लद्दाख में तिब्बती शेरों से खौफ खाती है चीन सेना, जानिए कौन हैं एसएफएस के घातक कमांडो

लद्दाख में तिब्बती शेरों से खौफ खाती है चीन सेना, जानिए कौन हैं एसएफएस के घातक कमांडो
1969 में तिब्बत से 1600 परिवार पलायन कर लेह में बस गए थे.

सूत्रों का कहना है कि 29-30 अगस्त की रात को इन जवानों ने अहम योगदान सेना के साथ मिलकर दिया और कई चीनी सैनिकों को मार कर भगाया. इन्होंने ब्लैक टॉप और अक्साई चीन के रास्तों के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 4, 2020, 5:31 PM IST
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नई दिल्ली. एसएफएस यानी स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (Special Frontier Force) के घातक कमांडो हैंं  तिब्बती शेर. स्पेशल फ्रंटियर फोर्स में अधिकांश तिब्बती युवा हैंं जो काफी वक्त पहले तिब्बत से पलायन कर लेह में जा बसे थे. इन कमांडों को विकास रेजीमेंट के नाम से जाना जाता है. तिब्बत से पलायन करने वालों की तीसरी पीढ़ी के युवा हैं जो बर्फीली चोटियों पर हर लड़ाई लड़ने में सक्षम हैं. चीन से अपनी सरजमी वापस लेने का सपना सजोंए हैंं ये कमाडों. लेह में बसे नईमा तेनजिन एलएसी पर शहीद होने बाले पहले तिब्बती सैनिक हैंं.

यही कारण है कि जब नईमा का शव उनकी बस्ती मे पहुंचा तो उनके शव पर तिरंगे के साथ-साथ तिब्बत का ध्वज भी लिपटा था. एसएसएफ के डिप्टी लीडर 51 साल के नईमा एक ट्रेंड कमांडो के साथ-साथ अपने जवानों के लिए प्रेरणा स्तोत्र भी थे. ब्लैक टॉप पर कब्जे मे नईमा का योगदान सराहनीय रहा है और उन्होंने इसी चोटी को कब्जा करते हुए शहादत पाई. लेह के पास सोनोलिंग बस्ती है जिसमें तिब्बत से पलायन कर सैकड़ों परिवार साल 1969 में आए थे.

1600 परिवारों ने किया था पलायन
लगभग 1600 परिवारों ने पलायन किया था और लेह के चोगलामेसर और हानले मे शरण ली थी. आज इन लोगों की संख्या लगभग 8 हजार के करीब है और एसएसएफ में अधिकांश युवा इन्हीं परिवारों के हैं जो पहाड़ी युद्द कला में महारत रखते हैं.
इस समय लेह में लगभग 12 के करीब गावों में ये लोग बसे हैं. एसएसएफ सेना की तरह ही काम करती है और पूरी तरीके से भारतीय सैनिकों की तरह से कमांडों तैयार हुए हैं, लेकिन ये फोर्स होम मिनिस्ट्री के अधीन है. परंतु लेह और लद्दाख में ये फोर्स सेना के लिए अहम है क्योंकि एसएसएफ के जवान पहाड़ों और बर्फीले रेगिस्तान में लड़ने में माहिर हैं और चीनी सैनिक भी इनसे डरते हैं.





तिब्बती शेरों से डरती है चीनी सेना
चीन की सेना भी तिब्बती शेरों से डरती है. सूत्रों का कहना है कि 29-30 अगस्त की रात को इन जवानों ने अहम योगदान सेना के साथ मिलकर दिया और कई चीनी सैनिकों को मार कर भगाया. इन्होंने ब्लैक टॉप और अक्साई चीन के रास्तों के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया है. इस समय भारतीय सेना के साथ एसएसएफ के कई जवान इस इलाके मे पोस्टों पर तैनात हैं.
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