हज़ारों कोरोना वायरस संक्रमित हो सकते हैं उत्तराखंड लौट रहे प्रवासियों में से, सरकार है तैयारः मुख्यमंत्री

हज़ारों कोरोना वायरस संक्रमित हो सकते हैं उत्तराखंड लौट रहे प्रवासियों में से, सरकार है तैयारः मुख्यमंत्री
‘ट्रिपल लॉक’ रणनीति लागू वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कारगर साबित हुई है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक राज्य में कहीं भी वेंटिलेटर व ऑक्सीजन की ज़रूरत नहीं पड़ी है लेकिन अगर आवश्यकता पड़े तो हम पूरी व्यवस्था के साथ तैयार हैं.

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देहरादून. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तराखंड में कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर बड़ी आशंका जताई है और इसके साथ ही यह दावा भी किया है कि उत्तराखंड इससे निपटने के लिए तैयार है. शनिवार को को हिल-मेल द्वारा आयोजित ई-रैबार कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस संकट के दौरान दो-सवा दो लाख प्रवासी उत्तराखंड में अपने घर आ रहे हैं. इनमें से 25000 लोगों के कोरोना वायरस, कोविड-19, से इनफेक्टेड होने की आशंका है और 500 लोगों को वैंटिलेटर की ज़रूरत पड़ सकती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक राज्य में कहीं भी वेंटिलेटर व ऑक्सीजन की ज़रूरत नहीं पड़ी है लेकिन अगर आवश्यकता पड़े तो हम पूरी व्यवस्था के साथ तैयार हैं. हमारे पास सारी व्यवस्थाएं हैं इसी वजह से हमने यह निर्णय लिया है कि हम अपने प्रवासी भाईयों एवं बहनों को वापस लाएंगे, क्योंकि हम अपने लोगों को सड़कों पर नहीं छोड़ सकते.

इसलिए लाएंगे घर वापस 

ई-रैबार में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन से उत्तराखंड के प्रवासी काफ़ी प्रभावित हुए हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित हॉस्पिटेलिटी का क्षेत्र हुवा है. उस क्षेत्र में कई लोग ऐसे हैं जो होटलों में ही रहते हैं, होटलों में ही उनका खाना हो पाता है.



राज्य सरकार उनको दो वक्त का खाना तो मुहैया करा रही है परन्तु वह काफ़ी नहीं है. उनमें डिप्रेशन बढ़ रहा है, उन्हें घर आने की जल्दी हो रही है. अतः यह डर भी है कि कहीं कोई गलत कदम न उठाए. इसलिए हमने फैसला लिया है कि हम सबको सतर्कता के साथ एवं मेडिकल शर्तों को पूरा करते हुए उनके घर वापस लाएंगे.
पर्याप्त क्षमता 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे राज्य में पर्याप्त क्षमता है. हरिद्वार शहर में प्रतिदिन हम काफी लोगों को ठीक तरह से मेडिकल चेक करके उनको घर तक पहुंचा सकते हैं. रहने की कोई दिक्कत नहीं है, हमारे पास कई धर्मशालाए हैं. बड़े-बड़े होटल हैं जिन्हें राज्य सरकार ने कोविड के तहत एक्वायर किया हुवा है. अगर कोई अपने खर्चे से भी रहना चाहता है तो उसके लिए भी हमने अलग से व्यवस्था की गई है.

इसी तरह हल्द्वानी और ऊधम सिंह नगर में हमारे पास पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं. हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि जितने लोग भी हम लाएं उनका ठीक तरीके से मेडिकल चेकअप करने के बाद ही उन्हें घरों को भेजें.

स्वास्थ्य सुविधाएं 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में आईसीयू और वेंटिलेटर्स की कमी थी लेकिन आज हमारे 11 ज़िलों में आईसीयू उपलब्ध हैं, वेंटिलेटर हो गए हैं और अगले सप्ताह तक बाकी बचे दो ज़िलों में भी वेंटिलेटर व आईसीयू उपलब्ध हो जाएंगे. कोविड-19 हेतु हमने अलग से अस्पताल चिन्हित किए हुए हैं.

सरकार ने ग्राम प्रधानों को विशेष अधिकार दिए हैं. गांव में अगर जिसे क्वारंटीन किया गया है वह ग्राम प्रधान की बात नहीं मानता है तो आपदा प्रबंधन के तहत उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी. गांव में अगर किसी के पास खाने की व्यवस्था नहीं है तो प्रधान को इसकी व्यवस्था करने का अधिकार दिया गया है जिसका खर्च राज्य सरकार वहन करेगी.

ई-रैबार कार्यक्रम में भूतपूर्व सीएमडी (एयर इंडिया) अश्विनी लोहानी, एयर मार्शल एमएस बुटोला, गीतकार और सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी, एनटीआरओ और रॉ के पूर्व प्रमुख आलोक जोशी, एफटीआईआई निदेशक भूपेंद्र कैंथोला, पत्रकार अनुराग पुनेठा और पत्रकार मनजीत सिंह नेगी शामिल थे.
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