कश्मीर का एक गांव, जहां वोट देना गुनाह है! जिसने वोट दिया, वो गांव का दुश्मन

अनंतनाग संसदीय सीट के अंतर्गत कुलगाम ज़िले के इस गांव में 1270 वोटरों में से सिर्फ 74 ने वोट दिया, वो भी छुप छुपाकर. ये गांव जम्मू व कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की जन्मस्थली है, जो वोट देने के मूड में नहीं है.

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Updated: April 30, 2019, 4:17 PM IST
कश्मीर का एक गांव, जहां वोट देना गुनाह है! जिसने वोट दिया, वो गांव का दुश्मन
कुलगाम ज़िले में स्कूल में बना मतदान केंद्र.
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Updated: April 30, 2019, 4:17 PM IST
दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में बसे एक गांव नौपोड़ा में 40 की उम्र पार कर चुके मोहम्मद मकबूल बट सोमवार को अपने खेतों में काम करने नहीं गए बल्कि सीधे पोलिंग बूथ पर पहुंचे. बट के साथ दो दर्जन से ज़्यादा लोग भी बूथ पर पहुंचे थे, जिनमें से कुछ उनके हमउम्र, कुछ बूढ़े और ज़्यादातर जवान थे.

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इनमें से कई ने 2014 के लोकसभा चुनाव में मतदान किया था लेकिन इस बार ये सभी लोग पोलिंग बूथ पर मतदान करने नहीं पहुंचे थे. सोमवार को चौथे चरण के मतदान के दौरान ये लोग एक स्कूल भवन में बने मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार के पास जाकर बैठे, ये नज़र रखने के लिए कौन मतदान करने आएगा और कौन नहीं.

इस बार मुख्य उम्मीदवारों में राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती शामिल हैं, जिनका जन्म इसी नौपोड़ा गांव में हुआ था. यही गांव मुफ्ती का ​ननिहाल है और यहीं उन्होंने शुरूआती बचपन बिताया है. इस गांव की आबादी में 1270 वोटर हैं इसलिए इस गांव में दो मतदान केंद्र बनाए गए. लेकिन इनमें से सिर्फ 74 लोगों ने वोट के अधिकार का प्रयोग किया यानी यहां कुल 5.8 फीसदी ही मतदान हुआ.

इसी गांव में 2014 में करीब 90 फीसदी मतदान हुआ था. उस समय और इस बार के लोकसभा चुनाव में भी एक पार्टी के पोलिंग एजेंट आमिर अहमद ने बताया कि 'पांच साल पहले कुल 920 वोटरों में से 820 वोटरों ने मतदान किया था, वो भी लंबी लाइनों में लगकर. लेकिन, इस बार पोलिंग बूथ सूने पड़े रहे और जो कुछ लोग आए, वो भी अपने चेहरे छुपाकर आए'.

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महबूबा मुफ्ती. फाइल फोटो.


30 की उम्र के आसपास की एक महिला वोट देने पहुंची, तो वह मतदान केंद्र के पास पानी का बर्तन लिये खड़ी थी. न्यूज़ 18 से बातचीत में उस महिला ने बताया कि वह ट्यूबवेल से पानी लेने का बहाना घर से यहां आई थी. 'मैं नहीं चाहती कि किसी को पता चले कि मैं यहां वोट देने आई. मेरे गांव में अब इस काम को शर्मिंदगी भरा माना जाता है. मुझे किसी ने पहचान लिया तो मुझ पर और मेरे परिवार पर नज़र रखी जाएगी'.
ऐसा क्या बदल गया इन पांच सालों में?
अस्ल में, 2016 के जुलाई महीने में आतंकी कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर खौल रहा था. दूरदराज के इलाकों तक विरोध प्रदर्शन हो रहे थे और घाटी में सशस्त्र बलों के साथ प्रदर्शनकारियों की मुठभेड़ में एक सौ से ज़्यादा लोग मारे गए थे. इनमें से ज़्यादातर मौतें दक्षिण कश्मीर में हुई थीं.

