कश्मीर: इस 3 फीट के आतंकी के मंसूबे थे काफी बड़े

जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर नूर मोहम्मद तांत्रे को सुरक्षाबलों ने मार गिराया
जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर नूर मोहम्मद तांत्रे को सुरक्षाबलों ने मार गिराया

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर नूर मोहम्मद तांत्रे को मार गिराया गया. महज 3 फीट 8 इंच कद का यह आतंकी कद में भले ही छोटा था, लेकिन इसके नापाक मंसूबे काफी बड़े और पिछले कुछ दिनों से इसने सुरक्षाबलों की नाक में दम कर रखा था. उसकी मौत को कश्मीर घाटी में सक्रीय आतंकियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 27, 2017, 2:57 PM IST
  • Share this:
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर नूर मोहम्मद तांत्रे को मार गिराया गया. महज 3 फीट 8 इंच कद का यह आतंकी कद में भले ही छोटा था, लेकिन इसके नापाक मंसूबे काफी बड़े और पिछले कुछ दिनों से इसने सुरक्षाबलों की नाक में दम कर रखा था. उसकी मौत को कश्मीर घाटी में सक्रीय आतंकियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

दर्जी की दुकान से आतंक की राह पर निकला
पुलवामा के किसान परिवार में 1972 में जन्मा नूर मोहमद तांत्रे मैट्रिक तक ही पढ़ सका. घर की गरीबी के कारण उसने पढ़ाई छोड़कर टेलरिंग का काम सीखा और 80 हज़ार का कर्ज लेकर अपने गांव में एक दुकान खोली. यहीं उसकी मुलाकात तारिक नाम के शख्स से हुई, जिसने उसे जल्दी पैसा कमाने का रास्ता बताया और वो रास्ता था 'कश्मीर की आज़ादी के लिए जेहाद'...

खुफिया विभाग से जुड़े सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, नूर मोहम्मद उर्फ पीर बाबा मोटी रकम के लालच में तैयार हो गया और ट्रेनिंग लेने के लिए पहली बार सरहद पार टेरर कैंप गया. वहां से लौटने पर अप्रैल-मई 1999 में तारिक उसे अनंतनाग के कोकड़नाग ले गया, जहां उसने जैश-ए-मोहम्मद का जिला कमांडर शाहिद नाम के शख्स से मिलवाया. शाहिद ने उसे एक चिट्ठी दी जो उसे पुंछ इलाके के जिला कमांडर उमर को देनी थी. ये बस उसका टेस्ट था कि जिसमें वह पास भी हो गया.
काबूल के टेरर कैंपों में भी ली थी ट्रेनिंग


सूत्रों ने बताया कि इसके बाद उसकी मुलाकात मोहम्मद असलम गुर्जर से हुई, जिसने उसे सीमा पार कराकर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पहुंचा दिया. इसके बाद अगस्त 1999 में वह मियांवाली बॉर्डर से काबुल गया, जहां उसने महीने भर कई आतंकी कैंपो में ट्रेनिंग ली. इस दौरान उसने हथियार चलाने, IED उड़ाने के लिए वायरलेस सेटों का इस्तेमाल, रिमोट से चलने वाली डिवाइस कंट्रोल करने के तरीके सिखा.

दिल्ली में भी बड़े हमले का था मंसूबा
इसके बाद नवंबर 1999 में वह कश्मीर वापस आ गया, जहां जैश ने उसे पुंछ में संगठन के लिए नए गुर्गे जुटाने का जिम्मा सौंपा. पुंछ में मिली सफलता के बाद उसने दिल्ली का रुख किया, जहां उसका मकसद दिल्ली में भी आतंकियों की एक फौज खड़ी करनी थी. इसके लिए उसे हवाला के जरिये किश्तों में 1 करोड़ रुपये भी मिले. फिर उसे जम्मू कश्मीर से दिल्ली आने वाले ट्रकों के जरिये एके 47 जैसे हथियार भी मिलने लगे. जुलाई 2003 में दिल्ली के आजादपुर के पास इन आतंकियों की लगातार मीटिंग होती थी. इसी दौरान दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को आतंकियों का एक इनपुट मिला, जिसके बाद सदर बाजार इलाके से नूर मोहम्मद को उसके दो साथियों के साथ धर दबोचा गया. सुरक्षाबलों के मुताबिक, तांत्रे ने पूछताछ में खुद अपने ये गुनाह कबूल भी किए थे.

दिल्ली पुलिस के तत्कालीन डीसीपी स्पेशल सेल अशोक चांद ने बताया कि तांत्रे उस वक्त दिल्ली में एक बहुत बड़ा हमला करने की फिराक में था. उसके पास से हथियारों की भारी खेप मिली थी, जिसमें हैंड ग्रेनेड, लॉन्चर, सेल जैसे हथियार शामिल थे.

तिहाड़ में काटी थी 8 साल की सज़ा
स्पेशल सेल की गहन पूछताछ के बाद तांत्रे के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई और उसे तिहाड़ में तकरीबन 8 साल सज़ा काटनी पड़ी. कुछ साल पहले ही वह तिहाड़ से बाहर निकला, वहां से वह सीधा जम्मू कश्मीर गया. हालांकि वहां भी पुलिस ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया, लेकिन तांत्रे पैरोल जंप कर फरार हो गया और वहां जैश ए मोहम्मद का कमांडर बन गया. हालांकि सोमवार को मिली खुफिया इनपुट के बाद सुरक्षाबलों ने उसका खात्मा कर दिया.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज