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बीमार पिता को देखने साइकिल से 2100 किलोमीटर का सफर तय कर रहा मुंबई का चौकीदार

News18Hindi
Updated: April 4, 2020, 3:23 PM IST
बीमार पिता को देखने साइकिल से 2100 किलोमीटर का सफर तय कर रहा मुंबई का चौकीदार
आरिफ अपने पिता से मिलने साइकिल से 2100 किलोमीटर के सफर पर निकला है.

आरिफ अपने पिता से​ मिलने मुंबई से 2100 किलोमीटर दूरी का सफर साइकिल से तय कर रहा है. आरिफ के पिता को दिल का दौरा पड़ा है.

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नई दिल्ली. दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की गई है. लॉकडाउन के दौरान न तो ट्रेनें चल रही हैं और न ही कोई प​रिवहन सेवाएं. इन सबके बीच कई लोग ऐसे भी हैं, जिनके लिए घर पहुंचना बेहद जरूरी दिखाई पड़ता है. मुंबई का एक चौकीदार अपने बीमार पिता से मिलने के लिए जम्मू कश्मीर के राजौरी के लिए निकल पड़ा है. मोहम्मद आरिफ नामक यह शख्स मुंबई के बांद्रा में तुला टावर में एक गार्ड की नौकरी करता है. आरिफ अपने पिता से​ मिलने मुंबई से 2100 किलोमीटर दूरी का सफर साइकिल से तय कर रहा है.

कुछ दिन पहले ही आरिफ (36) को घर से फोन आया कि उसके पिता को दौरा पड़ा है और वह गंभीर हालत में हैं.इसके बाद आरिफ मुंबई से राजौरी जाने के लिए हर मुमकिन को​शिश में जुट गया. उसने बताया कि कोरोना वायरस की महामारी के कारण देशभर में लगे लॉकडाउन की वजह से कोई ट्रेन या बस उपलब्ध नहीं थी. आरिफ ने बताया कि उसने मदद के ​लिए हर तरफ हाथ बढ़ाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. आरिफ ने फिर एक साथी चौकीदार को 500 रुपये दिए और उसकी साइकिल ले ली. आरिफ का कहना है कि उसे किसी भी तरह अपने पिता के पास पहुंचना है फिर इसके लिए उसे चाहे कितनी भी देर साइकिल क्यूं न चलाना पड़े.

आरिफ ने बताया कि मैंने गुरुवार को सुबह 10 बजे के आसपास टॉवर को छोड़ दिया था. उसने बताया कि रास्ते में कई पुलिसकर्मी मिले, जिन्हें उसने अपनी परेशानी बताई. उसने बताया कि उसकी ​मदद किसी ने नहीं की लेकि​न उसे रोका भी नहीं.लॉकडाउन के बारे में वो जानता है कि जो जहां है वहीं रहे लेकिन उसे आगे बढ़ना ही होगा. आरिफ ने क​हा मेरी बात पर हर किसी को विश्वास है तभी हर कोई पुलिस​कर्मी उसे आगे जाने दे रहा है.



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800 रुपये लेकर मुंबई से निकला है आरिफ
यह पूछे जाने पर कि राजौरी पहुंचने के लिए उन्हें कितने दिनों का समय लगेगा. इस पर आरिफ ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह अपने ​बीमार पिता को देख सकेंगे. आरिफ ने बताया कि उनके घर पर और कोई नहीं है. न तो उनका कोई भाई है और न बहन. उन्होंने बताया कि वह 800 रुपये लेकर मुंबई से निकले थे अब उनके बाद 600 रुपये बचे हैं. आरिफ नावर भ्रामना गांव का निवासी है. उनकी पत्नी और बच्चे अपने पिता के साथ वहां रहते हैं. उन्हें संयुक्त अरब अमीरात से लौटने के बाद 28 दिन पहले मुंबई में नौकरी मिली थी, जहां वे काम की तलाश में गए थे.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मदद का दिया भरोसा
जब CNN-News18 ने जम्मू और कश्मीर प्रशासन को इस पूरी घटना से अवगत कराया, तो वरिष्ठ अधिकारियों ने मदद करने की पेशकश की. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, हम उसे लखनपुर से उठा सकते हैं और चार घंटे में राजौरी में छोड़ सकते हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने भी आरिफ की हर मुमकिन मदद का भरोसा दिलाया है.

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First published: April 4, 2020, 3:22 PM IST
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