सोशल मीडिया पर न्यायाधीशों को लेकर टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं : कानून मंत्री

सोशल मीडिया पर न्यायाधीशों को लेकर टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं : कानून मंत्री
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक लेख में चिंता जाहिर की है. (फाइल फोटो)

एक अंग्रेजी अखबार में लिखे गए अपने लेख में रविशंकर प्रसाद (Law Minister Ravi Shankar Prasad) ने आरोप लगाने के इस नकारात्मक चलन पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने लिखा है कि न्यायाधीशों को लेकर की गईं ये व्यक्तिगत टिप्णियां बर्दाश्त के काबिल नहीं हैं.

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  • Last Updated: September 10, 2020, 4:36 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद (Law Minister Ravi Shankar Prasad) ने सोशल मीडिया (social media) पर न्यायाधीशों (Judges) को लेकर की जा रही व्यक्तिगत टिप्पणियों (Personal Comments) पर चिंता जाहिर की है. एक अंग्रेजी अखबार में लिखे गए अपने लेख में रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाने के इस नकारात्मक चलन (negative trend) पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने लिखा है कि न्यायाधीशों को लेकर की गईं ये व्यक्तिगत टिप्णियां बर्दाश्त के काबिल नहीं हैं.

न्यायपालिका की आजादी पर सबसे बड़ा धक्का
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस द्वारा चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के खिलाफ महाभियोग लाने के प्रयासों की तरफ भी ध्यान आकर्षित किया है. उन्होंने कांग्रेस के इस प्रयास को न्यायपालिका की आजादी (independence of judiciary) पर सबसे बड़ा धक्का बताया है.

नकारात्मक प्रचार करना कहां तक सही?
उन्होंने लिखा है-जनहित याचिकाएं दायर करना और फिर सोशल मीडिया कैंपेन चलाना. और अगर पक्ष में निर्णय न आए तो फिर नकारात्मक प्रचार करना कहां तक सही है. उन्होंने लिखा है कि माई वे ऑर हाईवे का तरीका इस वक्त न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है.



पीएम मोदी समेत सीनियर बीजेपी नेताओं ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी
रविशंकर प्रसाद ने लिखा है कि पीएम मोदी समेत सीनियर बीजेपी नेताओं ने इमरजेंसी के दौरान न्यायपालिका की स्वतंत्रता की लड़ाई के लिए काफी कुछ सहा है. इस वजह से न्यायपालिका को लेकर लगातार बढ़ते हमले चिंताजनक स्थितियां पैदा कर रहे हैं.

सीनियर वकील प्रशांत भूषण को अवमानना के मामले में किया गया फाइन
गौरतलब है कि कानून मंत्री का ये लेख सीनियर वकील प्रशांत भूषण (senior advocate Prashant Bhushan) को अवमानना के मामले (guilty of Contempt of Court) में एक रुपये के फाइन की सजा सुनाए जाने के एक सप्ताह के भीतर ही आया है. कानून मंत्री न्यायपालिका पर हो रहे लगातार हमलों को बेहद चिंताजनक बताया है.
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