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Thich Nhat Hanh Demise: शांति दूत और महान बौद्ध संत थिच न्हात हान के निधन पर राहुल गांधी ने शोक जताया

Thich Nhat Hanh Demise: शांति दूत और महान बौद्ध संत थिच न्हात हान के निधन पर राहुल गांधी ने शोक जताया

1926 में गुयेन जुआन बाओ के रूप में जन्में हान 16 साल की उम्र में ही भिक्षु बन गए थे. (फोटो: AP)

1926 में गुयेन जुआन बाओ के रूप में जन्में हान 16 साल की उम्र में ही भिक्षु बन गए थे. (फोटो: AP)

Thich Nhat Hanh Demise: कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने बौद्ध संत गुरु और माइंडफुलनेस के पिता के रूप में प्रसिद्ध थिच न्हात हान (Thich Nhat Hanh) के निधन पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दुख जताया है. राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा है कि माइंडफुलनेस के पिता थिच न्हात हान के अनुयायियों के प्रति मेरी संवेदना है. शांति, अहिंसा और कृतज्ञता उनके उदार संदेश हमेशा इस दुनिया में गूंजते रहेंगे.

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नई दिल्ली. कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने बौद्ध संत गुरु और माइंडफुलनेस के पिता के रूप में प्रसिद्ध थिच न्हात हान (Thich Nhat Hanh) के निधन पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दुख जताया है. राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा है कि माइंडफुलनेस के पिता थिच न्हात हान के अनुयायियों के प्रति मेरी संवेदना है. शांति, अहिंसा और कृतज्ञता उनके उदार संदेश हमेशा इस दुनिया में गूंजते रहेंगे. थिच न्हात हान का शनिवार को वियतनाम के तू हियू मंदिर में निधन हो गया. वे 95 साल के थे. थिच न्हात ने माइंडफुलनेस तकनीक के माध्यम से लोगों को शांत और अहिंसा के रास्ते पर लाने के लिए जीवनभर प्रयासरत रहे. वे 1960 तब चर्चा में आए थे जब वे वियतनाम युद्ध के विरोध के प्रतीक बन गए थे. माइंडफुलनेस तकनीक में शरीर और आत्मा के मिलन से शांति और नकारात्मकता को भगाने का गुर सिखाया जाता है.

मार्टिन लुथर किंग की बेटी ने उन्हें याद किया
थिच न्हात हान महान कवि, लेखक और संत थे. वियतनाम युद्ध के दौरान न्हात अमेरिकी नागरिक अधिकार के महान नेता मार्टिन लूथर किंग से मुलाकात की और वियतनाम युद्ध के खिलाफ बोलने के लिए राजी किया. मार्टिन लूथर ने शांति और अहिंसा के लिए निरंत काम का जिक्र करते हुए न्हात को नोबल पुरस्कार देने की भी सिफारिश की थी. न्हात के निधन की खबर सुनते ही मार्टिन लुथर किंग के बेटी बर्निश किंग ने ट्विटर पर अपने पिता और न्हात की फोटो शेयर की है और कहा है कि मेरे पिता के दोस्त थिच न्हात का निधन हो गया है. थिच न्हात के जीवन और विश्व शांति पर उनके प्रभाव का मैं सम्मान करती हूं.

पूरा जीवन शांति दूत के रूप में समर्पित
हान का जन्म 1926 में हुआ था. उनके बचपन का नाम जुआन बाओ था. 16 साल की उम्र में संत बन गए थे. उन्होंने जीवनभर शांति के लिए काम किया. वे बचपन से ही मेधावी थे और कई भाषाओं पर उनकी पकड़ थी. कुछ समय के लिए प्रिंसटन और कोलंबिया विश्वविद्यालयों में भी तुलनात्मक धर्म के बारे में पढ़ाया. 1963 में अमेरिका-वियतनाम युद्ध के दौरान वे वियतनाम लौट आए और युद्ध को रोकने और शांति स्थापना के लिए ऑर्डर ऑफ इंटर-बींग की स्थापना की. इसके बाद उन्हें वियतनाम से निर्वासित कर दिया गया. बाद में वे बहुत समय तक फ्रांस में रहे जहां से उनके लाखों अनुयायी बने.

Tags: Rahul gandhi

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