क्या इरोम शर्मिला, शिवखेड़ा और प्रकाश झा के लिए नहीं बनी है राजनीति?

2019 के लोकसभा चुनाव का परिणाम आने वाला है. कुछ लोग भारी मतों से जीतेंगे तो कुछ बुरी तरह हारेंगे. आईए इसी बहाने जानते हैं उन मशहूर लोगों की चुनावी यात्रा के बारे में जिनकी कभी जमानत जब्त हो गई थी. शायर फ़िराक़ गोरखपुरी भी ऐसे ही लोगों में से एक थे

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: May 19, 2019, 11:56 AM IST
क्या इरोम शर्मिला, शिवखेड़ा और प्रकाश झा के लिए नहीं बनी है राजनीति?
चुनाव में क्यों मात खा गईं ये हस्तियां?
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: May 19, 2019, 11:56 AM IST
मणिपुर में लागू सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (आफ्सपा) के खिलाफ 16 साल तक भूख हड़ताल करने वाली मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने जब विधानसभा चुनाव लड़ा तो उन्हें सिर्फ 90 वोट मिले. जबकि उन्होंने मणिपुर के लोगों के लिए दुनिया में सबसे लंबी भूख हड़ताल का रिकॉर्ड बनाया था. 'जीत आपकी' नामक किताब लिखने वाले मोटिवेशनल गुरु शिव खेड़ा जब चुनावी मैदान में उतरे तो उनकी जमानत जब्त हो गई. मशहूर शायर रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी भी राजनीति में उतरे और रिजल्ट आया तो नाम चौथे स्थान पर था. प्रकाश झा ने 'राजनीति' नामक फिल्म बनाई लेकिन उन्हें चुनावी मैदान में तीन बार हार का सामना करना पड़ा.

आखिर ऐसा क्यों होता है कि बड़े-बड़े नाम जब सियासत में उतरते हैं तो उन्हें मुंह की खानी पड़ती है? हमने राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई से इसकी वजह जानने की कोशिश की. किदवई के मुताबिक, “भारतीय राजनीति में धनबल, बाहुबल और साधनों का बोलबाला रहा है. इसमें मूल्यों, आदर्शों से समझौता करना पड़ता है. जबकि ऐसे नाम, जिनकी हम बात कर रहे हैं वे ऐसा करते नहीं. दूसरी वजह ये होती है कि वे बुद्धिजीवी तो होते हैं उनका नाम तो होता है लेकिन पब्लिक कनेक्ट नहीं होता. वे जनता के लिए सहज नहीं होते. इससे जनता भी उनके साथ सहज नहीं हो पाती. इसलिए वोट नहीं मिलता.”



चुनाव में हारने वाली गैर राजनीतिक हस्तियों में मेधा पाटकर, कुमार विश्वास, चुनावशास्त्री योगेंद्र यादव,  क्रिकेटर मो. कैफ, एस्कॉटर्स ट्रैक्टर के मालिक एचपी नंदा और  फिल्मकार प्रकाश झा शामिल हैं. यही नहीं अपने जमाने के सबसे मशहूर अभिनेता देवानंद ने ‘नेशनल पार्टी’ बनाई थी. लेकिन शायद राजनीति उनके लिए नहीं बनी थी. उनकी पार्टी नहीं चली. आईए जानते हैं इन हस्तियों का सियासी सफर कैसा रहा है. (ये भी पढ़ें: बंगाल में किसका बेड़ा पार लगाएगी ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति?)

 Lok Sabha Election 2019, prakash jha, kumar vishwas, gorakhpur news, Haryana, politics, Yogendra yadav, Medha patkar, Shiv Khera, Mewat news, mohammad kaif, phulpur, raghupati sahay firaq gorakhpuri,Armed Forces (Special Powers) Acts, AFSPA, west champaran bihar, film rajneeti, we can win book, लोकसभा चुनाव 2019, प्रकाश झा, कुमार विश्वास, गोरखपुर समाचार, हरियाणा, राजनीति, योगेन्द्र यादव, मेधा पाटकर, मेवात समाचार, मोहम्मद कैफ, फूलपुर, रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी, चंपारण , राजनीति, जीत आपकी, शिवखेड़ा, चुनाव आयोग          रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी

रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी 

कम ही लोगों को पता होगा कि मशहूर शायर रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी  भी राजनीति में उतरे थे. उन्होंने 1951 में आचार्य कृपलानी की किसान मजदूर प्रजा पार्टी के बैनर तले गोरखपुर दक्षिण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था. लेकिन उनकी बुरी तरह हार हुई. गोरखपुरी अपनी जमानत तक नहीं बचा सके. कांग्रेस के सिंहासन सिंह ने उन्हें हराया.  गोरखपुरी को सिर्फ 9586 वोट मिले और वे चौथे स्थान पर रहे. गोरखपुर के वरिष्ठ पत्रकार मनोज सिंह लिखते हैं,  “स्वतंत्रता सेनानी प्रो. शिब्बन लाल सक्सेना ने गोरखपुरी को चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया था. वो गोरखपुरी के रिश्तेदार थे. फ़िराक़ जोश में आ गए और चुनाव लड़ गए.”

 Lok Sabha Election 2019, prakash jha, kumar vishwas, gorakhpur news, Haryana, politics, Yogendra yadav, Medha patkar, Shiv Khera, Mewat news, mohammad kaif, phulpur, raghupati sahay firaq gorakhpuri,Armed Forces (Special Powers) Acts, AFSPA, west champaran bihar, film rajneeti, we can win book, लोकसभा चुनाव 2019, प्रकाश झा, कुमार विश्वास, गोरखपुर समाचार, हरियाणा, राजनीति, योगेन्द्र यादव, मेधा पाटकर, मेवात समाचार, मोहम्मद कैफ, फूलपुर, रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी, चंपारण , राजनीति, जीत आपकी, शिवखेड़ा, चुनाव आयोग, Irom Sharmila, इरोम शर्मिला          इरोम शर्मिला
Loading...

इरोम शर्मिला

इनके नाम भूख हड़ताल का वर्ल्ड रिकॉर्ड है. मणिपुर में लागू सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (आफ्सपा) के खिलाफ 16 साल तक भूख हड़ताल करने वाली जब विधानसभा चुनाव में उतरीं तो उन्हें जनता ने बुरी तरह से नकार दिया. सिर्फ 90 वोट मिले. उनसे अधिक वोट नोटा को मिले थे. 143 लोगों ने नोटा पर वोट किया. मणिपुर की थउबल सीट से उनके सामने तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके ओकराम इबोबी सिंह थे. इबोबी सिंह को 18,649 वोट मिले थे. इरोम ने पीपुल्स रिइंसर्जेंस एंड जस्टिस अलाएंस नाम की अपनी नई पार्टी बनाई थी. इरोम के चुनाव परिणाम से लोगों को काफी झटका लगा था.

 Lok Sabha Election 2019, prakash jha, kumar vishwas, gorakhpur news, Haryana, politics, Yogendra yadav, Medha patkar, Shiv Khera, Mewat news, mohammad kaif, phulpur, raghupati sahay firaq gorakhpuri,Armed Forces (Special Powers) Acts, AFSPA, west champaran bihar, film rajneeti, we can win book, लोकसभा चुनाव 2019, प्रकाश झा, कुमार विश्वास, गोरखपुर समाचार, हरियाणा, राजनीति, योगेन्द्र यादव, मेधा पाटकर, मेवात समाचार, मोहम्मद कैफ, फूलपुर, रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी, चंपारण , राजनीति, जीत आपकी, शिवखेड़ा, चुनाव आयोग, Irom Sharmila, इरोम शर्मिला           मोटिवेशनल लेखक शिवखेड़ा

मोटिवेशनल गुरु शिव खेड़ा

अंग्रेजी में वी कैन विन और हिंदी में 'जीत आपकी' नामक किताब का नाम आपने कई बार सुना होगा. इस किताब को लिखने वाले मोटिवेशनल गुरु शिव खेड़ा भी चुनावी दंगल में उतरे थे. जीत का मंत्र देने वाले खेड़ा इस मैदान में बुरी तरह से हारे. पांच हजार वोट भी नहीं मिले और उनका नाम तीसरे नंबर पर था. खेड़ा ने 2004 में दक्षिण दिल्ली लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा. उनके सामने बीजेपी नेता विजय कुमार मल्होत्रा खड़े थे. मल्होत्रा को 240651 वोट मिले, जबकि खेड़ा पर सिर्फ 4832 लोगों ने भरोसा जताया था.

