पुलवामा शहीदों के परिवारों को भी लूटने से बाज नहीं आ रहे ठग, CRPF के लिए बने मुसीबत

ठग सीआरपीएफ की वर्दी पहनकर आते हैं और शहीदों के परिजनों को बातों में उलझाकर उन्हें लूट लेते हैं. सीआरपीएफ अब तक यह भी पता नहीं कर पाई है कि ये ठग फोर्स के ही कर्मी हैं या बाहरी व्यक्ति वर्दी पहनकर फोर्स को बदनाम कर रहे हैं.

News18Hindi
Updated: July 31, 2019, 11:54 PM IST
पुलवामा शहीदों के परिवारों को भी लूटने से बाज नहीं आ रहे ठग, CRPF के लिए बने मुसीबत
सीआरपीएफ ने कुछ फोटोग्राफ हर यूनिट में भेजे हैं. अर्धसैनिक बल का हर जवान फोटो देखकर यह बताएगा कि ठग उनके आसपास का कोई व्यक्ति तो नहीं है.
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Updated: July 31, 2019, 11:54 PM IST
कभी दो के चार करने के नाम पर तो कभी चांदी के गहनों से सोने के आभूषण बनाने के नाम पर लोग लालच में आ जाते हैं और ठगी का कारोबार चलता रहता है. हद तो तब हो गई जब इन ठगों ने पुलवामा में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों के परिवारों को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया. पुलवामा के शहीदों के परिवार से धोखाधड़ी का पहला मामला पंजाब के पटियाला में  हुआ था. तब से अब तक ये ठग कई शहीदों के परिवारों को अपना शिकार बनाकर सीआरपीएफ के लिए मुसीबत बन चुके हैं.

ये ठग सीआरपीएफ की वर्दी पहनकर आते हैं और शहीदों के परिजनों को बातों में उलझाकर उन्हें लूट लेते हैं. अब तक ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं. सीआरपीएफ अब तक यह भी पता नहीं कर पाई है कि ये ठग फोर्स के ही कर्मी हैं या बाहरी व्यक्ति वर्दी पहनकर सीआरपीएफ को बदनाम कर रहे हैं. इस बार सीआरपीएफ ने कुछ फोटोग्राफ हर यूनिट में भेजे हैं. अर्धसैनिक बल का हर जवान फोटो देखकर यह बताएगा कि ठग उनके आसपास का कोई व्यक्ति तो नहीं है.

शहीदों के परिजनों को सीआरपीएफ ने दी हैं हिदायतें

ठगी के ऐसे मामलों से बचने के लिए शहीदों के परिजनों को भी कुछ हिदायतें दी गई हैं. बता दें कि पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों के परिजनों को सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों से जो सहायता राशि मिली है, वह प्रति परिवार एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा है. कई जगह शहीदों के परिजनों को राज्य सरकारों ने नौकरी भी दी है. इसी जानकारी का फायदा उठाकर ठग सक्रिय हो गए. ठगी में माहिर ये लोग सीआरपीएफ की वर्दी पहनकर शहीद के घर पहुंच जाते हैं. बताया जाता है कि वे सीआरपीएफ मुख्यालय से आए हैं.

आधार, पैन, बैंक डिटेल और पासबुक मागते हैं ठग

ये ठग बड़ी शालीनता के साथ शहीदों के परिजनों से कहते हैं कि आपके नाम कुछ पैसा आया है. उसी से जुड़ी कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी हैं. वह आधारकार्ड, पैन कार्ड, बैंक डिटेल और पासबुक देने के लिए कहते हैं. साथ ही यह भी पूछते हैं कि आपने मिला हुआ पैसा कहां लगाया है. इसके बाद वे कुछ कागजों पर हस्ताक्षर कराते हैं. थोड़ी देर के लिए बैंक में जाने की बात कहकर घर से निकल जाते हैं. एक घंटे बाद लौटकर आते हैं और कहते हैं कि आप इतने रुपये जमा करा दें ताकि सारी राशि आपके खाते में आ सके.

