दिवाली पर जवानों से जहां PM Narendra Modi बात कर रहे हैं उसका Pak और मेजर चांदपुरी से यह है नाता

पीएम नरेन्द्र मोदी दिवाली के मौके पर आज लोंगेवाला में जवानों को संबोधित कर रहे हैं.
पीएम नरेन्द्र मोदी दिवाली के मौके पर आज लोंगेवाला में जवानों को संबोधित कर रहे हैं.

1971 की लड़ाई में मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी (Majer kuldeep singh chandpuri) सिर्फ 120 जवानों के साथ लोंगेवाला पोस्ट (Longewala Post) की हिफाज़त में डटे हुए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 14, 2020, 12:38 PM IST
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नई दिल्ली. भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) बॉर्डर से लगी किसी और पोस्ट का नाम देशवासी भले ही नहीं जानते हों, लेकिन लोंगेवाला पोस्ट (Longewala Post) का नाम हर किसी की ज़बान पर रहता है. यही वो पोस्ट है जहां आज पीएम नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) भारतीय सेना (Indian Army) और बीएसएफ के जवानों संग दिवाली मनाने गए हैं. सनी देयोल की बॉर्डर मूवी में भी आप इस पोस्ट का नाम सुन चुके हैं. इसी पोस्ट पर पाकिस्तानी सैनिक (Pak Army) अपने अजेय समझे जाने वाले पैटर्न टैंक छोड़कर भागने को मजबूर हुए थे.

1971 में लोंगेवाला पर पीठ दिखाकर भागे थे पाकिस्तानी

दिसम्बर, 1971 में भारत और पाक के बीच लड़ाई लड़ी गई थी. लड़ाई जब खत्म होने जा रही थी तो धोखे से पाकिस्तान ने लोंगेवाला पोस्ट पर अपनी टैंक रेजीमेंट भारत की ओर बढ़ा दी. जिसे देखते हुए मेजर चांदपुरी अपनी 120 जवानों की टुकड़ी के साथ लोंगेवाला की हिफाज़त के लिए पहुंच गए. सामान्य दिनों में बीएसएफ लोंगेवाला पर तैनात रहती है. इसी पोस्ट पर भारतीय सेना के सिर्फ 120 जवानों ने पाकिस्तान की पैटर्न टैंक रेजीमेंट को पीछे भागने पर मजबूर कर दिया था. खास बात यह है कि बॉर्डर मूवी में इस सीन को पूरे देश ने बड़े पर्दे पर देखते हुए फख्र महसूस किया था. बाद में साल 2018 में मेजर से बिग्रेडियर की रैंक तक पहुंचे मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी का निधन हो गया.



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लोंगेवाला पर पाकिस्तान की हुई थी शर्मनाक हार

लोंगेवाला के युद्ध में पाकिस्तान को बहुत शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था. पाकिस्तान के 34 टैंक तबाह हो गए थे. 500 के करीब जवान घायल हुए थे. वहीं 200 जवानों को जिंदगी से हाथ धोना पड़ा था. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यह पहला मौका था जब युद्ध में किसी सेना के इतनी बड़ी संख्या में टैंक तबाह हुए हों. इस युद्ध में पाकिस्तान की काफी फजीहत हुई थी. भारतीय जमीन पर पाकिस्तान के कब्जे का मंसूबा नाकाम ही नहीं हुआ बल्कि उल्टे भारतीय सेना पाकिस्तान के 8 किलोमीटर अंदर तक घुसकर पाकिस्तियों को खदेड़ कर आई थी. यह लड़ाई 16 दिसम्बर, 1971 की लड़ाई से ही जुड़ी हुई थी.
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