जो कई दशक से थे अपने घर से दूर, वो बोले- आज का दिन है असली आजादी वाला

सरकार के फैसले पर 90 के दशक में कश्मीर से विस्थापित हुए लोगों ने सामने रखी राय, कहा – फैसले से खत्म होगा आतंकवाद, राज्य में होगा विकास.

News18Hindi
Updated: August 5, 2019, 4:40 PM IST
जो कई दशक से थे अपने घर से दूर, वो बोले- आज का दिन है असली आजादी वाला
कश्मीरी पंडित (सांकेतिक तस्वीर)
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Updated: August 5, 2019, 4:40 PM IST

केंद्र सरकार द्वारा आर्टिकल 370 पर लिए गए फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर से विस्थापित लोगों में खुशी का माहौल है. 90 के दशक में पलायन कर चुके लोगों में अब उम्मीद जगी है कि उनके साथ घाटी में जो नाइंसाफी हुई थी, उसकी भरपाई करने के लिए केंद्र सरकार ने एक सार्थक पहल की है.


दरअसल, सरकार जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने का फैसला ले चुकी है. सरकार के इस फैसले से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे, जहां केंद्र द्वारा नामित किए गए उपराज्यपाल वहां भेजे जाएंगे.


दिल्ली के बीजेपी नेता और जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी संजय कौल का मानना है कि नेहरू की नीतियों का खामियाजा वहां के लोग आजादी के 70 साल बाद भी भुगत रहे थे, जिसे दूर करने का अवसर आ चुका है. संजय कौल इस फैसले को जम्मू-कश्मीर के लिए ऐतिहासिक करार देते हुए कहते हैं इससे आतंकवाद को खत्म करने में मदद मिलेगी और प्रदेश में बहुआयामी विकास संभव हो सकेगा.


असली आजादी का दिन तो आज है

दिल्ली और एनसीआर में चिकित्सा क्षेत्र में योगदान दे रहे डॉक्टर विनय भट्ट भी उन लोगों में से एक हैं, जिन्हें साल 1990 में अपना घर छोड़कर भागना पड़ा था. डॉ. विनय भट्ट कहते हैं कि कई कश्मीरी विस्थापितों की तरह उनकी आंखों से भी नींद पिछले कुछ रातों से गायब थी और सरकार के इस फैसले के लिए तमाम कश्मीरी विस्थापितों की तरह उन्हें भी इंतजार था. डॉ. भट्ट इसे असली आजादी का दिन मानते हैं और कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में दरअसल आजादी के लिए लड़ाई नहीं बल्कि इस्लामी आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए लड़ी जा रही थी जिसे तुष्टीकरण के नाम पर पाला पोसा जा रहा था. डॉ. विनय भट्ट मानते हैं कि सरकार के इस फैसले से सभी धर्मों के लोग वहां रह सकेंगे और इस्लामिक आतंकवाद पर अंकुश लग सकेगा.


मुस्लिम भाइयों को भी खुश होना चाहिए
विस्थापित कश्मीरियों के लिए संस्था चला रहे अशोक मानवती का कहना है कि सरकार के इस फैसले से मुस्लिम भाइयों को भी खुश होना चाहिए क्योंकि विकास के सारे आयाम खुल सकेंगे. अशोक मानवती का कहना है कि चंडीगढ़ की हालात में तब सुधार हुआ जब उसे यूनियन टेरिटरी घोषित किया गया. अशोक मानवती का कहना है कि अब तक केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए पैसे कुछ परिवारों की झोली में जाते थे, लेकिन अब एक-एक पैसे का हिसाब ऑडिटर जनरल कर सकेंगे. वहीं सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की जिम्मेदारी बढ़ेगी, जिससे चुनाव में रिगिंग और कई मसलों का हल लोकहित में लिया जा सकेगा.


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सरकार उन लोगों को न्याय दिलाएजो घाटी छोड़ने को मजबूर हुए'
पेशे से पत्रकार जम्मू-कश्मीर में हिंसा का दंश झेल चुकी दीपिका भान कहती हैं कि सरकार द्वारा उठाया गया कदम सराहनीय है. लेकिन सरकार उन लोगों को न्याय दिलाने की पुरजोर पहल करे, जिनके परिवार के सदस्यों की हत्या कर घरबार लूटा गया था और घाटी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था. दीपिका भान इसके लिए सरकार से एसआईटी गठन की मांग करते हुए कहती हैं, ‘विस्थापित लोगों को पुर्नस्थापित करने के लिए सरकार को कदम उठाना चाहिए और उसकी घोषणा की जानी चाहिए’


लंबे समय में कारगर होगा यह फैसला
90 के दशक में ही कश्मीर छोड़ने को मजबूर हुए सचिन्दर हंजूरा कहते हैं कि आर्टिकल 370 और 35 ए को हटाया जाना बेहद जरूरी था. इससे कुछ परिवारों को भारत सरकार से पैसे ऐंठने की आजादी मिली हुई थी और जम्मू-कश्मीर में विकास के नाम पर इस्लामी आतंकवाद को बढ़ावा मिल रहा था. एक अमेरिकन कंपनी में डायरेक्टर के पद पर काम कर रहे हंजूरा कहते हैं कि थोड़े समय के लिए भले ही अलगाववादी तत्व वहां संगठित होकर खून खराबा करें लेकिन लंबे अंतराल में यह कारगर साबित होगा और वहां टूरिज्म और इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा मिल सकेगा.


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First published: August 5, 2019, 3:51 PM IST
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