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this person is busy in making green wall of india he is called greenman of india

'ग्रीन वॉल ऑफ़ इंडिया' बनाने के मिशन में जुटा है ये शख्स, कहते हैं इनको ग्रीनमैन ऑफ इंडिया

पेड़ों के लिए जुनून ने विजयपाल बघेल को बनाया ग्रीनमैन (News18)

पेड़ों के लिए जुनून ने विजयपाल बघेल को बनाया ग्रीनमैन (News18)

अमेरिका के पूर्व उप राष्ट्रपति अल गोर ने ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से निपटने के लिए दुनिया भर में 500 क्लाइमेट लीडर्स बनाने का काम शुरू किया था. गोर ने विजयपाल बघेल के पेड़ों के लिए जुनून को देखकर उनको ग्रीनमैन नाम दिया. उसके बाद विजयपाल बघेल ग्रीनमैन के नाम से मशहूर हो गए.

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नई दिल्ली. विजयपाल बघेल को बचपन से ही पेड़ों से बहुत लगाव था. पेड़ों से ये लगाव धीरे-धीरे एक जुनून में बदलता गया और उनके इस जुनून ने उन्हें दुनिया भर में ग्रीनमैन के नाम से मशहूर कर दिया. ग्रीनमैन के नाम से मशहूर हो चुके विजयपाल बघेल का जन्म हाथरस के चंद्रगढ़ी गांव में हुआ था. उनकी आरंभिक पढ़ाई गांव में ही हुई. विजयपाल बघेल बचपन से ही दूसरे बच्चों से थोड़ा अलग थे. घर में सबसे छोटे होने के कारण उनके दादाजी उनसे बहुत ज्यादा लाड़-प्यार करते थे. वे अक्सर उन्हें अपने साथ घुमाने ले जाते थे. गायत्री परिवार के संस्थापक आचार्य श्रीराम शर्मा का गांव आंवलखेड़ा उनके गांव चंद्रगड़ी के पास ही है. विजयपाल बघेल के दादाजी आजादी के आंदोलन में श्रीराम शर्मा के साथ काम कर चुके थे. वे छुट्टी के दिन अक्सर उनसे मिलने जाया करते थे और विजयपाल को भी अपने साथ ले जाते थे.
एक दिन पंडित श्रीराम शर्मा के यहां जाते समय रास्ते में विजयपाल बघेल ने तीन लोगों को एक पेड़ काटते देखा. उन तीनों लोगों की आरी जहां चल रही थी, वहां पेड़ से दूध जैसा तरल पदार्थ रिस रहा था. जिज्ञासा और उत्सुकता में बालक विजयपाल बघेल ने अपने दादा से पूछा कि ये क्या है? दादा ने कह दिया कि बेटा पेड़ को आरी से काटा जा रहा है और उसे दर्द हो रहा है. इसलिए उसके आंसू बह रहे हैं. बालक विजयपाल ने पेड़ की उस तकलीफ को बहुत ही गहराई से महसूस किया. इसके बाद विजयपाल बघेल ने बालहठ पकड़ लिया कि उस पेड़ को काटने से रोका जाए. उनके दादाजी ने उन लोगों से पेड़ नहीं काटने को कहा और वे भी मान गए.

चिपको आंदोलन और बिश्नोई समाज की कहानी ने डाला असर

विजयपाल बघेल के बचपन के दौर में पहाड़ों पर चिपको आंदोलन चल रहा था. जिसमें लोग पेड़ काटने से रोकने के लिए पेड़ों को पकड़ के चिपक जाते थे. इसकी भी चर्चा बालक विजयपाल तक पहुंची. उनके दादाजी कभी-कभी उनको कोई कहानी सुनाते थे. एक दिन ऐसे ही दादाजी ने जोधपुर से 20 किलोमीटर दूर स्थित गांव खेजलड़ी की कहानी सुनाई. जहां पर 1730 ई. में खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए बिश्नोई समाज के एक-दो नहीं बल्कि 363 लोगों ने अपनी जान दे दी. इस कहानी ने बालक विजयपाल के मन पर ऐसी छाप छोड़ी जो ताउम्र नहीं उतर सकी.

