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कल्याण सिंह के मना करने पर इस मंत्री ने अयोध्या भूमि अधिग्रहण फाइल पर किए थे हस्ताक्षर, उस रात हुआ था ऐसा

News18Hindi
Updated: November 12, 2019, 12:43 AM IST
कल्याण सिंह के मना करने पर इस मंत्री ने अयोध्या भूमि अधिग्रहण फाइल पर किए थे हस्ताक्षर, उस रात हुआ था ऐसा
उत्तरप्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री केदार सिंह फोनिया ने दिया था फाइल पर हस्ताक्षर का प्रस्ताव (फाइल फोटो)

अयोध्या भूमि अधिग्रहण फाइल (Ayodhya Land Acquisition File) पर हस्ताक्षर हो जाने के करीब दो महीने बाद 6 दिसंबर को कारसेवकों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद (Babri Mosque) को ढहा दिया था.

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  • Last Updated: November 12, 2019, 12:43 AM IST
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(अनुपम त्रिवेदी)

देहरादून. देहरादून (Dehradun) में अपने घर पर बैठे हुए अस्सी साल के केदार सिंह फोनिया (Kedar Singh Fonia) बड़े ध्यान से अयोध्या की विवादित जमीन की हर छोटी से छोटी जानकारी अखबारों में ढूंढ़ते हैं. फोनिया 1992 में उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह (Kalyan Singh) सरकार में एक मंत्री थे, जब बाबरी मस्जिद को ढहाया गया था.

अयोध्या में इस विवादित भूमि के अधिग्रहण की फाइल (Ayodhya Land Acquisition File) को फाइनल करने में फोनिया एक महत्वपूर्ण शख्स थे.

फोनिया ने पर्यटन मंत्री रहते हुए भी कर दिए भूमि अधिग्रहण फाइल पर हस्ताक्षर

फोनिया उत्तर प्रदेश में राम मंदिर आंदोलन के चरम पर होने के दौरान अयोध्या में हुई घटनाओं को याद करते हुए बताते हैं, वह 20 अक्टूबर, 1992 की देर रात थी जब मुख्यमंत्री के ऑफिस (CM Office) से  फोन आया और मुझे एक आकस्मिक बैठक में बुला लिया गया. मैं चिंतित था कि इतनी रात गए कोई मीटिंग क्यों बुलाई गई है."

फोनिया आगे याद करते हैं, ''मीटिंग के दौरान कल्याण सिंह ने पूछा कि अयोध्या में 2.77 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को मंजूरी देने वाली फाइल पर कौन साइन करने वाला है? तत्कालीन मंत्री लालजी टंडन (Lalji Tandon) चाहते थे कि कल्याण सिंह इस पर हस्ताक्षर करें लेकिन वो अनिच्छुक थे. यह तभी हुआ कि मैंने पर्यटन मंत्री होने के चलते अपना हाथ उठाया और मेरी क्षमता के मुताबिक हस्ताक्षर कर फाइल को क्लियर कर दिया."

फाइल क्लियर होने के दो महीने में ही ढहा दी गई मस्जिद
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फाइल के क्लियर होने के करीब दो महीने बाद कारसेवकों (Kar Sevaks) ने 6 दिसंबर को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ढहा दिया. इसके नतीजे के तौर पर कल्याण सिंह सरकार को बर्खास्त कर दिया गया.

मस्जिद के ढहाए जाने के बाद, केंद्र सरकार ने लिब्राहन आयोग (Librahan Commission) की स्थापना मामले की जांच के लिए की.

लिब्राहन आयोग ने कई बार पूछा- पर्यटन मंत्री ने क्यों किए भूमि अधिग्रहण फाइल पर साइन?
पूर्व मंत्री जो कि उस वक्त बद्री-केदार विधानसभा क्षेत्र (Badri–Kedar Constituency) से विधायक हुआ करते थे बताते हैं कि अक्सर ही उन्हें आयोग की ओर से जानकारी मांगने के लिए नोटिस मिला करते थे कि आखिर उन्होंने अयोध्या की भूमि अधिग्रहण की फाइल पर हस्ताक्षर क्यों किए हैं? उन्होंने कहा, "लेकिन अब वह सब खत्म हो चुका है."

शनिवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (Chief Justice Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, जिसके मुताबिक अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन को रामलला विराजमान को सौंप दिया गया था वहीं मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन कहीं और मस्जिद निर्माण के लिए देने का आदेश दिया गया था.

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First published: November 12, 2019, 12:42 AM IST
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