25 साल पहले एक साथ जन्में पांच भाई-बहनों में से तीन का विवाह आज, एक ही मंडप में करेंगी शादी

कोरोनावायरस की वजह से शादी को टाल दिया गया था. पहले यह शादी समारोह 26 अप्रैल को होना था.
कोरोनावायरस की वजह से शादी को टाल दिया गया था. पहले यह शादी समारोह 26 अप्रैल को होना था.

केरल में रहने वाले प्रेमकुमार और रामादेवी के पांच बच्चे हैं. खास बात है कि इन सभी का जन्म आज से 25 साल पहले एक ही दिन हुआ था. खास बात है कि इन सभी भाई-बहनों का नाम 'उ' से शुरू होता है. परिवार का एकमात्र भाई विदेश में नौकरी करता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 25, 2020, 4:48 PM IST
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तिरुवनंतपुरम. केरल (Kerala) में रहने वाले पांच भाई-बहनों का परिवार हमेशा अखबारों की सुर्खियां बना है. यह सिलसिला इन लोगों के जन्म से ही शुरू हो गया था, जब प्रेमकुमार और रामादेवी के यहां 18 नवंबर 1995 को एक साथ पांच बच्चों का जन्म हुआ था. इनमें चार लड़कियां और एक लड़का है. खास बात है कि इस बार इस परिवार की तीन बेटियों का विवाह एक साथ केरल में गुरुवायुर श्रीकृष्ण मंदिर (Guruvayur Krishna Temple) में  24 अक्टूबर को होने जा रहा है. हालांकि, यह शादी 26 अप्रैल को होने वाली थी, जिसे कोरोनावायरस (Coronavirus) की वजह से टाल दिया गया था.

पांचों बच्चे के नाम 'उ' से शुरू होते हैं
ये पांचों बच्चे उतरा, उतारा, उथमा, उथराजा और उतराजन जिन्हें एक साथ पंचरत्नम की उपाधि दी गई है, जिसका मलयालम में अर्थ है 'पांच बहुमूल्य रत्न'. रविवार को होने वाले विवाह समारोह में उतरा, उतारा और उथमा अपने जीवन साथियों के साथ एक बंधन में बंधेंगी. जबकि, चौथे नंबर पर आने वाली बहन उथराजा का विवाह दूसरी तारीख पर होगा क्योंकि दूल्हा टी. आकाश कुवैत में फंस गए हैं और अभी देश वापस नहीं लौट सकते.

उतरा, जो एक फैशन डिजाइनर हैं, उनका विवाह विदेश में  होटल मैनेजमेंट का व्यवसाय करने वाले के.ऐ. अजितकुमार से हो रहा है. वहीं ऑनलाइन पत्रकार उतारा की शादी कोजीकोड के एक पत्रकार के. बी. महेश से हो रही है. एनेस्थीसिया विशेषज्ञ उथमा के पति जी. विनीत विदेश में बसे अकाउंटेंट हैं.




इन सभी बेटियों की इच्छा है कि बचपन से चले आ रहे प्रेम, जुड़ाव और साथ को बनाए रखने में इनके जीवनसाथियों के परिवार मदद करें. जब शादी के प्रस्ताव आ ही रहे थे और शादियां तय हो रही थीं, इनके इकलौते भाई उतराजन को विदेश में नौकरी मिल गई, मगर उसने सब से ऊपर अपने बहनों के विवाह को प्राथमिकता दी. शादी में उतराजन ही परिवार के बड़े की भूमिका निभाएगा और सभी रीतिरिवाजो को पूरा करेगा.

मुश्किलों भरा रहा है परिवार का सफर
इस परिवार को जीवन में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जब उनके पिता ने अपनी जान ले ली. तब इन सभी भाई-बहनों की उम्र नौ वर्ष थी. इनके परेशानियों पर मीडिया का ध्यान तब गया, जब लोग इनकी मदद करने के लिए आगे आए. तिरुवनंतपुरम की रहने वाली इनकी मां को पोथेनकोडे के जिला सहकारी में जल्दी ही नौकरी मिल गई. इस बीच रमादेवी का स्वास्थ्य काफी गिर गया और उनके दिल में पेसमेकर लगवाना पड़ा.
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