बैंक से घर के रास्ते में गच्चा देकर निकल लेते हैं ठग
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अगर शहीद के परिजन कहते हैं कि इतने रुपये नहीं हैं तो ठग कहता है कि चेकबुक लेकर बैंक चलो. शहीद के परिजन कुछ नहीं समझ पाते और उसके पीछे हो लेते हैं. वे बैंक से पैसे निकलवाकर दे देते हैं. ठग उन्हें घर छोड़ने की बात कहता है. बीच रास्ते में वह गच्चा देकर कहीं निकल जाता है. सबसे पहले पटियाला में पुलवामा के शहीद के परिजनों के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया था. सीआरपीएफ जालधंर डिविजन के डीआईजी दर्शन लाल गोला ने इस ठगी की पुष्टि की थी.

पुलवामा हमले में पटियाला के सीआरपीएफ जवान कुलविंदर सिंह शहीद हो गए थे. उनकी शहादत पर बिलखते परिजनों को ढांढस बंधाता जवान. सबसे पहले शहीद कुलविंदर का परिवार ही ठगों के निशाने पर आया था.


पटियाला के शहीद कुलविंदर के परिजनों से हुई थी पहली ठगी

कुलविंदर के माता-पिता दर्शन सिंह और अमरजीत कौर ने बताया कि ठगी करने वाला व्यक्ति सीआरपीएफ जवान की वर्दी पहन कर आया था. ये ठग 2 मई को कुलविंदर के घर पंहुचा और कहा कि सरकार बतौर मुआवजा और 29 लाख रुपए उनके अकाउंट में ट्रांसफर करना चाहती है. कुलविंदर के माता पिता ने अकाउंट डीटेल्स दे दी, जिसके बाद उसने मुआवजे के 50 लाख रुपए किसी और अकाउंट में ट्रांसफर करने की कोशिश की. हालांकि, बैंक के नियमों के मुताबिक ऐसा नहीं हो पाया और ठग सिर्फ 1.5 लाख रुपए ही ट्रांसफर कर सका.

कई और शहीदों के घर भी सीआरपीएफ की वर्दी में पहुंचे ठग

यूपी के आजमगढ़ जिले में भी ऐसा ही मामला सामने आया था. वहां भी निजामाबाद थाना क्षेत्र के गांव गौसतुरघूरी में शहीद शिनोद के माता-पिता के साथ ठगी हो गई. ठग एक लाख 20 हजार रुपये लेकर चंपत हो गया. दोनों ही मामलों में ठग सीआरपीएफ की वर्दी में आए थे. उन्होंने कहा, विभाग की तरफ से कुछ रुपया आया हुआ है, जो शहीद के परिवार को मिलना है. शिनोद कुमार बिहार के औरंगाबाद में नक्सलियों के साथ एक मुठभेड़ में शहीद हुए थे. पुलवामा के तीन अन्य शहीदों के परिजनों के यहां भी ठग पहुंचे थे. हालांकि वे समय रहते सचेत हो गए और धोखाधड़ी का शिकार होने से बच गए. यूपी पुलिस ने आगरा के रहने वाले एक आरोपी को बुधवार को पकड़ा है. उसने स्वीकार किया है कि शहीद कुलविंदर के मां-बाप को लूटने वाला वही है. रोपड़ पुलिस अब पूछताछ के लिए हरेंद्र को रिमांड पर लेगी.

पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी और पैसा दोगुना करने का झांसा देते हैं

सीआरपीएफ ने शहीदों के परिजनों को हिदायत दी है कि अगर उनके पास वर्दी पहना कोई व्यक्ति आए तो सबसे पहले उसका पहचान पत्र देखें. अगर वह पेट्रोल पंप या गैस एजेंसी दिलाने की बात कहे तो चुपके से सीआरपीएफ के नोडल अधिकारी को बताएं. शहीद की प्रतिमा लगाने के लिए पैसा मांगे या उनका पैसा पॉन्जी स्कीम में लगाकर डबल करने का झांसा दे तो तुरंत संबंधित अधिकारी को फोन करें. अपने मोबाइल कैमरे से ठग का फोटो खींच लें. फौरन सीआरपीएफ की हेल्पलाइन पर संपर्क करें.

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First published: July 31, 2019, 11:48 PM IST
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