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श्रीराम शर्मा से सीखी पेड़ों के बारे में गूढ़ बातें

पेड़ों के बारे में विजयपाल बघेल के लगाव की चर्चा उनके दादाजी ने श्रीराम शर्मा से की. श्रीराम शर्मा ने पेड़ों के बारे में कुछ गूढ़ बातें विजयपाल बघेल को बतायीं. 1975 में जब देश में आपातकाल लगा तो परिवार नियोजन के साथ पौधरोपण का काम जोरशोर से शुरू हुआ. विजय पाल बघेल ने अपनी बाल टोली बनाई और उस काम में जुड़ गए. इसके साथ ही विजयपाल बघेल ने एक नई पहल ‘फल गुल्लक’ शुरू की. फलों के बीजों की गुल्लक तैयार करने के लिए उन्होंने कई घरों में मटके रखवा दिए. उन लोगों से कहा गया कि जो भी फल वे खाएं, उसके बीज इसमें जमा करते जाएं. बरसात के मौसम में ये बीज खाली जमीन और सड़कों के किनारे रोप दिए जाते. जिससे पौधे उग जाते. विजयपाल बघेल ने एलएलबी की पढ़ाई पूरी की और वे पूरी तरह पर्यावरण के काम में जुट गए.

इस तरह मिला ग्रीनमैन नाम

पेड़ों को लगाने के अपने काम के कारण विजयपाल बघेल धीरे-धीरे मशहूर होने लगे थे. अमेरिका के उप राष्ट्रपति अल गोर ने ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण की समस्या से निपटने के लिए दुनिया भर में 500 क्लाइमेट लीडर्स बनाने का काम शुरू किया. इसके लिए दुनिया भर से पौधरोपण के काम में लगे लोगों का चयन किया गया और उनको ऑस्ट्रेलिया की राजधानी मेलबर्न में प्रशिक्षण के लिए आमंत्रित किया गया. विजयपाल बघेल को भी इसमें बुलाया गया. प्रशिक्षण के बाद जब इसमें सहभागिता का प्रमाण पत्र दिया जा रहा था तो अल गोर ने विजयपाल बघेल का नाम उस प्रमाणपत्र में ‘ग्रीनमैन बघेल’ लिख दिया. तब से विजयपाल बघेल ग्रीनमैन के नाम से मशहूर हो गए.

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डॉ. कलाम के कहने पर पहनना शुरू किया हरा कपड़ा

आज ग्रीन मैन हमेशा हरे कपड़ों में ही सार्वजनिक रूप से नजर आते हैं, लेकिन इसके पीछे की कहानी बहुत दिलचस्प है. एक बार एक पौधरोपण कार्यक्रम में वे देश के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के साथ थे. कार्यक्रम में जब पौधरोपण हो रहा था, उसी समय डॉक्टर अब्दुल कलाम ने कहा, ‘विजयपाल तुम्हारा मन इतना हरा है तो तन भी हरा हो जाना चाहिए.’ इस बात को राष्ट्रपति के साथ मौजूद कुछ लोगों ने सुना और फिर उन लोगों ने ग्रीनमैन को हरे कपड़े लाकर दिए. इसके बाद डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की इच्छा का सम्मान करते हुए ग्रीनमैन हमेशा हरे कपड़े पहनते हैं. अपने जीवन में ग्रीनमैन गायत्री परिवार के संस्थापक श्रीराम शर्मा और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को ही अपना गुरु मानते हैं. जिनके आदर्शों का वे एकलव्य की तरह पालन करते हैं.

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मिशन 125 करोड़

मिशन 125 करोड़ की शुरुआत 2011 की जनगणना में भारत की जनसंख्या के 125 करोड़ होने पर की गई. विजयपाल बघेल ने सोचा कि हर इंसान के लिए एक पेड़ जरूर लगाया जाना चाहिए. पर्यावरण के काम में आम जनता नहीं जुड़ेगी तो इसमें सुधार नहीं हो सकता. सरकार के पास जो भी काम जाता है, वह कागजों में ज्यादा होता है और जमीनी हकीकत में बहुत कम होता है. ऐसा केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में होता है. ग्रीनमैन विजयपाल का मानना है कि जब इंसान अपनी रोजी-रोटी खुद कमाता है, अपने रहने का बंदोबस्त करता है तो अपनी सांसों के लिए सबसे जरूरी चीज के लिए सरकारी प्रयास पर क्यों आश्रित रहे. हर इंसान को पेड़ लगाने चाहिए और कम से कम अपने जन्मदिन पर तो जरूर लगाना चाहिए. ताकि वह अपनी सांस का इंतजाम कर सके. ये हर इंसान की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है. ग्रीनमैन ने 125 करोड़ पेड़ लगाने के लिए पदयात्रा भी की थी.