 Lok Sabha Election 2019, prakash jha, kumar vishwas, gorakhpur news, Haryana, politics, Yogendra yadav, Medha patkar, Shiv Khera, Mewat news, mohammad kaif, phulpur, raghupati sahay firaq gorakhpuri,Armed Forces (Special Powers) Acts, AFSPA, west champaran bihar, film rajneeti, we can win book, लोकसभा चुनाव 2019, प्रकाश झा, कुमार विश्वास, गोरखपुर समाचार, हरियाणा, राजनीति, योगेन्द्र यादव, मेधा पाटकर, मेवात समाचार, मोहम्मद कैफ, फूलपुर, रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी, चंपारण , राजनीति, जीत आपकी, शिवखेड़ा, चुनाव आयोग, Irom Sharmila, इरोम शर्मिला             योगेंद्र यादव

चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव

योगेंद्र यादव जानेमाने चुनावशास्त्री हैं. वो जमीनी हालात और डाटा के आधार पर जीत-हार के समीकरणों का विश्लेषण करते हैं. लेकिन 2014 में जब आम आदमी पार्टी के बैनर तले गुड़गांव सीट से चुनाव लड़े तो पता चला कि राजनीति तो कुछ और ही होती है. विश्लेषणों और अनुमानों से परे. वो जमानत भी नहीं बचा सके थे. वो 79,452 वोट लेकर चौथे स्थान पर रहे. कुल 13,20,647 वोट पड़े थे.  जमानत बचाने के लिए प्रत्याशियों को 2.20 लाख वोट की जरूरत थी.  वैसे यहां 22 में से 20 प्रत्याशियों की जमानत नहीं बची. बीजेपी के राव इंद्रजीत सिंह को रिकॉर्ड 644,780 वोट मिले. योगेंद्र यादव आजकल स्वराज इंडिया नामक पार्टी चलाते हैं.

 Lok Sabha Election 2019, prakash jha, kumar vishwas, gorakhpur news, Haryana, politics, Yogendra yadav, Medha patkar, Shiv Khera, Mewat news, mohammad kaif, phulpur, raghupati sahay firaq gorakhpuri,Armed Forces (Special Powers) Acts, AFSPA, west champaran bihar, film rajneeti, we can win book, लोकसभा चुनाव 2019, प्रकाश झा, कुमार विश्वास, गोरखपुर समाचार, हरियाणा, राजनीति, योगेन्द्र यादव, मेधा पाटकर, मेवात समाचार, मोहम्मद कैफ, फूलपुर, रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी, चंपारण , राजनीति, जीत आपकी, शिवखेड़ा, चुनाव आयोग, Irom Sharmila, इरोम शर्मिला           प्रकाश झा

फिल्म निर्माता प्रकाश झा

मशहूर फिल्म निर्माता प्रकाश झा ने ‘राजनीति’ नाम की फिल्म बनाई लेकिन जब राजनीति से वास्ता पड़ा तो पता चला कि फिल्म और जमीनी हालात दोनों में काफी अंतर होता है. वो यह फिल्म बनाने से पहले एक बार और बाद में दो बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. बिहार की पृष्ठभूमि पर फिल्में बनाने वाले झा जब 2004 में बेतिया सीट से निर्दलीय मैदान में उतरे तो बुरी तरह से हारे. 2004 में कुल 25973 वोट के साथ रिजल्ट तालिका में उन्हें अपना नाम छठे स्थान पर मिला. तब उन्हें आरजेडी के रघुनाथ झा ने हराया था, जिन्हें 211585 वोट मिले थे. फिर पश्चिम चंपारण से 2009 में एलजेपी की टिकट पर हार से सामना हुआ. झा ने 2014 में इसी सीट से जेडीयू की टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें जीत नसीब नहीं हो सकी.

 Lok Sabha Election 2019, prakash jha, kumar vishwas, gorakhpur news, Haryana, politics, Yogendra yadav, Medha patkar, Shiv Khera, Mewat news, mohammad kaif, phulpur, raghupati sahay firaq gorakhpuri,Armed Forces (Special Powers) Acts, AFSPA, west champaran bihar, film rajneeti, we can win book, लोकसभा चुनाव 2019, प्रकाश झा, कुमार विश्वास, गोरखपुर समाचार, हरियाणा, राजनीति, योगेन्द्र यादव, मेधा पाटकर, मेवात समाचार, मोहम्मद कैफ, फूलपुर, रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी, चंपारण , राजनीति, जीत आपकी, शिवखेड़ा, चुनाव आयोग, Irom Sharmila, इरोम शर्मिला             मेधा पाटकर

मेधा पाटकर

सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर की सक्रियता किसी से छिपी नहीं है. वंचितों के अधिकारों के लिए लड़ाई में वे हमेशा सबसे आगे रहती हैं. वो नर्मदा बचाओ आंदोलन की संस्थापक हैं. वो साल 2014 में जब मुंबई नार्थ ईस्ट लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी  के टिकट पर राजनीति में उतरीं तो जनता ने उन्हें नकार दिया. वो 76451 वोट के साथ तीसरे स्थान पर आईं. बीजेपी के किरीट सोमैया ने उन्हें हराया, जिन्हें 525285 वोट मिले थे. वो अपनी जमानत नहीं बचा सकीं थीं.

