने में मदद कर रही है. संस्था पिछले काफी समय से लैंडफिल से कचरे को हटाने के लिए नए तरीके खोज रही है.

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    संस्था अब इस सामाजिक लड़ाई को घर-घर तक ले जाने में जुटी हुई है. बेंगलुरु में, हसीरू डाला इनोवेशंस संस्था 280 अपार्टमेंट के 32 हजार से अधिक घरों के साथ काम करती है ताकि वहां रहने वाले लोगों को इस बात को लेकर प्रशिक्षित किया जा सके कि वह स्क्रैप को अलग-अलग हिस्से में बांटें. संस्था के सह-संस्थापक शेखर प्रभाकर का कहना है कि यहां रहने वाले लोगों को बताया जाता है कि अलग-अलग कूड़ा कहां जा रहा है और इसे कैसे रिसाइकिल किया जाता है. "बहुत से लोग कूड़े को एक साथ निकालते हैं क्योंकि उन्हें इस बात का पता नहीं होता कि इसे रिसाइकिल भी किया जा सकता है. "हम गीले, सूखे और कचरे को अलग करने के लिए अलग-अलग तरीका अपनाते हैं हैं."

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    हसीरू डाला ने कहा कि पिछले साल हमने शादियों, जन्मदिन की पार्टियों और आईपीएल मैचों से लेकर
    मैसूर में एक धार्मिक महोत्सव में 100 प्रतिशत जीरो-कचरा कार्यक्रम आयोजित किया. शंकर बताते हैं कि जब तक कार्यक्रम को आयोजित करने वाला कूड़ों को अलग-अलग करने की व्यवस्था नहीं करेगा तब तक कोई फायदा नहीं होगा. कार्यक्रम से निकलने वाले कूड़े को अलग नहीं करने के कारण लैंडफिल और नदियां प्रदूषित होती हैं.

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