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ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया

भारत में 2019 में जब कॉप-14 का आयोजन किया गया तो उसमें ग्रीनमैन ने भी हिस्सा लिया था. वहां पर भारत की पर्यावरण की समस्या को हल करने के लिए एक लाइन का फीडबैक मांगा गया था. इस पर विजयपाल बघेल ने अरावली पहाड़ी के पश्चिम से आनेवाली धूल को रोकने के लिए ‘ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया’ बनाने का सुझाव दिया. ग्रीनमैन का मानना है कि इससे भारत खासकर दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है. इस विचार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी मंजूरी दी है. ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया के सपने को साकार करने के लिए विजयपाल बघेल ने पोरबंदर से कुरुक्षेत्र तक पदयात्रा की. इस 1400 किलोमीटर लंबी ग्रीन वॉल को बनाने के लिए 2020 के बजट में ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया का जिक्र भी हुआ. लेकिन इस पर कुछ खास काम नहीं हुआ.

बहरहाल अब ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया को लेकर कई बैठकें हो चुकी हैं. इस पर एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की कोशिश की जा रही है. जोधपुर का केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (The Central Arid Zone Research Institute-CAZRI) और अन्य कई संस्थान इस पर काम कर रहे हैं. ये ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया गुजरात, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा में बनेगी. जिनके अरावली के पश्चिम में मौजूद कुल 28 जिले इसमें शामिल होंगे. विजयपाल बघेल का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ से अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के रेगिस्तान से पीएम 2.5 लेवल के कण भारी मात्रा में आकर दिल्ली की हवा को बहुत प्रदूषित करते हैं और इसे गैस चैंबर में बदल देते हैं.

ग्रीनमैन बघेल का कहना है कि पहले 900 किलोमीटर लंबी अरावली पहाड़ी इस धुंध को रोक लेती थी. लेकिन खनन ने एक तरह से अरावली पहाड़ी को खत्म कर दिया है. अब ये धूलभरी हवाएं सीधे दिल्ली पहुंच जाती हैं. अगर ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया को बना दिया जाए तो बहुत हद तक धुंध को दिल्ली पहुंचने से रोका जा सकता है. इस पूरी ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया में 135 करोड़ पेड़ लगाने की संभावना है. इससे हर भारतीय के लिए एक पेड़ होगा.

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पेड़ को मिले जीवित प्राणी का दर्जा

ग्रीनमैन विजयपाल बघेल एक हरित सत्याग्रह चलाते हैं, जिनमें कुछ मांगें शामिल हैं. उनकी सबसे पहली मांग पेड़ को जीवित प्राणी का दर्जा देना है. भारत के वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु ने काफी पहले इस बात को साबित कर दिया था कि पेड़ एक जीवित प्राणी हैं. भले ही वे स्थिर हैं. वे भी इंसान की तरह सांस लेते हैं, खाना खाते हैं, पानी पीते हैं और अपने जीवन में वृद्धि करते हैं. इसलिए पेड़ों को जीवित प्राणी का दर्जा दिया जाए.

बनाई जाए राष्ट्रीय वृक्ष नीति

ग्रीनमैन विजयपाल बघेल की मांग ये भी है कि सरकार एक राष्ट्रीय वृक्ष नीति बनाए. 1950 में भारत में 18 फीसद वन क्षेत्र था जो आज भी उतना ही है. उनकी मांग है कि वनों के भू-उपयोग परिवर्तन को तत्काल रोका जाए. ग्रीन मैन की ये भी मांग है कि राष्ट्रीय वृक्ष बरगद का भी उसी तरह सरकारी प्रोटोकाल में सम्मान किया जाए जैसे कि राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का किया जाता है. ग्रीनमैन चाहते हैं कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने की हर जगह पर बरगद का पेड़ लगाया जाए. हर राष्ट्रीय और सरकारी संस्थान में बरगद का पेड़ लगाना अनिवार्य किया जाए. वे चाहते हैं कि आजादी के अमृत महोत्सव के समापन के मौके पर देश में जहां-जहां झंडारोहण का कार्यक्रम हो, उन सभी जगहों पर बरगद का पेड़ लगाया जाए. जिससे एक साथ आसानी से अनगिनत पेड़ लगाए जा सकते हैं. ग्रीनमैन विजयपाल बघेल की एक मांग यह भी है कि हर भारतीय नागरिक के आधार के साथ एक पेड़ लिंक किया जाए. पेड़ों को आधार के साथ लिंक करने से फर्जी पौधरोपण पर रोक लगेगी और पेड़ों के बारे में हर जानकारी सरकार को उपलब्ध होगी.