 Lok Sabha Election 2019, prakash jha, kumar vishwas, gorakhpur news, Haryana, politics, Yogendra yadav, Medha patkar, Shiv Khera, Mewat news, mohammad kaif, phulpur, raghupati sahay firaq gorakhpuri,Armed Forces (Special Powers) Acts, AFSPA, west champaran bihar, film rajneeti, we can win book, लोकसभा चुनाव 2019, प्रकाश झा, कुमार विश्वास, गोरखपुर समाचार, हरियाणा, राजनीति, योगेन्द्र यादव, मेधा पाटकर, मेवात समाचार, मोहम्मद कैफ, फूलपुर, रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी, चंपारण , राजनीति, जीत आपकी, शिवखेड़ा, चुनाव आयोग, Irom Sharmila, इरोम शर्मिला           कुमार विश्वास

कुमार विश्वास

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है, मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है...इन लाइनों से अपने लाखों प्रशंसक बनाने वाले कुमार विश्‍वास जब चुनावी मैदान में उतरे तो जनता ने इतनी बुरी तरह से नकारा कि वे चौथे स्थान पर आए. बताया जाता है कि वो 2014 में गाजियाबाद सीट से लड़ना चाहते थे लेकिन आम आदमी पार्टी ने उन्हें अमेठी भेज दिया. उनके सामने एक तरफ कांग्रेस से राहुल गांधी थे तो दूसरी ओर बीजेपी से स्मृति ईरानी. इस चुनाव में राहुल गांधी को 408651 वोट मिले, जबकि कुमार को सिर्फ 25527 लोगों का समर्थन मिला.

 Lok Sabha Election 2019, prakash jha, kumar vishwas, gorakhpur news, Haryana, politics, Yogendra yadav, Medha patkar, Shiv Khera, Mewat news, mohammad kaif, phulpur, raghupati sahay firaq gorakhpuri,Armed Forces (Special Powers) Acts, AFSPA, west champaran bihar, film rajneeti, we can win book, लोकसभा चुनाव 2019, प्रकाश झा, कुमार विश्वास, गोरखपुर समाचार, हरियाणा, राजनीति, योगेन्द्र यादव, मेधा पाटकर, मेवात समाचार, मोहम्मद कैफ, फूलपुर, रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी, चंपारण , राजनीति, जीत आपकी, शिवखेड़ा, चुनाव आयोग, Irom Sharmila, इरोम शर्मिला          एचपी नंदा

उद्योगपति एचपी नंदा

हर प्रसाद नंदा फरीदाबाद में एस्कॉटर्स कंपनी लगाई, जो ट्रैक्टर बनाती थी. तब विस्थापितों के इस शहर में यह फैक्ट्री लोगों के लिए सबसे बड़ी आशा थी. तब फरीदाबाद गुड़गांव लोकसभा सीट के तहत आता था. नंदा 1971 के चुनाव में निर्दलीय मैदान में उतर गए. कंपनी के पुराने वर्कर बताते हैं कि तब उनके पर्चे हेलीकाप्टर से गिराए गए थे. लेकिन जनता ने उनके पैसे के प्रभाव को नकार दिया. वो 13609 वोट लेकर चौथे नंबर पर आए. कांग्रेस के तैयब हुसैन ने उन्हें 199333 वोट से हराया. हुसैन मेवात के नेता थे. उनका प्रभाव इतना था कि वो तीन राज्यों पंजाब, हरियाणा व राजस्थान में मंत्री रहे थे.

ये भी पढ़ें:

Lok Sabha Election 2019: कौन तोड़ेगा चुनावी चक्रव्यूह का सातवां द्वार?

अमित शाह का मिशन बंगाल: ममता बनर्जी के गढ़ में ऐसे मजबूत हो रही बीजेपी!

 
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...