बुरहान वानी के मारे जाने के करीब दो महीने बाद नौपोड़ा गांव के रासिख अहमद व एक अन्य युवक ने एक विरोध रैली में हिस्सा लिया. फिर मुठभेड़ हुई और कई लोग घायल हुए जिनमें रासिख भी था. उसे श्रीनगर भेजा गया लेकिन इलाज के दौरान कुछ ही दिनों में उसकी मौत हो गई.

रासिख के परिवार ने कहा कि उन्होंने 2014 लोकसभा चुनाव में मतदान किया था और रासिख पीडीपी का कार्यकर्ता था. रासिख के एक कज़िन ने कहा कि '2014 में रासिख ने पीडीपी की रैलियों में भागीदारी की थी और वोट भी दिया था'. लेकिन उसकी मौत के बाद पूरा गांव सदमे में था. पूरे गांव को याद है कि रासिख के अंतिम संस्कार के दिन भी सशस्त्र बलों ने वहां लोगों पर आंसू गैस के गोले दागे थे और सबको खदेड़ा था.

रासिख के अंकल अब्दुल मजीद ने कहा कि 'उन्होंने हम पर आंसू गैस के गोले दागे. छर्रे दागे. हमारी औरतों को घर के भीतर घुसकर पीटा गया'. रासिख के अंतिम संस्कार के दिन हुए इस घटनाक्रम के लिए गांव के लोग पीडीपी नेता और महबूबा मुफ्ती के अंकल सरताज मदनी को ज़िम्मेदार ठहराते हैं.

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आतंकी बुरहान वानी.


दूसरी घटना के बाद गांव ने लिया फैसला
मजीद ने आरोप लगाया कि 'हम सरताज मदनी के समर्थक रहे लेकिन उनके इशारे पर ही हमारे लोगों पर कहर बरसाया गया'. मजीद ने सवाल किया कि 'ये लोग सत्ता में आकर हमें ही मारते हैं. क्या हम इसलिए वोट देते हैं?'

नौपोड़ा में 2018 में एक बार फिर ऐसा हुआ जब आर्मी ने कथित रूप से गोली मारकर गांव के एक युवक को मार डाला. मजीद ने कहा कि 'आर्मी हमारे गांव में जब तब आया करती है और नौजवानों को प्रताड़ित करती है. वो लोग नौजवानों को आर्मी कैंप में जबरन बुलाते हैं और उनके फोन तक छीन लेते हैं'.

ऐसा ही एक बार हुआ कि गांव में आर्मी के लोग पहुंचे तो नाराज़ गांव वालों ने उन पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिए. इसके जवाब में आर्मी के लोगों ने फायरिंग की और 20 की उम्र पार कर चुका नौजवान ऐजाज़ अहमद मारा गया.

मोहम्मद मकबूल ने कहा कि 'ऐजाज़ के अंतिम संस्कार के वक्त हमने घोषणा की थी कि अगले चुनाव में जो भी वोट डालेगा, उसे गांव का दुश्मन समझा जाएगा. चूंकि हमने पिछली बार वोट देकर इन लोगों को चुना, जो हमारे बच्चों की जान ले रहे हैं इसलिए हमें लगता है कि अब हमारे बच्चों की जान हमारे ही हाथ में है'.

अनंतनाग संसदीय क्षेत्र में तीन चरणों में वोटिंग होना है और इसके अंतर्गत आने वाले कुलगाम ज़िले में इस बार करीब 10.32 फीसदी ही मतदान हुआ. दक्षिण कश्मीर में ही पिछले दिनों हुए पुलवामा हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात बन गए थे. इसी दक्षिण कश्मीर के नौपोड़ा गांव का मूड ज़मीनी हकीकत बयान करता है कि इस लोकसभा चुनाव में यहां क्या माहौल है.

रिपोर्ट : आकाश हसन

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