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सांसें हो रहीं हैं कम, आओ पेड़ लगाएं हम

ग्रीनमैन आफ इंडिया ने एक नारा दिया है ‘सांसें हो रही हैं कम, आओ पेड़ लगाएं हम.’ उनका कहना है कि नेचर जर्नल के हिसाब से हर आदमी पर कम से कम 500 पेड़ होने चाहिए. दुनिया भर में हुए एक सर्वे में पाया गया है कि 7.5 अरब की आबादी में हर इंसान पर 422 पेड़ हैं. यानी दुनिया में हर इंसान पर 78 पेड़ कम हैं और उनको लगाया जाना चाहिए. ये आंकड़ा तब है जबकि ब्राजील, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, रूस और इंडोनेशिया जैसे देशों में प्रति व्यक्ति पेड़ का आंकड़ा 8000 से लेकर 10 हजार के बीच है. यानी कई देशों में पेड़ों का आंकड़ा ज्यादा है और कई में कम. भारत की हालत ये है कि यहां पर हर व्यक्ति पर केवल 28 पेड़ हैं. इस तरह से भारत में तो बहुत ज्यादा पेड़ लगाए जाने की जरूरत है. ग्रीनमैन को इस बात का दुख है कि पेड़ों की पूजा करने वाले इस देश में पेड़ों की इतनी कमी है.

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देश में गिरते ऑक्सीजन लेवल से चिंता

ग्रीनमैन विजयपाल बघेल का कहना है कि भारत में ऑक्सीजन का स्तर बहुत ही कम है. साधारण तौर पर हवा में 21 प्रतिशत ऑक्सीजन होनी चाहिए, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है. इस बारे में ग्रीनमैन एक रोचक वाकया बताते हैं. 2015 में जब अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को भारत के गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया तो दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी के कारण उन्होंने अपने कार्यक्रम को कई बार टालने की कोशिश की. लेकिन फिर भी अंतत: वे नई दिल्ली आए. उनका राजघाट पर महात्मा गांधी की समाधि पर पीपल का पेड़ लगाने का कार्यक्रम था. सभी जानते हैं कि राजघाट पर कितने घने पेड़ हैं. पेड़-पौधे की बहुतायत वाले यमुना के किनारे ज्यादा आबादी भी नहीं है. फिर भी जब वहां ऑक्सीजन लेवल मापा गया तो केवल 11 परसेंट ऑक्सीजन पायी गई. ऑक्सीजन का ये स्तर तब था, जब अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यक्रम को देखते हुए वहां पर ऑक्सीजन बढ़ाने के लिए और भी कई उपाय किए गए थे. ग्रीनमैन का कहना है कि दिल्ली में आमतौर पर ऑक्सीजन लेवल केवल 9% ही रहता है. इससे यहां रहने वाले लोगों की उम्र घटती जा रही है.

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48 साल से लगातार लगा रहे पेड़

ग्रीनमैन विजयपाल बघेल पिछले 48 साल से रोज एक पौधा लगा रहे हैं. आज तक उनकी प्रेरणा और सहयोग से उनके साथ जुड़े लोगों ने करीब 62 करोड़ पौधे लगा दिए हैं. 1993 से विजयपाल बघेल ने एक नया अभियान शुरू किया. अपने साथ जुड़ने वाले हर आदमी के लिए उन्होंने ये शर्त रखी है कि उनको अपने जन्मदिन पर पेड़ जरूर लगाना है. इस तरह हर रोज उनके करीब 400 से 500 सहयोगी पेड़ लगाते हैं. इनमें से 200 से 250 लोग अपने जन्मदिन पर पेड़ लगा कर उसकी फोटो भी ग्रीनमैन को भेजते हैं.

Tags: Environment, Global warming, News18 Hindi Originals, Plantation, Save environment, Tree

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