विवादों से परे रहकर राजनीति में कार्य करने वालों को प्रणब दा का अनुसरण करना चाहिए: शाह

पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी का सोमवार की शाम सेना के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में निधन हो गया

गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने कहा कि चाहे पक्ष हो या विपक्ष बतौर सांसद (MP) उनके भाषणों ने देश को हमेशा एक नई दिशा दी. नीतियों के निर्धारण की कटु आलोचना (harsh criticism) करनी हो या स्वयं नीति निर्धारण करना हो, हर बात में मुखर्जी का कौशल दिखाई देता था.

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    नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) के निधन को अपूर्णीय क्षति बताते हुए मंगलवार को कहा कि उनका जीवन विवादों से परे रहकर राजनीति में काम करने का एक अनुपम उदाहरण है. शाह ने ट्विटर (Twitter) पर एक वीडियो संदेश जारी कर मुखर्जी को अपनी श्रद्धंजलि अर्पित की और कहा कि ‘‘भारत रत्न’’ प्रणब मुखर्जी ने लंबे समय तक भारतीय राजनीति (Indian Politics) में न सिर्फ योगदान दिया, बल्कि उसे समृद्ध भी किया. उन्होंने कहा, ‘‘प्रणब दा आज हमारे बीच नहीं हैं. सार्वजनिक जीवन (Public Life) में काम करने वालों के लिए उनका निधन एक अपूर्णीय क्षति है. जो राजनीति में आना चाहते हैं और यह सीखना चाहते है कि विवादों (controversy) से परे रहकर कैसे काम किया जा सकता है तो उन्हें प्रणब मुखर्जी के जीवन का बारीकी से अभ्यास करना चाहिए.’’

    शाह ने कहा कि चाहे पक्ष हो या विपक्ष बतौर सांसद (MP) उनके भाषणों ने देश को हमेशा एक नई दिशा दी. नीतियों के निर्धारण की कटु आलोचना (harsh criticism) करनी हो या स्वयं नीति निर्धारण करना हो, हर बात में मुखर्जी का कौशल दिखाई देता था. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन (public life) में इतना लंबा योगदान करना उनकी अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी. राजनीति (politics) में आने वाले हर युवा के लिए उनका जीवन प्रेरणादायी रहेगा. उन्होंने कहा, ‘‘जब सत्ता (power) में थे तो विपक्ष के लोगों के साथ तालमेल बिठाने का काम करते रहे. जब विपक्ष (opposition) में रहे तो रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने में वे कभी पीछे नहीं हटे.’’

    10 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उसी दिन हुई थी मस्तिष्क की सर्जरी
    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुखर्जी जब भारत के राष्ट्रपति बने तो उस पद की गरिमा को भी बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. राष्ट्रपति भवन को आम आदमी के लिए खोलना उनका बहुत बड़ा फैसला था. मुखर्जी का सोमवार की शाम सेना के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में निधन हो गया. वह 84 वर्ष के थे. उन्हें गत 10 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उसी दिन उनके मस्तिष्क की सर्जरी की गई थी.



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    मुखर्जी 2012 से 2017 तक देश के 13वें राष्ट्रपति रहे. उन्होंने इंदिरा गांधी, पी वी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह जैसे प्रधान मंत्रियों के साथ काम किया. पश्चिम बंगाल में जन्में मुखर्जी को चलता फिरता ‘इनसाइक्लोपीडिया’ कहा जाता था और हर कोई उनकी याददाश्त क्षमता, तीक्ष्ण बुद्धि और मुद्दों की गहरी समझ का मुरीद था.

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