पंजाब कांग्रेस में मचे घमासान पर कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट, गेंद अब सोनिया गांधी के पाले में

सिद्धू हाल ही में अपनी सरकार के खिलाफ बयान देकर विद्रोह के रास्ते पर हैं. (File Photo)

सिद्धू हाल ही में अपनी सरकार के खिलाफ बयान देकर विद्रोह के रास्ते पर हैं. (File Photo)

Punjab Congress पर अपनी रिपोर्ट में कमेटी ने कहा है कि अगर समय रहते पंजाब कांग्रेस में गंभीर मतभेद नहीं सुलझाए गए तो अगले विधानसभा चुनाव में काफी नुकसान होगा. 

  • News18India
  • Last Updated: June 10, 2021, 10:29 PM IST
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नई दिल्ली. पंजाब कांग्रेस में उठे विवाद को सुलझाने के लिए सोनिया गांधी द्वारा बनाई गई तीन सदस्यों की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट आलाकमान को भेज दी है. कमेटी ने पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू सहित अन्य बागी नेताओं के बीच सुलह का फॉर्मूला तैयार किया गया है. रिपोर्ट में सिद्धू को लेकर 2 योजना बताई गई है. इस प्लान के तहत नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की कुछ नेताओं की मांग का भी जिक्र किया गया है. साथ ही कहा गया है कि अगर कैप्टन इस पर राजी नहीं होते हैं तो सिद्धू को उपमुख्यमंत्री बनाकर चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष या चुनाव प्रबंधन समिति का अध्यक्ष बनाया जा सकता है.

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अगर समय रहते पंजाब कांग्रेस में गंभीर मतभेद नहीं सुलझाए गए तो अगले विधानसभा चुनाव में काफी नुकसान होगा और सकारात्मक माहौल के बावजूद जीत की संभावना कमजोर पड़ रही है. सिद्धू को संगठन में बनाए रखने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए. सिद्धू लोकप्रिय और भीड़ खींचने वाले नेता हैं, जो अन्य प्रदेशों में भी पार्टी के काम आते हैं. उनको संगठन या सरकार में समयोजित किया जाए. कमेटी द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद आखिरी फैसला सोनिया गांधी को लेना है.

रिपोर्ट के मुताबिक कुछ चुनिंदा लोगों को छोड़कर ज्यादातर नेता अमरिंदर सिंह के पक्ष में हैं. इसलिए कमेटी ने उनको ही नेता बनाए रखने के संकेत दिए हैं. ऐसे में साफ है कि कैप्टन मजबूत स्थिति में हैं और उनकी सत्ता और संगठन दोनों पर पकड़ है. मुख्यमंत्री वही बने रहेंगे. सूबे में पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा अमरिंदर सिंह ही हैं. हालांकि रिपोर्ट में एक और उपमुख्यमंत्री बनाने की संस्तुति की गई है, जो कैप्टन की पसंद का हो सकता है. साथ ही प्रदेश अध्यक्ष को भी बदलने की सिफारिश की गई है.

कमेटी ने कुछ नाराज विधायकों और नेताओं को निगमों और बोर्डों में समायोजित करने का भी सुझाव दिया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आलाकमान जो भी फैसला ले, जल्दी लें. ताकि पार्टी हो रहे नुकसान से बचा जा सके. इसके अलावा चुनाव के लिये अतिशीघ्र कमेटियां बनाने का भी सुझाव दिया गया है. जैसे चुनाव प्रबंधन समिति, को-ऑर्डिनेशन समिति, चुनाव अभियान समिति और स्क्रीनिंग कमिटी इत्यादि. माना जा रहा है कि पार्टी रिपोर्ट पर जल्दी फैसला लेगी.
रिपोर्ट में राज्य सरकार और संगठन के बीच बेहतर सामंजस्य के लिए को-आर्डिनेशन कमेटी के गठन का सुझाव भी दिया गया है.

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