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'चाऊ का शव लाने की कोशिश न करे पुलिस, आदिवासियों को लग सकती है बीमारी'

News18Hindi
Updated: November 27, 2018, 7:33 AM IST
'चाऊ का शव लाने की कोशिश न करे पुलिस, आदिवासियों को लग सकती है बीमारी'
यकीनन उन बच्चों और वृद्ध दंपत्ति के साथ जो कुछ हुआ, उसे सेंटीनलीज शायद कभी नहीं भूल पाए. इस घटना के बाद पोर्टमन कई बार और नार्थ सेंटीनल गया लेकिन कभी कोई आदिवासी फिर उसके हाथ नहीं आया. वो उसे देखते ही छिप जाते थे.

सेंटीनल आदिवासी लोग दुनिया से अलग थलग रहती है. यह समुदाय दुनिया के सबसे संरक्षित समुदायों में शामिल है. इनकी भाषा और रीतिरिवाज बाहरी लोगों के लिए एक रहस्‍य है.

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  • Last Updated: November 27, 2018, 7:33 AM IST
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आदिवासियों के अधिकारों के लिए सजग रहने वाली संस्था ने अंडमान की पुलिस से अनुरोध किया है कि वह 26 वर्षीय अमेरिकी नागरिक जॉन एलेन चाऊ का शव वापस लाने की कोशिशें बंद कर दें. एक अधिकारी ने सोमवार को कहा था कि पुलिस मनोवैज्ञानिकों की मदद से चाऊ का वापस लाने की कोशिश कर रही है.

आदिवासियों के लिए काम करने वाली संस्था सर्वाइवल इंटरनेशनल ने कहा है कि ऐसी कोशिशें भारतीय पुलिस और सेंटीनल आदिवासियों के लिए खतरनाक हो सकती है. संस्था ने कहा कि अगर आदिवासियों को कोई रोग लग गया तो वह 'खत्म' हो जाएंगे.

संस्था की ओर से कहा गया, 'फ्लू, खसरा या अन्य बाहरी बीमारी के घातक महामारी का खतरा बहुत वास्तविक है, और इस तरह के किसी संपर्क के साथ यह खतरा बढ़ता है.'

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इससे पहले पुलिस ने बताया कि रविवार को अधिकारियों ने शव तलाशने की फिर से कोशिश की लेकिन उनका सामना जनजाति के लोगों से हुआ. पुलिस टीम नाव के जरिए शनिवार को उत्‍तरी सेंटीनल द्वीप गई लेकिन उन्‍हें तट पर आदिवासी समुदाय के लोग नजर आए.

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पुलिस प्रमुख दीपेंद्र पाठक ने बताया कि तट से 400 मीटर पहले अधिकारियों ने दूरबीन की सहायता से देखा कि तीर-धनुष लिए हुए लोग वहां घूम रहे थे. आदिवासियों ने तीर के जरिए ही अमेरिकी नागरिक जॉन एलन चाऊ की ह‍त्‍या की थी.
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पाठक ने बताया, 'वे हमारी तरफ देख रहे थे और हम उनकी ओर नजर बनाए हुए थे.' किसी भी तरह के टकराव से बचने के लिए नाव को वापस घुमा लिया गया. सेंटीनल लोगों में किसी भी तरह का डर न फैले इसके लिए पुलिस सोच-समझकर कदम उठा रही है.

यह बात दीगर है कि सेंटीनल आदिवासी लोग दुनिया से अलग थलग रहती है. यह समुदाय दुनिया के सबसे संरक्षित समुदायों में शामिल है. इनकी भाषा और रीति-रिवाज बाहरी लोगों के लिए एक रहस्‍य है.

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First published: November 27, 2018, 3:51 AM IST
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