कोविड की तीसरी लहर से निपटने के लिए बना 'फुलप्रूफ प्लान', विशेषज्ञ बोले- दूसरे राज्य भी कर सकते हैं इस पर अमल

बच्चों पर हो सकता है कोविड की तीसरी लहर का असर . (AP Photo/Channi Anand)

कोरोना की तीसरी लहर की रोकथाम और प्रबंधन के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति ने बच्चों पर होने वाले आशंकित असर को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है. इसमें बच्चों को कोविड से बचाने के उपाय बताए गए हैं.

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    बेंगलुरु. देश में कोविड की तीसरी लहर (Coronavirus In India) की आशंका जाहिर की जा रही है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने भी 6-8 हफ्तों में कोविड की तीसरी लहर की आशंका जाहिर की है. आशंका इस बात की भी है कि तीसरी लहर में बच्चों पर ज्यादा असर पड़ेगा. इस बीच राज्यों ने तैयारी शुरू कर दी है. सरकारों का मानना है कि बिना फुलप्रूफ तैयारी के कोविड की तीसरी लहर का मुकाबला नहीं हो सकता है.

    कर्नाटक ने प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ देवी शेट्टी की अध्यक्षता में 16 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है. 'कोविड वेव -3 की रोकथाम और प्रबंधन के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति' बच्चों पर होने वाले आशंकित असर को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है. इसमें बच्चों को कोविड से बचाने के उपाय बताए गए हैं. अंतरिम रिपोर्ट कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के सामने पेश की गई और इसमें ऐसे उपाय शामिल हैं, जिनका अन्य राज्य भी इस्तेमाल है. डॉ शेट्टी देश भर में ऑक्सीजन की आपूर्ति आवंटित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित 12 सदस्यीय राष्ट्रीय टास्क फोर्स का भी हिस्सा हैं.

    3.4 लाख बच्चे तीसरी लहर से प्रभावित होंगे
    समिति ने अनुमान लगाया कि कर्नाटक में लगभग 3.4 लाख बच्चे तीसरी लहर से प्रभावित होंगे. 91 पेज की रिपोर्ट में बच्चों के लिए कोविड प्रबंधन की चुनौतियों के बारे में बताया गया है और संक्रमण के प्रभाव को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों का सुझाव दिया गया है.



    पैनल ने नवजात आईसीयू, पेडियाट्रिक वार्ड बेड, मेडिकल कॉलेज्स, तालुक और जिला स्तर के अस्पतालों में PICU बेड बढ़ाने का सुझाव दिया है.  रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ बच्चों के लिए राज्य भर में कुल 27,000 बेड्स की जरूरत है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मेडिकल फील्ड में मैनफोर्स की भारी कमी है और डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की जल्द से जल्द भर्ती की जानी है. मौजूदा एचडीयू को बाल चिकित्सा आईसीयू में अपग्रेड करना है.

    समिति ने राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिस्तरों की संख्या की आवश्यकता के बारे में स्पष्ट रूप से जानकारी दी है. पिछड़े जिलों कोप्पला, कोलार, चित्रदुर्ग, यादगीर, चामराजनगर और हावेरी में 250 बिस्तरों और कम से कम 20 PICU/NICU वाले खास अस्पताल बहुत  जरूरी हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये सेट अप जिला अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों में स्थापित किए जा सकते हैं.


    समिति ने हॉस्पिटल कैंपस में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और आवश्यक कर्मचारियों के साथ अस्थायी स्टैबलाइजेशन यूनिट्स बनाने की सिफारिश की है. रिपोर्ट में बताया गया है कि तीसरी लहर के प्रबंधन के लिए मौजूदा लोगों के साथ-साथ कम से कम 3,000 बाल रोग विशेषज्ञों की जरूरत पड़ने की उम्मीद है.

    पैनल ने राज्य की चरणबद्ध तरीके से अनलॉक करने की रणनीति पर सहमति जताई है. रिपोर्ट में स्कूलों को फिर से खोलने का सुझाव दिया गया है क्योंकि देरी से बच्चे कुपोषण, बाल तस्करी  में फंस सकते हैं. साथ ही स्कूल जाने वाले सभी बच्चों को 2 लाख रुपये तक का कोविड-19 स्वास्थ्य बीमा प्रदान करने की सलाह दी गई है.

    सीएम येदियुरप्पा ने क्या कहा?
    उधर रिपोर्ट पर सीएम बीएस येदियुरप्पा ने कहा, ‘हमने कोविड की तीसरी लहर को लेकर व्यापक चर्चा की है. कहा जा रहा है कि तीसरी लहर के दौरान बड़ी संख्या में बच्चे संक्रमित हो सकते हैं और इसके मद्देनजर समिति ने कुछ सिफारिश की हैं.’

    मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति ने तालुक और जिला अस्पतालों तथा मेडिकल कॉलेजों में बच्चों के उपचार के लिए उच्च निर्भरता इकाई (एचडीयू) और गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) स्थापित करने तथा बाल रोग उपचार अस्पताल स्थापित करने की सिफारिश की है. उन्होंने कहा कि समिति ने मानव और वित्तीय संसाधनों की सुरक्षा तथा तीसरी लहर को रोकने के लिए विशेषज्ञों की मदद लेने पर केंद्रित सिफारिश की हैं. समिति ने अन्य सिफारिशें भी की हैं.

    वहीं, डॉक्टर शेट्टी ने कहा, ‘यह अंतरिम रिपोर्ट है, अंतिम रिपोर्ट नहीं...हमने कोविड को लेकर हर पहलू को देखा है. यह (स्कूलों को खोलना) एक कठिन निर्णय होगा.’ उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न इकाइयों तथा विशेषज्ञों से विमर्श करेगी और तब कोई निर्णय करेगी.

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