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राजनीति के इस धुरंधर ने अपने ही गुरू बाला साहेब ठाकरे को गिरफ्तार करवा दिया था

News18Hindi
Updated: October 17, 2019, 4:09 PM IST
राजनीति के इस धुरंधर ने अपने ही गुरू बाला साहेब ठाकरे को गिरफ्तार करवा दिया था
महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी यानी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में अपने कर्मबल से कोई नंबर 2 रहा तो वो हैं छगन चंद्रकांत भुजबल.

मुंबई के भायखला बाज़ार में सब्जी बेचने से राज्य के उप-मुख्यमंत्री बनने तक का सफर तय करने वाले छगन भुजबल एनसीपी के कद्दावर नेता माने जाते हैं.

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  • Last Updated: October 17, 2019, 4:09 PM IST
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महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी यानी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में अपने कर्मबल से कोई नंबर 2 रहा तो वो हैं छगन चंद्रकांत भुजबल. मुंबई के भायखला बाज़ार में सब्जी बेचने से राज्य के उप-मुख्यमंत्री बनने तक का सफर तय करने वाले छगन भुजबल एनसीपी के कद्दावर नेता माने जाते हैं. वो अकेले ऐसे नेता हैं जो कि शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे और एनसीपी चीफ शरद पवार दोनों के बेहद करीबी रहे. उनके राजनीतिक चातुर्य और हैरतअंगेज फैसले लेने के दुस्साहस ने ही उन्हें महाराष्ट्र की सियासत के शीर्ष नेताओं का वरदहस्त दिलवाया.

छगन भुजबल जिस पार्टी में भी रहे, वहां उनका ओहदा किसी से कम नहीं रहा. छगन भुजबल ने महाराष्ट्र की राजनीति में पार्टियों से इतर खुद की छवि ओबीसी नेता के रूप में बनाई ताकि जिस पार्टी में भी वो रहें उनका वोट बैंक साथ रहे. 

छगन भुजबल ने अपनी युवावस्था में शिवसेना के कार्यकर्ता के रूप में काम किया क्योंकि वो शिवसेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे के भाषणों से प्रभावित हुए थे. बाला साहब ठाकरे के भाषणों से प्रभावित हो कर वो पढ़ाई छोड़कर शिवसेना में शामिल हो गए. उस वक्त वो एक इंजीनियरिंग कॉलेज से डिप्लोमा कर रहे थे.

शिवसेना में शामिल होने के बाद उनका आक्रमक भाषण उनकी पहचान बनाता चला गया. मराठा अस्मिता पर उनके भाषणों ने उन्हें लोकप्रिय बना दिया, जिससे शिवसेना में उनका कद बढ़ता चला गया. शिवसेना की आक्रमक राजनीति को छगन भुजबल जैसे युवाओं की जरूरत थी जो कि अपने जोशीले अंदाज़ से शिवसेना का दायरा बढ़ा सकें. छगन भुजबल के जोशीले और बेबाक भाषणों की गूंज बाला साहेब ठाकरे के कानों में भी एक दिन पड़ी और फिर उसके बाद छगन भुजबल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. कहते हैं कि मुंबई से बाहर शिवसेना का प्रचार-प्रसार करने का क्रेडिट छगन भुजबल को ही जाता है. 

साल 1985 में उन्होंने शिवसेना से मुंबई का मेयर बन कर करियर की शुरुआत की थी. फिर वो जल्द ही शिवसेना की मुख्यधारा में आ गए. साल 1989 में शिवसेना ने बीजपी के साथ गठबंधन किया. ये गठबंधन दोनों ही पार्टियों के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. हिंदुत्व के रथ पर बीजेपी के साथ शिवसेना सवार हो चुकी थी. जैसे जैसे शिवसेना का राजनीतिक दायरा बढ़ रहा था वैसे-वैसे छगन भुजबल का राजनीतिक कद भी बढ़ता जा रहा था. 1990 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना पहली बार विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी बनी. शिवसेना के 52 विधायक चुनकर आए. छगन भुजबल को विपक्ष का नेता बनने की उम्मीद थी लेकिन मनोहर जोशी के विपक्ष का नेता बनने से छगन भुजबल की राजनीति में नया मोड़ आ गया. साल 1991 में वो कांग्रेस में शामिल हो गए. शिवसेना का 25 साल पुराना साथ छोड़ दिया.  

कांग्रेस में वो शरद पवार के बेहद करीबी थे. लेकिन पवार ने जब कांग्रेस छोड़ने के बाद एनसीपी का गठन किया तो छगन भुजबल उसमें शामिल हो गए. बाद में एनसीपी-कांग्रेस के गठबंधन की सरकार में वो गृहमंत्री बने. छगन भुजबल ने ही मुंबई दंगों के बाद हुई हिंसा के मामले में शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे की गिरफ्तारी का आदेश दे डाला. 

छगन भुजबल की कहानी में मुंबइया फिल्मों की झलक दिखती है. जब दो साल की उम्र थी, तब मां-बाप गुज़र गए. छगन भुजबल और उनके भाई को चाचा ने पाल पोसकर बड़ा किया. घर के कामों में हाथ बंटाने के लिए मुंबई के भाएखला में सब्जी बेची. ठेले पर रखकर सब्जी बेचने से ज़िंदगी के संघर्ष ने आगे का रास्ता तय किया. तब शायद छगन भुजबल को ही ये गुमान नहीं होगा कि एक दिन वो महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री बनेंगे.
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साल 1999 में छगन भुजबल ने येवला से चुनाव लड़ा. येवला से वो चुनाव जीते. साल 2004 से 2014 तक वो सरकार में सार्वजनिक विभाग के मंत्री रहे. 

छगन भुजबल पर आरोप है कि उन्होंने  राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल कर अरबों की संपत्ति बनाई. उन महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी यानी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में अपने कर्मबल से कोई नंबर 2 रहा तो वो हैं छगन चंद्रकांत भुजबल.पर भूमि अधिग्रहण करने के भी आरोप लगे. अब्दुल करीम तेलगी के स्टॉम्प पेपर घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग में उनका नाम आने से राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचा लेकिन छगन भुजबल तब तक राजनीति में बहुत आगे निकल चुके थे. तेलगी स्कैम में किसी तरह गिरफ्तारी से बचने के बाद छगन भुजबल ने अपने राजनीतिक रसूख का जमकर इस्तेमाल किया. 

भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रहे छगन भुजबल जब जेल में थे, तब उनकी एक तस्वीर वायरल हुई थी. वो तस्वीर कहानी बयां कर रही थी कि राजनीति का धाकड़ और अरबों की संपत्ति का मालिक सत्ता के शिखर से गुनाहों की गर्त तक कैसे पहुंच गया. दिल्ली में बने महाराष्ट्र सदन घोटाला मामले में उनको गिरफ़्तार किया गया. उन पर मनी लॉंड्रिंग का केस दर्ज किया गया था.

 

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First published: October 17, 2019, 4:09 PM IST
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